वो पांच अजनबी व बारिश का दिन
वो पांच अजनबी व बारिश का दिन
"वो बरसात के किस्से और कुल्हड़ चाय के ,
वो नुक्कड़ की दुकाने और कहानी के जायके.!!"
जोर -जोर से बादलों की गर्जना ....!!! मूसलाधार बारिश .... झमझमा झम ...!!
दिन का उजाला भी अंधेरा प्रतीत हो रहा था,बारिश रुकने के आसार नहीं लग रहे थे ..!
ऊपर कॉटेज की टीन की छत पर टप्पर टप्पर आवाज करते..! पानी सड़कों में लबालब इंच दर इंच बढ़ता जा रहा था ..! सुनसान सड़के विराने नुक्कड़ ..! वाहनों की आवाजाही लगभग बंद ही थी ..! कुछ लोग घरों में कैद व कुछ ऑफिसों में ..!!
तभी ...
पांच अजनबी आकृतियां अलग- अलग स्थानों से आती हैं व कॉटेज में घुस जाती हैं ..! एक दूसरे से अपरिचित ..!
उनकी आंखें देखने से लगता था कि,जीवन के व उनके कभी बहुत गहरे ताल्लुकात रहे थे ..! फिर, एक दूसरे को देख मुस्कुराई व सोचा आपस में गपशप कुछ समय गुजार लें... ! आगे बढ़ीं एक दूसरे से हाथ मिलाया.. !
सोचा "यों तो उमर गुजर गई बहुत कुछ देखा जिंदगी से जो अनुभव किया ,उसको साझा करें ..! समय तो काटना ही था ..!"
पहली बोली ," यों तो बारिश का मौसम ही हम सबका प्रिय है तो क्यों ना हम तुम अपनी अपनी -कहानी सुनाएं लगातार !! बीच में ना कोई उठेगा ना बोलेगा ना हिलेगा ..! बस हां में हां मिलाना होगा ..! हम सबका एक दूसरे से लेना देना नहीं है , मकसद है समय बिताना ..!"
बाहर भीनी सी बारिश की महक खिड़कियों से अंदर आने को आतुर थीं ..! वह सभी मग्न , तलाश कर रहीं थीं अनकही कहानियां ..!"
एक बोली :"हम एक दूसरे का नाम नहीं नम्बर से बुलाएंगे : तो सबने अपना -अपना नम्बर चुन लिया था ..! "
नम्बर एक ने शुरुआत की : "मैं जहां रहती थी वहां एक शिक्षक का घर था । वह अपने विद्यार्थियों को मेहनत से पढ़ाता था ! एक बार उसने फेल हुए छात्र को पास कर दिया तब से मन में खटने लगा कि इसने उस छात्र को पास क्यों करा ..! बाद में घर में घी की छौंकी सब्जी, पूढ़ियों ,मिठाईयों की खुशबू आने लगी तो मैं सोच के हैरान कि जिस मास्टर के पास केवल सादी रूखी सूखी हो वह अचानक धनवान कैसे हुए ?? क्या बताऊं बहुत दुखी हुई जब देखा उसी छात्र के माता- पिता घी का कनस्तर मास्टर साहब के घर रख रहे थे .! तब से वहां मन नहीं लगा ..! मैं सूख गई व आज यहां हूं !"
दूसरी शुरू हुई : "अरे !!! यह तीसरा नम्बर मुझे अच्छी तरह पहचानता है क्योंकि ,जब मैं बोलती थी ,तो यह हमेशा जवाब तैयार रखता था ..! दोनों की एक ही कहानी है ; जब वह बाहर निकलती तो वो चुपके से पीछा करता व उसे अपनी खिड़की से निहारता रहता था ,दोनों एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे !
एक बार इसने(लड़के) उस(लड़की )को लिखा," बाहर बरसात ... हम-तुम साथ ,भीगे मन में बरस जाओ धीरे धीरे ...!!" तो जवाब में उसने (लड़की ) ने लिखा ," इधर भी बारिश की झड़ी ,आंखों में भी है .. थोड़ी थोड़ी ..!"एक दूजे में दोनों खोये रहते थे ..! एक दिन हम दोनों साथ हो लिए ..! बारिश बहुत तेज थी ! हम दोनों साथ थे ,...तभी जोरदार धमाका हुआ ..! एक एक्सीडेंट में वे (लड़का -लड़की) दोनों ही दुनिया से जा चुके थे । अफसोस !! हम दोनों भी बिछुड़ चुके थे.. इसके बिना मैं सूख चुकी थी ...आज देखकर पहचान लिया कि यह तो वही है जिसको मैं ढूंढ रही थी बहुत समय से , मुझे खुशी हुई ..!"
तीसरा बोला : यही कहानी मेरी है ..जो दूसरी की है ..! मैं अब क्या सुनाऊं ..!??
चौथा बोला ; मैं तो बहुत मोटे मोटे नोटों के बीच सोता था ..! एक बहुत बड़े जज के यहां रहा ! उसकी बड़ी बड़ी कोठी नौकर चाकर .! ऐश थे बहुत ..! ईमानदारी की कीमत भी मिली और बेमानी की भी ! ईमानदारी की वजह से प्रमोशन और बेमानी के फैसलों में तो पैसा बिन तोले आता था .! एक बार किसी बेकसूर को सजा मिली मौत की और मैं वहीं ढेर हो गई ..। बहुत दुख था ..!" सभी उसे घूर रहे थे ..!
अंत में : पांचवा : मैं फौजी के साथ रही हमेशा ..! वह जब भी बर्फ की चोटियों में सीमा की पहरेदारी करता मेरा भी मस्तक ऊंचा उठ जाता था ,देश के लिए हमेशा तत्पर रहता ! मां -पिता , पत्नी , बच्चों को लिखता !
"मैं जल्द आऊंगा ! " लेकिन एक दिन दुश्मन की गोली उसके सीने पर लगी ,मैं भी वहीं उसकी जेब में थी ..हम दोनों ढेर हो गए..! मैं भी वहीं शहीद हुई ..!"
सभी अपना अपना किस्सा सुनाकर खुश थीं ..! बारिश बंद हो चुकी थी वे आकृतियां कॉटेज से अदृश्य हो चुकी थीं..!! वह पांच कलमें.... फिर किसी ने नहीं देखी कभी भी ..!
