Akanksha Gupta (Vedantika)
Classics Inspirational
जीवन पथ के मार्ग पर
तुमने चलना सिखाया
एक अबोध बालक को
एक जिम्मेदार नागरिक बनाया
एक किरण प्रकाश की तुम
मेरे जीवन में अंधकार
कैसे व्यक्त करूँ आभार।
मिलन का रंग
मोहब्बत का दा...
ज़िंदगी
ज़िम्मेदारियों...
सौगात
बाकी है
अधूरी रह गई
नसीब में नहीं...
दिल की नज़र से
वीरानियाँ
अंजुरी में भरपूर हों, सदा रूप रस गंध. जीवन में अठखेलियाँ, करता रहे बसंत.. अंजुरी में भरपूर हों, सदा रूप रस गंध. जीवन में अठखेलियाँ, करता रहे बसंत..
कागज़ पर उकेरती शब्दों का छायाकार हूँ, फूल के संग पनपता हुआ सुगंध का हार हूँ ! कागज़ पर उकेरती शब्दों का छायाकार हूँ, फूल के संग पनपता हुआ सुगंध का हार हूँ ...
फिर बीज घृणा के उनके लिए किस कारण से बोना है फिर बीज घृणा के उनके लिए किस कारण से बोना है
एक दिन ही नहीं जब हर दिन हम सम्मान पाएंगे एक दिन ही नहीं जब हर दिन हम सम्मान पाएंगे
कब मुस्कान छुटते गये, और आंखें भरती गई। कब मुस्कान छुटते गये, और आंखें भरती गई।
स्मिता यूँ बिखरी रहेगी, तुम जो मिल गए हो। स्मिता यूँ बिखरी रहेगी, तुम जो मिल गए हो।
ढेर सारे बातें करेंगे अपने आपमें खो जाएंगे..... ढेर सारे बातें करेंगे अपने आपमें खो जाएंगे.....
घोर निराशा का अँधियारा, आशा का अब दीप जलाओ।। मैं शुष्क भूमि सा-------- घोर निराशा का अँधियारा, आशा का अब दीप जलाओ।। मैं शुष्क भूमि सा--------
आओ पिए हम बंग और लगाए सबको रंग आई रे आई होली आई। आओ पिए हम बंग और लगाए सबको रंग आई रे आई होली आई।
अब पंख फैला ये उड ने दो। सपनों के सितारे को चमकाने दो। अब पंख फैला ये उड ने दो। सपनों के सितारे को चमकाने दो।
कुछ भी हो जाए हौसला न छोड़ना तुम। बस तेज गति से उड़ना तुम।। कुछ भी हो जाए हौसला न छोड़ना तुम। बस तेज गति से उड़ना तुम।।
इसकी सच्ची रीत हे, जुदा होकर भी ना भुले, यही तो इस रिश्ते की जीत है...... इसकी सच्ची रीत हे, जुदा होकर भी ना भुले, यही तो इस रिश्ते की जीत है......
फिर उसे कहतेहैं, उसके बच्चे ही बुढ़िया......... फिर उसे कहतेहैं, उसके बच्चे ही बुढ़िया.........
रह-रहकर दुख रही चोटिल अंगों-सी फिर भी चलती साथ-साथ वो हमेशा। रह-रहकर दुख रही चोटिल अंगों-सी फिर भी चलती साथ-साथ वो हमेशा।
प्यार के रंग में रंगीन कर देंगें हम सारे संसार। प्यार के रंग में रंगीन कर देंगें हम सारे संसार।
अबीर-गुलाल लिए हाथों में, छुप उपवन में हरिप्रिया खड़ी है।' अबीर-गुलाल लिए हाथों में, छुप उपवन में हरिप्रिया खड़ी है।'
वितरण विभाजन में हो गई, मंसा सबकी डाँवाडोल। वितरण विभाजन में हो गई, मंसा सबकी डाँवाडोल।
सभी भारती कहलायेंगे, तब ही तो होगा उद्धार।। सभी भारती कहलायेंगे, तब ही तो होगा उद्धार।।
यूँ तो दोस्तों ने भी की है दुश्मनी मगर क्यूँ फिर भी हर किसी पे मुझे ऐतबार है। यूँ तो दोस्तों ने भी की है दुश्मनी मगर क्यूँ फिर भी हर किसी पे मुझे ऐतबार है।
गर्व हैं इस बात का मैं एक महिला हूं, अपने को मिटा, निर्माण की कला हूं। गर्व हैं इस बात का मैं एक महिला हूं, अपने को मिटा, निर्माण की कला हूं।