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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : others

'भोला के लिये गुरूजी उसके भगवान थे और उनकी हर आज्ञा पत्थर की लकीर थी | वह एक read more

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'लेकिन घर की आर्थिक स्थिति को समझते हुए उन्हें अपने फैसले बदलने पड़े | उन दिनों read more

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बचपन में बच्चों में अच्छी आदतें डालने के लिए माँ बाप को नये नये तरीके सोचने पड़ते हैं read more

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सर, मुझे दिल्ली में ही रहना है। मैं एक सप्ताह में ज्वाइन करने के लिए तैयार हूँ। और read more

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'अपाहिज बनी हुई एक महिला अपनी तकलीफ के लिये परिवार के ऑर लोगो को परेशान नहीं करना read more

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डाक्टर साहिबा ने अस्थाई उपचार के लिए थोड़ी सी दवाइयाँ दे दी, लेकिन स्थायी उपचार के read more

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'क्या तुम्हें मालूम है कि जहाज कैसे चलता है ? हमने कहा, जहाज के पीछे एक पंखा होता read more

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बच्चों के बचपन की read more

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मन का पंछी पंख फैलाकर, उड़कर जाता है उस गांव, जहाँ बसी हुई मेरी यादे, आज read more

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एक झन्नाटेदार तमाचा गूंज उठा और मीना गश खाकर गिर पड़ी।और जब होश आया तो मन आजादी के read more

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पढ़ाई हमारे जीवन में क्या महत्व रखती है, इस कहानी में यही बताया गया read more

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मुखौटा
© Ira Johri

Inspirational Others

यदि समाज सेवा करना चाहती है तो अपनी ही प्रजाति को जन्म से पूर्व ही मारने के अपराध के read more

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कहानी खत्म कर मैंने पति को धन्यवाद दिया। वो तो समझ नहीं पाए ऐसा क्या हुआ। वो आश्चर्य read more

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बाबा आप लोगों की चिंता हमें भी कुछ कम नहीं है।आपकी इज्जत, हमारी read more

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समय बहुत बदला और इंटरनेट ने हमारे जीवन में गहरी पैठ बनायीं।स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल read more

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आधी रात के करीब जब सभी गहरी नींद में सो रहे थे तभी कौटिल्य ने शिष्य को उठाया और read more

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पत्नी काे कठपुतली समझकर ना नचाओ... उसके भी सपने हाेते है-छाेटे छाेटे ही सही, जिसे वह read more

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लड़का है तो क्या हुआ, है तो हाड़ माँस का शरीर ही, जिसमें एक नाज़ुक, कोमल हृदय भी है। read more

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वह ठेला नहीं था, उस ठेले के हर मर्तबान में, हर शीशी में, हर थैली में, उनके घर का read more

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" तस्वीर बढ़िया बनी है पर आपने इस तस्वीर में मेरे बाल ज्यादा बना दिये हैं जबकि मेरे read more

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"नहीं मांजी, डरपोक नहीं बनेगा ये रोने से बल्कि इसे समझ आएगा कि दर्द होता है तभी कोई read more

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“पापा चलिए ऑटो आ गया”, बेटे ने उन्हें सहारा देकर खड़ा किया उनकी चप्पलें सीधी की और read more

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दाल चावल को छोड़कर बाकी सभी भोजन मुझे पसंद आते हैं। वह साउथ इंडियन हों, मुगलाई हों, read more

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यह कहानी मेरे छात्र जीवन में घटित एक सत्य घटना पर आधारित संस्मरण है। यह कहानी मेरी read more

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परिस्थिती के आगे इंसान का क्या चलता है...? कुछ भी तो नहीं...!!! असहाय सा रहता है read more

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उन दिनों, यानि आज से करीब ६० साल पहले, गणेश चतुर्थी के पर्व को, लोक भाषा में, लोग read more

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जीवन में एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसमें हम एक दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण को read more

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संस्कृत के शब्द श्रावण से बना सावन, बारिश की बूंदों को समाए ....हरियाली की चादर ओढ़े read more

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लेखक : धीराविट पी. नात्थागार्न ; अनुवाद : आ. चारुमति read more

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"मेरी छोड़ तु अपनी जीवनसाथी की तस्वीर तो दिखा!” उसने तस्वीर दिखाई! जिसे देख मेरी read more

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