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Kunda Shamkuwar

Abstract Others

4.7  

Kunda Shamkuwar

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सब चंगा सी

सब चंगा सी

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मिस्टर और मिसेज शर्मा का घर परिवार, सोशल सर्कल सब कुछ सही चल रहा था… मिसेज शर्मा एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर थी… अच्छा पैकेज… वीक में तीन दिन वर्क फ्रॉम होम… मिस्टर शर्मा एक गवर्नमेंट ऑफिस में सीनियर पोजीशन में काम करते थे। जाहिर हैं की पैसा भी था और रुतबा भी। 

अच्छी हाउसिंग सोसाइटी में उनका अपना 3 बेड रूम वाला फ्लैट था। घर भी सजा सँवरा था। सब कुछ एकदम परफेक्ट!!! दुनिया के लिए एकदम चमकदार…

हर कोई मिस्टर और  मिसेज शर्मा के घर की बात करता था। उनकी अंडरस्टैंडिंग, केयर और सॉफ्ट बिहेवियर की बात करते थकता नहीं था। 


मिसेज शर्मा सोशल भी बहुत थी। सोसाइटी में आला दर्जे के लोगों के घरों में आना जाना था। कितने ही ह्वाट्सऐप ग्रुप में वह मेम्बर थी। उनकी अपनी एक किटी भी हुआ करती थी, जिसमे महिलाएँ हर महीने मिला करती थी। इस महीने की किटी मिसेज शर्मा के नाम थी जिसको उन्होंने अपने घर में ही ऑर्गेनाइज करने का प्लान किया था। आज की किटी के लिए कल से ही तैयारियाँ शुरू हो चुकी थी। मेड से घर की सफ़ाई करवाने के बाद नए कार्पेट्स बिछवाए गये। कुछ ख़ूबसूरत इनडोर प्लांट्स भी महँगे और ख़ूबसूरत गमलों में रखवाये गये। मिसेज शर्मा की दिली ख़्वाहिश थी की उनके घर का इंप्रेशन अच्छा पड़ना चाहिए था। मिस्टर और मिसेज़ शर्मा ने खाने पीने की सारी चीज़ों का ज़ोमैटो से ऑर्डर करने का प्लान किया था। अमूमन सारी तैयारी हो चुकी थी।इंडियन सोसाइटी में बाहर के सारे काम पुरुष करते हैं और घर के सारे काम अमूमन स्त्रियाँ करती हैं। आप इसे यूँ समझ सकते हैं की घर के छोटे छोटे डिसिजन्स स्त्रियाँ लेती हैं और सभी बड़े डिसिजन्स पुरुष लेते हैं। यही तो अपना पैट्रियार्की सिस्टम हैं जिसमें पुरुष घर का सरबरा होता हैं। 

मिसेज शर्मा के यहाँ भी कुछ ऐसा ही था।मिसेज शर्मा थी तो अच्छी इंजीनियर लेकिन ऑफिस में। उनका सारा नॉलेज ऑफिस में ही यूज़ होता था । घर आकर किचन और घर को मैनेज करना होता था। क्योंकि एक दो बार उन्होंने कोशिश कर के देख लिया था लेकिन मिस्टर शर्मा ने उनकी कोई बात सुनी ही नहीं बल्कि यह हिदायत भी दे दी की आप इसमें दख़ल मत दो, जाकर अपना काम करो। उनको तब वंडर होता था की यह सलाह तो जब वह अपने ऑफिस में देती थी तो लोग उनकी सलाह से इत्तेफ़ाक भी रखते थे… उनकी सलाह को ऐज़ एडवाइज़ मानते थे जिससे काम बेहद स्मूथली होता था। 

लेकिन घर में??? 

घर में यही बात एकदम अलग मोड़ लेती थी। मिस्टर शर्मा हर बार उनको यही बोलते थे की आप मेरे काम में दख़ल मत दो। यू डोंट हैव प्रैक्टिकल नॉलेज…ब्ला ब्ला ब्ला…

मिसेज शर्मा पैट्रियार्की सिस्टम की इस साइकोलॉजी को अच्छी तरह से जान चुकी थी। पैट्रियार्की सिस्टम या यूँ कहे इंडियन कांटेक्स्ट में कहना सही होगा की वह मेल ईगो को जान चुकी थी और उसके रिपर्कर्शन को भी…मिस्टर शर्मा का अपना वर्किंग स्टाइल था। ही इज वैरी फोकस्ड पर्सन…अपनी जिद मनवानें में माहिर…

कई बार मिसेज शर्मा को कोफ़्त होती थी। कई बार उनका मिस्टर शर्मा से उलझने का मन होता था। लेकिन घर की शांति का क्या?

मिसेज शर्मा घर की शांति के लिए ख़ामोशी अख़्तियार कर लेती थी। ऑफिस को मैनेज करने के साथ घर के काम और सोशल सर्कल को वह मैनेज करती रहती। 

हर तरफ़ मिस्टर और मिसेज शर्मा के अंडरस्टैंडिंग की चर्चा होने लगी थी।

सब को सब कुछ चंगा दिखता था…

क्या वाक़ई सब कुछ चंगा था?

शायद हाँ…शायद नहीं…


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