STORYMIRROR

S N Sharma

Abstract Tragedy Classics

4  

S N Sharma

Abstract Tragedy Classics

वेश्या

वेश्या

5 mins
23

कोरोना में उसके मम्मी पापा गुजर चुके थे। इसका एक छोटा भाई था, जो कक्षा 5 का विद्यार्थी था और उसको संभालने के लिए सिर्फ वही थी। उम्र 17 वर्ष कक्षा 11 की विद्यार्थी। जब तक मां-बाप थे, शोभना और सुमित किसी राजकुमार से कम नहीं थे। पर मां-बाप के गुजरते ही मध्यम वर्गीय परिवार के यह दोनों बच्चे अनाथ हो गए। दूर के जो एक दो रिश्तेदार थे उन्होंने भी मौका देखकर घर पर हाथ साफ कर दिया और दोनों बच्चों को दयनीय जीवन जीने के लिए विवश कर दिया।

दोनों बच्चे शहर के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ते थे। मुख्यमंत्री जी की ऐसे अनाथ बच्चों के लिए चल रही योजना के अनुसार इन दोनों बच्चों की फीस की व्यवस्था तो किसी प्रकार हो गई, पर इस योजना से मिलने वाले मात्र ₹2000 में इन दोनों बच्चों का गुजारा बहुत मुश्किल हो गया। उनके पापा के पास उनका स्वयं का फ्लैट था इस कारण इतने से पैसे मैं भी उनकी जिंदगी की गाड़ी चल निकली पर पैसे की फिर भी जरूरत थी इस कारण शोभा प्राइमरी कक्षाओं के बच्चों की घर-घर जाकर ट्यूशन लेने लगी।

शोभना देखने में सामान्य से थोड़ी सुंदर ही थी काली घनी लंबी चोटी जो कमर तक आती है बड़ी-बड़ी आंखें गोरा रंग पतले कसे हुए होंठ और गालों पर बनते हुए डिंपल तथा मध्य का काठी की इकहरे बदन की लड़की थी।

और वैसे भी इस उम्र में तो हर लड़की सुंदर ही लगती है। बिना मां-बाप की बच्ची को घूरने वाले और आशिक मिजाज लोगों के लिए शोभना एक मनोरंजन की वस्तु बन कर रह गई।

शोभना एक दृढ़ संकल्प बाली लड़की थी। वह अपनी मां के द्वारा सिखाई गई यह बात अच्छी तरह जानती थी कि यदि एक बार वह कलंक की इस दलदल में फस गई तो फिर इससे उसका निकलना बहुत ही मुश्किल होगा।

गली मोहल्ले में, और जहां-जहां वह ट्यूशन पढ़ने जाती थी ,उनमें से कुछ घरों में उसे घर के मनचले लोग मौका मिलने पर उसे यहां- वहां छूने का प्रयास करते। उसे द्विअर्थी कमेंट करते। माता-पिता के गुजर जाने के बाद समय के पहले ही परिपक्व हो चुकी शोभना इस बात को अच्छी तरह समझ चुकी थी कि उसे इन बाधाओं को पार करके किस तरह जीना है। इसी कारण वह इन चीजों की खास परवाह नहीं करती थी।

एक दिन जब वह एक प्राइमरी के बच्चे अमन के घर ट्यूशन पढ़ा रही थी। उस रोज अमन की मम्मी घर पर नहीं थी। तभी उसे अमन के पापा ने उसके पास से निकलते हुए उसके वक्ष स्थल को अपने हाथों में कसकर पकड़ लिया। इस अचानक हमले से शोभना पहले तो एक पल के लिए असहज सी हो गई। उसे एक पल के लिए लगा की अब उसका सतीत्व लुटने को ही है। वह एकदम असहाय सी हो गई ,पर अगले ही पर उसने हिम्मत जुटा कर एक थप्पड़ कस कर अमन के पिता के मुंह पर मारा और बोली "आप अपने आप को समझते क्या हो? मैं अभी पुलिस में जाकर आपकी शिकायत करती हूं। "

अमन के पिता यह अच्छी तरह जानते थे की किसी , नाबालिग लड़की की छेड़खानी के केस में poxo के कारण जमानत भी नहीं होती है। सीधे जेल जाना पड़ता है। मौके की नजाकत को देखते हुए वह तुरंत ही घिघियाने लगे

"मुझे माफ कर दीजिए !!!!मैडम मैं!!! मैं!!!! मेरा पैर फिसल गया था !और इसी कारण मेरा हाथ आपके शरीर को छू गया !!!!मैं !!!!जानबूझकर ऐसा नहीं करता। "

शोभना ने उससे कहा

" आगे से आप ठीक से ध्यान रखिएगा!!!! यदि इस तरह की गलती दोबारा हुई तो,,,,,!!!!!"।

बात यही रफा दफा हो गई।

अमन के पापा उस दिन के बाद कभी उसके सामने ही नहीं आए।

इसी तरह एक बार सड़क पर एक आवारा लड़के ने उस पर भद्दे कमेंट किए। शोभना पहले तो बहुत डर गई, पर उसने हिम्मत जुटा कर उस लड़के की अपनी चप्पल से पिटाई कर दी। शोर गुल सुनकर दूसरे लोग भी उसकी मदद को आ गए और मजनू की ढंग से पिटाई हो गई।

 इस घटनाक्रम से लोग यद्यपि शोभना से डरने तो लगे थे, पर क्योंकि वह घर घर जाकर ट्यूशन पढ़ाती थी और अपनी आवश्यकता का सब सामान खरीदने के लिए उसे स्वयं ही जाना पड़ता था। इस कारण ऐसे लोग जो उसे पा नहीं सके थे ,उन्होंने उसके बारे में मिथ्या प्रचार करना शुरू कर दिया की यह तो वेश्या है अपने शरीर को बेचकर ही यह पैसे कमाती है। लोगों को अपने जाल में फंसा लेती है।

और कहते हैं "बद अच्छा बदनाम बुरा,"

धीरे-धीरे लोगों के मन में यही भावना बन गई कि वह बदचलन वेश्या है।

इस तरह की कई घटनाओं ने उसे मुंह फट और चिड़चिड़ा बना दिया अब वह लोगों को बहुत गंदी गालियां सुना देती थी।

शोभना को छेड़ने वालों की भी और कमेंट करने वालों की भी कमी नहीं थी और जो भी उस को छेड़ता शोभना उसे गंदी गंदी गालियां देती।

"हरामियों!!! क्योंकि मैं तुम्हारे सामने बिछ नहीं जाती!! इसलिए मैं वेश्या हूं !!!यदि मैं तुम्हारे साथ संबंध बनाने लगती तो शायद तुम कभी यह कहते भी नहीं कि मैं बाजारु औरत हूं।"

जो भी हो ,इसी तरह वह लगातार मेहनत करती रही! और 4 साल में उसने ग्रेजुएट भी कर लिया और अपने भाई को भी पढ़ा लिया।

ग्रेजुएशन के बाद उसने बी.Ed कर लिया और बच्चों को ढंग से पढ़ाना तो उसको बहुत अच्छा पहले से ही आता था। इसी काबिलियत के कारण उसकी एक स्कूल में नौकरी लग गई और अब उसकी जिंदगी की गाड़ी चल निकली।


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract