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Vijaykant Verma

Abstract

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Vijaykant Verma

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उड़न छू

उड़न छू

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"हाय मैं मर जावां", एक लड़की ने मुझे अकेला देख बहुत प्यार से जब मेरे से ये कहा, तो मेरा दिल बाग-बाग हो गया..!

मैंने उसकी नज़रों में नज़रें मिला कर कहा-"आज पहली बार किसी लड़की ने इतने प्यार से मेरे से ये बात कही है..!"

तब उस लड़की ने मुझ से कहा-"पर मैं ये बात बिल्कुल सच्ची कह रही हूं जी..! क्योंकि तेरी शक्ल मेरे खूसट मरद से लाख दर्जे अच्छी है..! और तू खूबसूरत भी बहुत है और स्मार्ट भी है।"

इसलिए इसके पहले, कि मेरा खूसट मरद इधर आये, चल फटाफट मेरे करीब आजा, क्योंकि इस समय मैं भी यहां अकेली हूँ और तू भी यहां अकेला है, और मौसम भी बहुत मस्त है।

तब मैंने उससे कहा-"सो स्वीट मॉय डियर..! फिर आजा मेरी बाहों में इधर..!"

और फिर मैंने अपनी बाहें फैला दी..! और वो खुश होकर मेरे करीब आ गई गई और मेरी बाहों में आकर बोली- "ले मैं आ गई तेरे पास..! अब तू कर ले अपनी आंखें बंद..! और बुझा ले मेरे जिस्म से अपने दिल की प्यास..!"

"लेकिन तू पी या न पी, पर मेरे को पहले पिला दे और मेरी जवानी में आग लगा दे, फिर अपने प्यार की बारिश मुझ पर कर दे..!"

तब मैंने बहुत प्यार से उसे मदिरा पिलाई..! फिर मैंने भी मदिरा पी..!  और जब मैं उसकी बाहों में हो गया मदहोश..! तब मेरे आंख बंद करते ही मेरा पर्स, मेरी घड़ी और मेरी सोने की अंगूठी को लेकर वो हो गई हमेशा के लिए उड़न छू..!


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