Rajesh Chandrani Madanlal Jain

Classics


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Rajesh Chandrani Madanlal Jain

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यशस्वी (6)

यशस्वी (6)

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फिर एक दिन यशस्वी ने कॉल किया, पूछा - सर, मेरी बहन तपस्वी, बारहवीं में है। उसकी स्ट्रीम साइंस है। उसके लिए इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करना ठीक रहेगा या बुटीक, जिसमें कमाई इंजीनियर से ज्यादा आ रही है, में साथ करना ठीक रहेगा। 

मैंने उल्टा प्रश्न किया - क्या, तपस्वी अभी बुटीक में, तुम्हारे साथ काम कर रही है?

यशस्वी ने बताया - जी नहीं, अभी मेरे रिलीवर की तरह माँ, बुटीक के कामों को देख लेती हैं। 

तब मैंने कहा - मैंने, तुम्हें,पढ़ाई छोड़कर पापा के व्यवसाय में, साथ लगने के लिए तब, इसलिए कहा था कि परिस्थितियाँ वैसी थीं। तपस्वी के लिए पढाई छोड़ने की, ऐसी बाध्यता नहीं है। अगर वह पढ़ना चाहती है तो उसे, इंजीनियर बनने के लिए पढ़ने दीजिये। 

यह कहने के साथ ही पूछा - यशस्वी-तपस्वी, ये नाम किसने रखे हैं। 

यशस्वी ने बताया - पापा ने!

इस पर मैंने कहा - तुम्हारे पापा की पसंद, उत्कृष्ट रही एवं तुम्हारी कुशाग्रता से प्रतीत होता है, ये तुम्हें उनके (आनुवंशिकी) जेनेटिक्स से मिले हैं। कहने का आशय यह कि पापा, प्रतिभावान पुरुष रहे होंगे। परिवेश एवं सँस्कारवश वे रूढ़ियों के प्रभाव (अधीन) में, बेटी पर बेटे को श्रेष्ठ मानने की भूल कर बैठे। इसलिए एक साधारण व्यक्ति की पहचान से ऊपर न उठ सके। उनका सहारा एवं परिवार प्रमुख होकर, तुमने दर्शाया है कि परिवार में बेटा न होना, कोई कमी नहीं होती है। तुम किसी बेटे जैसे ही व्यवसाय में स्थापित होकर, ऐसा साबित कर सकी हो। 

यशस्वी ने उत्तर दिया - सर, आप ठीक कहते हैं। मेरा अनुभव भी पापा के साथ यही है। वे आस-पड़ोस के अन्य लोगों से, अलग तरह से काम एवं व्यवहार करते थे। 

मैंने कहा - उचित मार्गदर्शन एवं अच्छी संगत न मिल सकने से एक महान क्षमता वाला व्यक्ति, साधारण प्रभाव ही छोड़ चला जाता है। तुम्हारे पापा जैसे और भी अनेक व्यक्ति ऐसे क्षमतावान हैं। उन्हें अपनी क्षमताओं का सही प्रयोग करना आ जाए तो हमारा, देश एवं समाज दुनिया के लिए उच्च समाज सँस्कृति हेतु नेतृत्व दे सकता है।  

तब यशस्वी ने सहमति भरते हुए सामान्य औपचारिकता की बातों के बाद 'बाय सर' कहते हुए कॉल खत्म किया था।  

फिर यशस्वी का अगला कॉल, थोड़े अंतराल के बाद आया था। यह एक तरह से शिकायती कॉल था। जिसमें उसने बताया कि वह, आयकर रिटर्न्स जमा कराने के अभिप्राय से, एक सी ए के कार्यालय गई थी। यशस्वी एवं सीए के बीच वार्तालाप तब यूँ हुआ था :-

सी ए - आपके रिकॉर्ड देखने से आपकी व्यवसायिक उपलब्धि, अविश्वसनीय लग रही है। पूर्व के दो वर्षों में, पाँच लाख से कम आय के साथ, आपने 'शून्य' आयकर की रिटर्न्स दाखिल की हैं। इस वर्ष आपकी आय तीस लाख से ऊपर अर्थात सात गुनी बढ़ी है। ऐसा चमत्कार कैसे?

