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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : others

खैर कुछ दिनों बाद वो दिन भी आया जब हमें प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखना थे। जैसे कि read more

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एक एस्किमो कहानी अनुवाद : आ. चारुमति read more

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जगदीश
© Pranali Kadam

Children Stories Others

हळूहळू मग गावातली लोकं पण जमा झाली होती. त्यांना झालेली घटना समजते. गावातली लोक सगळे read more

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"नहीं मांजी, डरपोक नहीं बनेगा ये रोने से बल्कि इसे समझ आएगा कि दर्द होता है तभी कोई read more

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बचपना
© Vinay Panda

Children Stories Others

हाथ-पैर मार रहे थे पानी में खूब मगर आगे और ना पीछे जा पा रहे read more

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जैसे हम यदि मेहनत से पढ़ें तो अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो सकते read more

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'लेकिन घर की आर्थिक स्थिति को समझते हुए उन्हें अपने फैसले बदलने पड़े | उन दिनों read more

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बचपन में बच्चों में अच्छी आदतें डालने के लिए माँ बाप को नये नये तरीके सोचने पड़ते हैं read more

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'अपाहिज बनी हुई एक महिला अपनी तकलीफ के लिये परिवार के ऑर लोगो को परेशान नहीं करना read more

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डाक्टर साहिबा ने अस्थाई उपचार के लिए थोड़ी सी दवाइयाँ दे दी, लेकिन स्थायी उपचार के read more

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बच्चों के बचपन की read more

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यह कहानी मेरे छात्र जीवन में घटित एक सत्य घटना पर आधारित संस्मरण है। यह कहानी मेरी read more

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बाबा आप लोगों की चिंता हमें भी कुछ कम नहीं है।आपकी इज्जत, हमारी read more

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लाड़की
© Noorussaba Shayan

Crime Inspirational +1

'जिसे अपने कपड़ों , किताबों का ध्यान नहीं होता था वो अब मेरी दवाइयों और चाय का read more

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स्कूल जाते समय एक नाग की वजह से लोकेश की साइकिल का संतुलन बिगड़ा और वो गहरी खाई में read more

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मन का पंछी पंख फैलाकर, उड़कर जाता है उस गांव, जहाँ बसी हुई मेरी यादे, आज read more

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'भोला के लिये गुरूजी उसके भगवान थे और उनकी हर आज्ञा पत्थर की लकीर थी | वह एक read more

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उन दिनों, यानि आज से करीब ६० साल पहले, गणेश चतुर्थी के पर्व को, लोक भाषा में, लोग read more

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बुकस्टोर
© Ashutosh Shrivastwa

Classics Inspirational +1

बीते सोमवार को उनका इंतकाल हो गया। अब किताबों के साथ साथ उनके इतर की खुशबू भी आती read more

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कहानी खत्म कर मैंने पति को धन्यवाद दिया। वो तो समझ नहीं पाए ऐसा क्या हुआ। वो आश्चर्य read more

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लेखक : धीराविट पी. नात्थागार्न ; अनुवाद : आ. चारुमति read more

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सर, मुझे दिल्ली में ही रहना है। मैं एक सप्ताह में ज्वाइन करने के लिए तैयार हूँ। और read more

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वह ठेला नहीं था, उस ठेले के हर मर्तबान में, हर शीशी में, हर थैली में, उनके घर का read more

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" तस्वीर बढ़िया बनी है पर आपने इस तस्वीर में मेरे बाल ज्यादा बना दिये हैं जबकि मेरे read more

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दाल चावल को छोड़कर बाकी सभी भोजन मुझे पसंद आते हैं। वह साउथ इंडियन हों, मुगलाई हों, read more

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आज उन बातों को लगभग चालीस साल हो चुके हैं ,वहाँ की और भी बहुत सी यादें हैं जो मैं read more

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समाज का read more

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दफ़्तर के बाहर, कौओं की तेज काँव-काँव सुनकर कुछ लोग बाहर आए। मुझे देखकर उनको read more

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ये परम वीर चक्र इस बात का प्रतीक है कि आज भी देश जुड़ा है एक प्यार के बन्धन से अपनी read more

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मैं सदियों से उसका राज़ अपने सीने में छुपाने के लिए ख़ुद को दाद देता read more

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