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Sajida Akram

Romance

3  

Sajida Akram

Romance

वेलेन्टाइन डे

वेलेन्टाइन डे

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सुमन सुबह उठते ही सारे काम से निपट कर पति का इंतज़ार कर रही थी, बाहर बरामदे में ही बैठ कर समाचारपत्र देखने लगी पर ये क्या # वेलेन्टाइन डे से भरा पड़ा था। 

थोड़े पशोपेश में थी, मुई ये होता क्या है । 

सुमन पति देव का इंतज़ार करने लगी बरामदे में टहल-टहल कर बड़बड़ाते हुए "पतिदेव"ने दूर से ही देख लिया आज हमारी खैर नहीं टहल कर आने में देर जो हो गई। श्रीमति जी ज़रूर गुस्से में है। घर के मेनगेट को खोल कर अंदर आते हुए पूछते हैं! क्या हुआ पप्पू की अम्माँ इतना परेसान क्यों हो, 

अरे कुछ नहीं आप के लिए चाय का पानी चढ़ा दूं नाश्ता ले आती हूँ, सुरेन्द्र सिंह थोड़े मुस्कुरा कर हाथ पकड़ के कहतें अरे रुको तो, मैं कुछ लाया हूँ ,घूमने गया था तो सोचा आज हमारी श्रीमति जी को पोहा और गरमा-गरम जलेबी खिलाते हैं, और ये रुमाल में तुम्हारे लिए थोडे़ से# हरसिंगार के फूल है। 

# हरसिंगार के फूल तुम्हें पसंद हे नतो कुछ फूल चुन लाया सोचा इसकी ख़ुशबू से तुम्हारी सुबह ख़ुशगवार हो जाएगी। 

तुम नई-नई आई थी तब एक बार मै ले आया था मगर ! घर के बड़े-बुर्ज़ुगों की लिहाज़ के कारण नहीं दे पाया फिर हम अपने घर -संसार में ऐसे उलझे की कभी तुम्हारे लिए कोई तोहफा तो दूर कुछ समय ही नहीं दे पाया। 

 हम दोनों पति -पत्नी पुरानी यादों में खो गए। पप्पू के बाऊजी याद है जब आप आफिस जाते थे, तो ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ लगाते थे "मै आफिस जा रहा हूँ"। 

   आपकी बहन "रति" छेडती थी क्या भय्या पूरे मोहल्ले को सुनाना है या भाभी को सुना रहे हो मैं शर्म से लाल हो जाती थी। 

 पप्पू के बाऊजी कभी आफिस से आने पर बार-बार रसोई में झांकना तो आपकी अम्माँ जी कहती थी क्यों रे छोरे शर्म लिहाज़ तो छोड़ ही दिया आज के जमाने के बच्चों ने , जैसे आपकी अम्माँ की रसोई में भी आंखें हो,आपबहाने- बहाने से रसोई में घूसने की कोसिस करतें थे, हमारी एक झलक पा जाने के लिए, सच बताएं पप्पू के बाऊजी हम भी थोड़ा सा घुंघट की ओंट से एकाध बार देख लेते थे तो सारा दिन पूरे सरीर में सनसनी सी दौड़ी रहती थी बस जे इंतज़ार रहता था कब दिनहु डूबे कब रात आए।

और ये दिन मुआ खतम ही होने का नाम नहीं लेता था। 

अरे हां जलेबी ठंडी हो जाएगी अपनी पुरानी यादें तो बहुत सारी है जाओ एक प्लेट में रख लाओ मिल कर खातें है। 

अरे हां मैं तो भूल ही गई, आपसे ये पूछना था आज के समाचारपत्र में # वेलेन्टाइन डे क्या होये है सुरेन्द्र सिंह हंस दिए। 

  सुमन तुम ये समझो ये# वेलेन्टाइन डे कुछ नहीं होता है हमारी जीवन यात्रा में तुमने "चौका-चुल्हा सभांला है, ये आज के बच्चे पूरे साल में एक दिन खूब शोर मचा कर "वेलेन्टाइन डे" मनाते हैं, बाकी साल " किचकिच करते रहतें हैं।

हमारा प्रेम तो बारहमासी है " सुमन और सुरेन्द्र सिंह मन्द-मन्द मुस्कुराते हैं।


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