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अपर्णा गुप्ता

Romance

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अपर्णा गुप्ता

Romance

सोलमेट के तहत "स्वेटर"

सोलमेट के तहत "स्वेटर"

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शायद कोई ही ऐसी माँ होगी जिसने कभी स्वेटर न बुना हो, जाने कितने अफ़साने बुन देती है माँ अपने एक दो लहराते बालों के साथ ढेरों सपने अपने होने वाले बच्चे के लिये..l


भीनी भीनी गुलाबी ठंड शुरु होते होते कुनकुनी धूप में बैठकर गप्प लड़ाना और मूंगफली चाबना आज भी जब याद आता है तो वो ननिहाल का प्यार हिलोरे मारने लगता है। नानी का सुनहरा बाल कभी स्वेटर में बिन जाता तो मैं कहता "नानी तुम्हारा सफेद बाल है इसमें मैं नहीं पहनूंगा इसेl"

माँ ने ननिहाल में ही कुछ दिनो को छोड़ दिया था पढ़ाई की ख़ातिर। ननिहाल में शुभा पड़ोस में ही रहती थी अक्सर मामी के पास आया करती थी

नानी और माँ के हाथ के बुने गुनगुने स्वेटर आज भी तपिश देते है यादों में ही ...

फिर एक दिन शुभा ने चुपके से सीढ़ियों पर गुलाबी हाफ स्वेटर पकड़ा कर कहा "तुम्हारे लिये बुना है सबसे छुपकर" उस दिन पता चला कि वो मुझे प्यार करती थी।

पर शुभा मेरी किस्मत में नहीं थी। मैं उसे स्वेटर पहनकर दिखा भी नहीं पाया था कि बाबु जी की तबियत खराब होने की वजह से मुझे अपनी ननिहाल से घर आना पड़ा और फिर गया तो उसका विवाह हो चुका था।

फिर मेरी शादी भी गर्मियों में हो गई थी। विभा बहुत अच्छी लड़की थी उसने बहुत जल्दी मुझे अपने दिल के आईने में सजा लिया था। सर्द मौसम अपनी पूरे शबाब पर था। मैं नहा धोकर बसन्ती धूप सेंक रहा था कि पीछे से आकर विभा ने पीला स्वेटर मुझे पहना दिया उसमें कुछ उसके बाल भी बुन गये थे और मुझे उसमें बुना हुआ उसका प्यार गर्माहट दे रहा था, मैने उसका हाथ थाम कर बांहों में कसते हुये कह दिया "तुम औरतें भी ना मर्द को बच्चा ही समझती रहती हो ताउम्र और ये तुम्हारा बुना गया प्यार हमें बड़ा नहीं होने देता" कह कर मैने उसका हाथ चूम लिया था।



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