आज फिर गुजरा जमाना याद आ गया
आज फिर गुजरा जमाना याद आ गया
आज फिर वह गुजरा लम्हा याद आ गया।
भुट्टे पर नमक नींबू लगा कर खाना याद आ गया।
खाने के साथ करी हुई शैतानियां करने का मंजर याद आ गया।
किस तरह पक्के करोंदे का रस लगाकर मां को हम डराया करते थे वह मंजर याद आ गया।
उनका ममतामई मन करता था कहीं चोट तो नहीं लग गई।
मगर हमको मंद मंद हंसते देख यह सारा माजरा समझ कर
उनका डांट लगाना याद आ गया।
आज फिर भाई आपकी कमी को कोई भर नहीं सकता है वह याद आ गया।
बचपन का वह जमाना जो साथ हमने गुजारा था शैतानियां कर करके
सबको छका कर लड़कर वापस एक हो जाना वह जमाना याद आ गया।
कभी ना भाई बहन के रिश्ते से दूर जाने का वह जमाना याद आ गया ।
मगर ईश्वर भी कितना निष्ठुर है की बहुत जल्दी ही उसने हमसे आपको छीन लिया
वह जमाना भी याद आ गया।
आंख के कतरे से आंसू निकलना और आपकी याद में आंसू भी बहा गया।
साथ में दिल में आपकी याद भी जगा गया।
आज फिर मुझको वह गुजरा जमाना याद आ गया।
सेव और लड्डू के साथ रोटी खाना याद आ गया।
तेरी यादों की बारिश में वह जमाना याद आ गया।
