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Mahima Bhatnagar

Abstract

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Mahima Bhatnagar

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थोथा नारा

थोथा नारा

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"हे भगवान, जरा सी बारिश,और पूरी लेन डूब गयीं।" पहली बोली।

"सही कहती हैं रेनू दी, किसी को कुछ परवाह ही नहीं है।" दूसरी ने चिन्ता जताई।

"थक गयी रेनू दी समझा समझा कर, कल ही कितना समझाया, सफाई रखो, पोलिथीन इस्तेमाल ना करो, अब भुगतो सब।" पहली ने गहरी सांस ली।

"लेकिन ऐसे कैसे हो सकता है, पिछली लेन मे तो पानी नहीं चढ़ा। यहाँ ही क्यूँ जल भराव की नौबत आयी।" दूसरी परेशान थी।

"लो, ये आया राजू, क्यों भाई, कोई काम ढ़ंग से नहीं करते, नाली की सफाई क्यों नहीं की तुमने, घर मे पानी घुसा जा रहा है।" दोनो सफाई कर्मी पर बरस पड़ी।

"अरे मैडम, अभी तो साफ करी थी, वो क्या है ना कल रेनू मैडमजी के यहां मीटिंग थी। बडे बडे बैनर लगे थे, काफी लोग आये थे। हवा से उड़ कर वहीं बैनर नाली मे चला गया होगा जिससे नाली बन्द हो गयी थी, अभी वो ही हटा कर आया हूँ, काफी सारे चिप्स रैपर और पानी के ग्लास भी फंसे थे, बस अब आप परेशान ना हो, अभी पानी उतर जायेगा !


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