यशस्वी - सर, हमने टेलरिंग के साथ, आधुनिक फैशन डिजाइनिंग अपने व्यवसाय में जोड़ा है। 

सी ए - अरे वाह, इससे यह संवृद्धि (ग्रोथ) संभव है। (फिर हँसते हुए) बहुत बहुत बधाई! मैं आपकी रिटर्न्स सब्मिट कर दूँगा। 

यशस्वी - आपकी फीस कितनी होगी?

सी ए (कुछ अलग अंदाज से) - आप, फीस रुपयों से अलग रूप में भी अदा कर सकती हैं। 

यशस्वी - सर, मैं समझी नहीं।  

सी ए - विशेष नहीं, पाँच सितारा होटल में, मेरी तरफ से डिनर और एक रात हमारी। 

यशस्वी ( तीव्र प्रतिक्रिया एवं स्वर तेज करते हुए) - ये कैसी अजीब बात कर रहे हैं, आप? मुझे आप फीस बताइये। 

सी ए - दस हजार रूपये। आप मॉडर्न प्रोफेशन में है अतः मैंने सोचा, आपकी सोच भी आधुनिक और खुली होगी, अतः पूछा। आपको पसंद नहीं तो भूल जाइये, मैंने जो कहा।   

इतना बताकर यशस्वी ने रोष भरे स्वर में मुझसे पूछा - क्या आधुनिक होने का अर्थ यह है? क्या, कोई युवा लड़की, आधुनिक वस्त्रों में है तो इसका मतलब यह होता है कि वह, किसी का, ऐसा साथ चाहती है? 

यशस्वी के रोष एवं उसके प्रश्नों का समाधान करने के लिए उपयुक्त उत्तर के लिए मुझे कुछ पल सोचना पड़ा। 

इसी बीच यशस्वी ने पूछा - सर, आपने सुना, मैंने क्या कहा है ?

मैंने कहा सुना है, विचार में हूँ कि मुझे क्या कहना चाहिए। तुम दो मिनट रुको। (फिर कुछ क्षण उपरांत मैंने कहा) - 

हम भारतीय, पाश्चात्य संस्कृति की नकल करने को आधुनिक होना मानने लगे हैं। पश्चिमी देशों में कोई पुरुष (या महिला भी) का ऐसा पूछना (प्रस्ताव), बुरा नहीं माना जाता है। उत्तर ना होने पर प्रस्ताव ऐसे ही छोड़ दिया जाता है जैसे उन महोदय ने किया है। 

हम भारतीयों में आज बड़ी कमी यह है कि हम, कोई नकल भी पूरी तरह नहीं करते हैं। पश्चिमी देशों में ऐसी नाही के बाद, कोई जबर्दस्ती नहीं की जाती है। वहाँ बलात्कार के केसेस अत्यंत कम होते हैं। जबकि हमारे यहाँ सहमति बिना जबर्दस्ती, आम बात है। 

इन महोदय ने जबर्दस्ती तो नहीं की है लेकिन बुरा यह किया है कि एक संभ्रात लड़की की एक रात की कीमत लगाई है। 

उदाहरण के लिए - मैं (एक भारतीय) आधा अधूरा पाश्चात्य बनकर, किसी पराई स्त्री से ऐसे तो पेश आना पसंद करता हूँ। मगर यदि मेरी पत्नी या बेटी से कोई ऐसा व्यवहार (प्रस्ताव) करता है तो मैं आग बबूला हो उसका जानी-दुश्मन हो जाता हूँ। अर्थात स्वयं के उपभोग (पर स्त्री गमन) के लिए मैं, पाश्चात्य संस्कृति को मानने वाला हो जाता हूँ। किंतु मेरी अपनी बहन-बेटी को लेकर मैं, अन्य पुरुष से, भारतीय संस्कृति की अपेक्षा करने लगता हूँ। यही दोहरा व्यवहार ही हमारे समाज में कन्या भ्रूण, किशोर वया बहन-बेटी (ऑनर किलिंग) एवं पत्नी की हत्या/शोषण का कारण बन रहा है। 

