मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी

Romance


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मुज़फ्फर इक़बाल सिद्दीकी

Romance


शताब्दी एक्सप्रेस

शताब्दी एक्सप्रेस

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ट्रिंग ट्रिंग ... ... ... कृप्या ध्यान दें ,न्यू देहली से भोपाल को ओर रवाना होने वाली शताब्दी एक्सप्रेस, ट्रैन न012002, प्लेटफार्म न 0 -1 पर आ गई है।  

नहीं, रहने दो रवि, मैं रख लूँगी अपना सामान। मुझे अकेले सफर करना आता है।

सॉरी, यार नेहा। 

नहीं सॉरी-वोरी कुछ नहीं। करनी ही है, तो अपनी मम्मी से करो। मैं तो अभी जा रही हूँ। ज़्यादा टेंशन लेने की ज़रूरत नहीं है। जब मेरा दिल करेगा, आ जाऊँगी। और हाँ, बार-बार फ़ोन करके हमदर्दियां जताने की ज़रूरत भी नहीं है। मुझे सुकून से कुछ दिन अकेले रहने दो। 

रवि, नेहा का सामान सेट कर के उतर गया। और प्लेटफार्म के पिलर से टिक कर खड़ा हो गया। मुसाफिर भी ट्रेन पर चढ़ने-उतरने लगे। ट्रेन ने एक व्हिसिल मारी और आगे बढ़ गई। नेहा ने गुस्से में न उसकी तरफ देखा, न बाय की। ट्रेन का आखिरी डिब्बा निकलने के बाद भी जब तक वह नज़रों से ओझल नहीं हो, गई देखता रहा। 

नेहा भी बहुत ज़िद्दी है। क्या करें मम्मी भी तो बात समझती नहीं। अपने आप बड़बड़ाता हुआ पलटा और स्टेशन से बाहर निकल गया।

नेहा के कोच के अन्दर सभी सवारियाँ सेट गईं थीं। विंडो के बाजू वाली सीट पर मनोज था। 

नेहा का मूड अभी तक ठीक नहीं था। जब उसने कहा -"ज़िन्दगी तमाशा बन कर रह गई है।"  तब मनोज ने उसकी तरफ देखा। लेकिन देख कर नज़र हटा दी। तब वह अपनी झेंप मिटाने के लिए। मनोज से बात करने लगी। 

 तुम कहाँ जा रहे हो?

भोपाल। 

और दीदी आप? जब मनोज ने दीदी कहा तो नेहा भी थोड़ा खुल गई। उसे अपनापन सा लगा। 

मैं भोपाल से ही हूँ। मायका है मेरा भोपाल का। अरेरा कॉलोनी में। 

तुम कैसे?

मैं एमपी नगर जाऊँगा। ऑफिसियल टूर पर हूँ। मार्केटिंग का काम है। 

तुम्हारी शादी हो गई? 

नहीं। अभी नहीं। मनोज वैसे भी नेहा से उम्र छोटा था। 

करना भी मत। ये ज़िन्दगी है न, तमाशा बन कर रह जाती है। कब इसकी सुनो, कब उसकी, समझ ही नहीं आता। कभी इससे अंडर-स्टेंडिंग बनाओ कभी उससे। सारी ज़िन्दगी यूँ समझौते करते रहेंगे क्या? तो फिर जियेंगे कब? जब बेटे, मम्मियों के प्यारे हैं। तो रखे रहें अपने कलेजे से लगा कर। फिर उनके शादी ब्याह क्यों करती हैं? ये रवि भी न, बिल्कुल मामास बॉय ही है। पता नहीं कब बड़ा होगा। इसको तो शादी करनी ही नहीं थी। पहले तो चाँद-तारे तोड़ने की बात करते हैं, बाद में चकर-घिन्नी बना कर रख देते हैं। अकेले ही लड़ते रहो ज़िन्दगी से। मैं तो जा रही हूँ। शान से रहूँगी। अपना कैरियर बनाऊँगी।

"चाय-कॉफी, चाय-कॉफी"जब चाय वाला आया तो मनोज ने बात बदलते हुए कहा। 

दीदी चाय लेंगे कि कॉफी?

कॉफी, 

तुम भी लो न। 

 हाँ भैया, दो कॉफी देना। 

अरे तो फिर, कोई गर्ल फ्रेंड तो होगी?

वह कहाँ है ?

दिल्ली में ही है। मेरे साथ ही है। आई मीन हम लोग लिव-इन में रहते हैं। मनोज ने बड़ी सहजता से कहा। 

अरे तुम तो बड़े छुपे-रुस्तम निकले। लो जी, ये भी अच्छा है। अब शादी-ब्याह, ससराल-मायके का झनझट ही ख़त्म।   

तो शादी करोगे की ऐसे ही ... ?

करेंगे न दीदी। 

अब साथ में रहते रहते शादी करने की क्या ज़रूरत है? तुम्हारे घर वालों को पता है?

हाँ, मम्मी को पता है। मम्मी पिछली बार आई थीं तो आयुश्री से मिलकर गईं थीं। 

अरे क्या नाम बताया? आयुश्री कितना सुन्दर नाम है। सुन्दर भी होगी। बहुत प्यार करते होंगे न। एक दूसरे से। तभी तो साथ रहते होंगे। 

नहीं दीदी, अभी तो हम अच्छे दोस्त हैं। आयुश्री पीजी में रहते-रहते उकता गई थी। वही बन्दिशें। वही रोज़ का रटा-रटाया खाने का मीनू, तो कुछ चेंज चाहती थी। हम दोनों दोस्त थे तो सोचा मिलकर रह लेते हैं। 

अच्छा, चलो ये भी अच्छा है। एक ही कंपनी में हो क्या? 

नहीं उसका एचआर है। वह दूसरी कंपनी में है। 

अच्छा तो साथ रहते हो, तो लड़ाईझगड़े भी होते होंगे। जब दो बर्तन साथ होते हैं तो टकराते ही हैं।

हाँ, लेकिन उतना नहीं। एक अंडर-स्टैंडिंग सी है। वह खुले विचारों वाली लड़की है। अपने हिसाब से जीती है। मैं थोड़ा बेफिक्र सा हूँ तो मैं भी अपने हिसाब से रहता हूँ। हमारे इगोज़ कम ही टकराते हैं। मैं भी उसकी पर्सनल लाइफ में दखल नहीं देता। वह भी बहुत ज़्यादा नहीं सोचती। हम लोग दो साल से साथ में हैं। अभी तक तो कोई विवाद की स्थिति निर्मित नहीं हुई। वह तो दीदी अपने से है। कुछ बुराइयाँ मेरे में हैं, तो कुछ उसमें। 

तो फिर शादी उस से करोगे?

अभी तक तो उसने ऐसा कुछ बोला नहीं। जब बोलेगी तब सोचेंगे। वैसी अच्छी सलीके की लड़की है। जॉब करने के साथ-साथ, अब तो घर के कामों पर भी ध्यान देती है। अभी जब मम्मी आईं थीं तो उनकी बहुत सेवा की। बहुत खुश हो कर गईं हैं। 

अब तक भोपाल भी चुका था। तभी फ़ोन की घंटी बजी। देखा तो रवि का था। 

हाँ रवि, बस भोपाल आ गया है। स्टेशन पहुँच कर ओला बुक लूँगी। और हाँ, तुम चिंता मत करना। अरे सुनो, परसों शताब्दी से ही मेरी वापसी की टिकिट बुक कर देना।

ओके, बाय। टेक केयर ऑफ़ योर सेल्फ। लव यू।  


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