आईना
आईना
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बरसों से देख रही हूँ
आईने को मैं
और आईना मुझे
इतने बरसों में
आईने ने कभी नहीं कहा
आज तक भी की
तुम्हारे चेहरे की रेखाओं में
उम्र की ढलान दिखने लगी है
आईना तो रोज़ ही
मुझसे यही कहता है
तुम आज भी वैसी ही हो
जैसी कल थी
अपनी उम्र की
ढलती रेखाएँ तो
मैंने देखी
तुम्हारी आँखों में
अचानक बढ़ी
तुम्हारी व्यस्तता में
घर में पसरते जा रहे मौन,
चाय के एकाकी कपों,
और रात भर
मेरी तरफ रहने वाली
तुम्हारी पीठ में....
