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Garima Mishra

Romance

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Garima Mishra

Romance

चंद लम्हे

चंद लम्हे

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आज़मा रहे थे वो

या निभा रहे थे वो

समझने की कोशिश में

वो वक़्त की तरह गुज़र गये

हम वहीं ठहरे रहे

वो आगे निकल गए


मेरी बातों पर फिसले थे

शायद अब संभल गए

मन चंचल है मेरा

थोड़ा सा बेबाक क्या हुआ

उन्होंने अपने रस्ते बदल दिए


वादों से जीता था हमें

फिर हम उनके क्या हुए

कसमें सब भूलाकर वो

ज़माने की रिवायतों में उलझ गये

फिर हम वहीं ठहरे रहे

वो आगे निकल गए !


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