STORYMIRROR

Sunil Maheshwari

Drama

3  

Sunil Maheshwari

Drama

आ अब लौट चलें

आ अब लौट चलें

1 min
552

सुबह का भूला 

शाम में है,

किसी के 

इंतज़ार में

कल जो हुई 

तक़रार 

अब सुलझा 

लेते है मेरे यार।


ये वक्त का 

सिलसिला यूं ही

चलता रहेगा,

कारवां भी कुछ 

यूं बनता ही 

रहेगा।


जब मान ही ली है,

गलती तो 

माफ़ी भी दीजिये,

कुछ एहसान ए दोस्तो 

हम पर भी कीजिए।

यूँ ही नही सुबह का भूला

शाम को लौट आता है 

छोड़ के सारे गम 

तू ही मुझे भाता है।


ऐ मेरे यार सच कहूँ 

तुझसे पहले का मेरा

नाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama