Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
पत्थर
पत्थर
★★★★★

© Anita Agarwal

Drama Tragedy

1 Minutes   6.7K    5


Content Ranking

नींद आती नहीं,

रात जाती नहीं,

खुली पलकों में सदियाँ कटती हैं,

सपने मैं देखूं कैसे ….

शम्मा जलती नहीं,

मैं पिघलती नहीं,

पत्थर की वादियों में है घर मेरा,

आसमानों को मैं रुलाऊँ कैसे….

धूप खिलती नहीं,

पर्छाइंयाँ मिटती नहीं,

हवाएं भी कुछ रूठी हुई सी हैं,

खुशबुएँ मैं पाऊँ कैसे………

बात होती नहीं,

मन भिगोती नहीं,

रास्ते ख़त्म होते हैं चौराहों में,

तुम तक मैं आऊं कैसे…

सपना मन परछाइयाँ

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..