मंदिर माणुसकी
मंदिर माणुसकी
मंदिर माणुसकी
जागवत आलं
जागवत आहे
हृदय मनामनात
----------------------------------------
इथलं इथंच राहील
कुठं समावणारं
सामावतं आत्मा
मिळवून ते पण काही
----------------------------------------
भूमिका तया जेवढी
हेतू काळाच खेळ
वलय फक्त जगण्यातं
देवाच आधार बघतं
----------------------------------------
जग स्वास स्वार्थी
मंदिर परमार्थ शिकवत
जाळं माय लोभाचं
गौनं सार दाखवतं
---------------------------------------
कोण कशात जगत
स्वप्न डोर धरून
आलंय येतं जाता
मोकळ भाव होतं
----------------------------------------
मन आश्रयी देव भाव
कृपेसाठी भक्ती ठाव
शांती पावते अंतरी
जिणं समाधानंतं
----------------------------------------
