Vinita Rahurikar
Classics
उठो,
क्यों गुम हो अंधेरों में
झटक डालो।
खुद पर पड़ी मिट्टी
सर उठाकर देखो जरा,
रौशनी की एक किरण
जगमगा रही है ऊपर।
एक नई कोंपल
बस जन्म लेने ही वाली है।
प्रेम
चल रही हूँ मै...
कहाँ नहीं हो ...
आईना
मुहब्बत बंजार...
बेटा...
तलहटी
वर्जनाएँ...
विश्व एकता दि...
जीवन एक खेल.....
करूंँ भवानी तेरा आह्वान! लिए श्रद्धा की थाल! करूंँ भवानी तेरा आह्वान! लिए श्रद्धा की थाल!
मेरी जिंदगी का खूबसूरत सफर और यहीं से शुरू हुई थी मेरी कैफे की कहानी। मेरी जिंदगी का खूबसूरत सफर और यहीं से शुरू हुई थी मेरी कैफे की कहानी।
जय हो माँ शैल तेरा दर्स लगे स्पर्श। जय हो माँ शैल तेरा दर्स लगे स्पर्श।
भरी सभा में साड़ी खींचता दुशासन बेबस असहाय द्रौपदी। भरी सभा में साड़ी खींचता दुशासन बेबस असहाय द्रौपदी।
बस चलना चलते ही जाना जीवन की मजबूरी है। बस चलना चलते ही जाना जीवन की मजबूरी है।
तेरे आंचल की छांव में जिंदगी की धूप कम लगती थी। तेरे आंचल की छांव में जिंदगी की धूप कम लगती थी।
बचपन से शिव को जिसने प्रेम किया पार्वती माता थी वो।। बचपन से शिव को जिसने प्रेम किया पार्वती माता थी वो।।
भवन को अपनी ममता से घर अलंकरण देती है ! अपनी ममता की छाँव में स्वर्ग सुख भर देती है ! भवन को अपनी ममता से घर अलंकरण देती है ! अपनी ममता की छाँव में स्वर्ग सुख भर ...
मथुरा पधारे नंदलाल देवकी माई हुई बेहाल! मथुरा पधारे नंदलाल देवकी माई हुई बेहाल!
मोरपंखी हरा रंग होता बहुत ही मनमोहक, मोरपंखी रंगो जैसा अद्भुत नूरानी आकर्षक। मोरपंखी हरा रंग होता बहुत ही मनमोहक, मोरपंखी रंगो जैसा अद्भुत नूरानी आकर्षक।
इंद्रिय सारी लगी हुईं नित, भोग-भाव की लोलुपता में इंद्रिय सारी लगी हुईं नित, भोग-भाव की लोलुपता में
पूजी जाती देवी कुष्मांडा रूप में, नवरात्रि के चौथे दिन। पूजी जाती देवी कुष्मांडा रूप में, नवरात्रि के चौथे दिन।
शैलपुत्री गिरिसुता ! मातु वांछित दायिनी !! उत्कट तपस्या लीन : साधक ब्रह्मचारिणी !! शैलपुत्री गिरिसुता ! मातु वांछित दायिनी !! उत्कट तपस्या लीन : साधक ब्रह...
विकट था विलग रहना प्रेम में दोनों के एक अंतर्मन। विकट था विलग रहना प्रेम में दोनों के एक अंतर्मन।
स्त्री से ही घर परिवार , स्त्री बिन ना रहे संसार। स्त्री से ही घर परिवार , स्त्री बिन ना रहे संसार।
अष्टभुजी मां कुष्मांडा को सादर कर लीजिए प्रणाम। अष्टभुजी मां कुष्मांडा को सादर कर लीजिए प्रणाम।
शिवलिंग को जो करने चली थी खंडित खुद ही हो गई थी वो खंडित। शिवलिंग को जो करने चली थी खंडित खुद ही हो गई थी वो खंडित।
दब के मिट्टी में कई सालो से था सोया हुआ आज जागा बीज,अब जाके दरख़्त बनाएगा। दब के मिट्टी में कई सालो से था सोया हुआ आज जागा बीज,अब जाके दरख़्त बनाएगा।
शुम्भ निशुंभ और रक्तबीज ने मचा रखा था धरा पर हाहाकार। शुम्भ निशुंभ और रक्तबीज ने मचा रखा था धरा पर हाहाकार।
आदिशक्ति जगदम्बिका , महाशक्ति गुण खान ! आदिशक्ति जगदम्बिका , महाशक्ति गुण खान !