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Kanchan Prabha

Romance Classics

3  

Kanchan Prabha

Romance Classics

घूँघट

घूँघट

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300

कभी किसी की लाज है घूँघट

सुहागन के सर का ताज है घूँघट


दुल्हन के मुख का राज है घूँघट

ब्याह में सूरत सजाती है घूँघट


सजनी के चेहरे दमकाती है घूँघट

भारतीय नारी का प्रतीक है घूँघट


प्रेमी की अभिलाषा की प्रीत है घूँघट

फूलों की सेज की खुश्बू है घूँघट


माँ बाप के सपनों की आबरू है घूँघट

कहीं इज्जत कहलाती है घूँघट


नारी पर सबको भाती है घूँघट

चाँद से चेहरे की दीवार है घूँघट


चन्दा चकोरी का प्यार है घूँघट

पिया के प्रणय की शुरुआत है घूँघट

प्रणय जोड़े की नवप्रभात है घूँघट।


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