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Vimla Jain

Action Children

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Vimla Jain

Action Children

आज फिर गुजरा जमाना याद आ गया

आज फिर गुजरा जमाना याद आ गया

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आज फिर वह गुजरा लम्हा याद आ गया।

भुट्टे पर नमक नींबू लगा कर खाना याद आ गया।

खाने के साथ करी हुई शैतानियां करने का मंजर याद आ गया।

किस तरह पक्के करोंदे का रस लगाकर मां को हम डराया करते थे वह मंजर याद आ गया।

उनका ममतामई मन करता था कहीं चोट तो नहीं लग गई।

मगर हमको मंद मंद हंसते देख यह सारा माजरा समझ कर

उनका डांट लगाना याद आ गया।

आज फिर भाई आपकी कमी को कोई भर नहीं सकता है वह याद आ गया।

बचपन का वह जमाना जो साथ हमने गुजारा था शैतानियां कर करके

सबको छका कर लड़कर वापस एक हो जाना वह जमाना याद आ गया।

कभी ना भाई बहन के रिश्ते से दूर जाने का वह जमाना याद आ गया ।

मगर ईश्वर भी कितना निष्ठुर है की बहुत जल्दी ही उसने हमसे आपको छीन लिया

वह जमाना भी याद आ गया।

आंख के कतरे से आंसू निकलना और आपकी याद में आंसू भी बहा गया।

साथ में दिल में आपकी याद भी जगा गया।

आज फिर मुझको वह गुजरा जमाना याद आ गया।

सेव और लड्डू के साथ रोटी खाना याद आ गया।

तेरी यादों की बारिश में वह जमाना याद आ गया।


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