STORYMIRROR

Vinita Rahurikar

Abstract

4  

Vinita Rahurikar

Abstract

प्रेम

प्रेम

1 min
852

प्रेम आया था

धवल चाँदनी में लिपटे

रात-रानी की सुगंध में सराबोर


अनगिनत रँगों के फूल लिए

लेकिन न तुम इमरोज थे

न हो सकी मैं ही अमृता


और उदास हो ठिठक गया

देहरी पर ही प्रेम

अपने हरेपन में भी


मुरझाया हुआ

यादों के सूखे फूल मुठ्ठी में भरे।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract