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Palak Inde

Romance

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Palak Inde

Romance

फितूर

फितूर

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उनकी मोहब्बत को 

अपनी ज़िंदगी की किताब कहते थे

आज उसी किताब के पन्ने फाड़ दिए

जहाँ वो और हम, साथ रहते थे


कोई कहता मोहब्बत इज़हार है

तो किसी के लिए वो इंतज़ार है

बहुत उलझी सी शेय है

इसलिए हमारा इसे इंकार है


अपनी ख्वाबों की दुनिया को

आज हम छोड़ आए

इश्क़ रहता जिस गली

हर वो रास्ता मोड़ आए


ख्यालों का मिलना इश्क़ है

उनके ख्यालों में खो जाना भी इश्क़ है

इस ख्याल से 

कि उन्हें चोट न पहुँचा दूँ

उनसे दूर हो जाना भी इश्क़ है


मोहब्बत का भी दस्तूर है

मोहब्बत मुकम्मल मिले तो गुरूर है

जिनकी दास्ताँ रह जाए अधूरी

उनके सर चढ़ बोले

इश्क़ का फितूर है!


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