आशय यह कि हम भारतीय पुरुष समझें कि यदि हम नारी को भारतीय संस्कृति के दायरे में देखना चाहते हैं तो हम भी उसी में रहें और अगर, हम पाश्चात्य में जाना चाहते हैं तो नारी को लेकर संकीर्णता त्यागें, उसे भी पाश्चात्य अपनाने के लिए स्वतंत्र छोड़ें।  (मैंने, एक पल विराम लेकर पूछा) यशस्वी, समझीं तुम? क्या मैं, अब दूसरे का उत्तर दूँ? 

यशस्वी ने कहा - जी सर। 

तब मैंने कहा - वास्तव में यह गलत धारणा, अनेक पुरुषों के दिमाग में बैठी है कि कोई युवा लड़की, आधुनिक वस्त्रों में है तो इसका मतलब, वह स्वच्छंद यौन संबंधों की अभिलाषी है। जबकि बदल रहे परिवेश में नारी की गतिविधियों में भी बदलाव आये हैं। परंपरागत वस्त्र में होना, उनकी निभाई जाती नई भूमिकाओं में, असुविधाजनक होता है। इसलिए नई ड्रेस डिजाइनिंग आज एक जरूरत है। पुरुष आकर्षक दिखना चाहता है, नारी भी दिखना चाहे तो बुरा नहीं है।  

यद्यपि जिन्हें दौलत एवं प्रसिध्दि का लालच अधिक रहा है (जैसे -सिने अभिनेत्रियां), उन्होंने अंग प्रदर्शित करने वाले वस्त्र के चलन बढ़ाये हैं। जबकि ऐसे आधुनिक वस्त्र भी होते हैं, जैसे तुम भी डिज़ाइन कर रही हो, जिसमें परंपरागत वस्त्रों जैसी, गरिमा भी सुनिश्चित होती है। 

यशस्वी ने तब पूछा - क्या कोई लड़की ऐसी होती है जो सी ए के, ऐसे प्रस्ताव को सहमत करती है। 

मैंने कहा - किसी बात को अनुमान से कहना, गलत प्रचार करना होता है। हम जानते हैं, अनुमान गलत भी होते हैं। मैं अनुमान से, हाँ बोलकर हमारी नारी गरिमा को, कोई क्षति पहुँचाना नहीं चाहता। 

मैंने जानबूझकर यह अर्धसत्य तरह की बात की थी। मैं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होने से तथ्य जानता था। लेकिन यशस्वी को अभी, यह बुरी होती, समाज तस्वीर नहीं दिखाना चाहता था। 

यशस्वी ने कहा - सर आप अत्यंत सधे शब्द में बात समझा देते हैं। अभी के लिए एक अंतिम प्रश्न पूछना चाहती हूँ। 

मैंने कहा - हाँ, पूछो। 

यशस्वी ने कहा- सर, मैंने सी ए की फेसबुक प्रोफाइल में देखा है, उनकी पत्नी मेरे से अधिक सुंदर है। ऐसा होते हुए उनमें अवैध लालसा, क्यों होती है ?

मैंने कहा - यशस्वी, सच कहूँ अभी इसका उत्तर मैं नहीं देना चाहता। मेरी बेटी पीएचडी कर रही है उसका शोध इसी विषय पर है। मैं किसी दिन उससे चर्चा करके ही, इसका सटीक उत्तर देना चाहता हूँ। 

यशस्वी ने कहा - कोई बात नहीं, सर। 

मैंने पूछा - सी ए के प्रति तुम्हारा गुस्सा शाँत हुआ ?

यशस्वी ने कहा - सर, आप सुंदरता से हर बात का समाधान रखते हैं। मैं समझ गई हूँ कि कुछ पुरुषों में, हम युवा एवं आधुनिका दिखती लड़कियों को लेकर गलत धारणायें होती हैं। उन पुरुषों में से एक, वह महोदय हैं। 

फिर वह हँसी थी और अगले कॉल तक के लिए विदा कहा था।


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