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Shalinee Pankaj

Abstract


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Shalinee Pankaj

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रीटा

रीटा

7 mins 233 7 mins 233

अंधेरे को चीरते हुए तीव्र गति से कार आगे बढ़ रही थी। रीटा ने खिड़की खोल रखी थी। हवा के झोंको से न जाने कब उसकी नींद लग गयी।

तभी मोबाइल की घण्टी घनघनाई तो रीटा की नींद खुली गाड़ी रोकने को कहा गया। ड्राइवर ने गाड़ी वहीं रोक दी। रीटा अब भी नींद में ही थी। अचानक कुछ आवाज सुनाई दी रीटा ने आँखे खोलकर देखा तो कुछ शराबी लड़के हुल्लड़ कर रहे थे। रीटा पीछे की सीट में बैठी थी।सहेली के विवाह समारोह में शरीक होने जा रही थी। ड्राइवर के साथ अकेली थी उसने कहा "भैया आपने गाड़ी कहाँ रोक दी ,देखिए कैसी जगह है।"

"क्या करता दीदी बाकी गाड़ी पीछे आ रही है और दादा (रीटा की सहेली का बड़ा भाई)ने फोन कर गाड़ी तुरन्त रोकने को बोले की आगे से सबको साथ में जाना है। बस 5 km है पर दूसरे राज्य की सीमा प्रारम्भ है। "

"हम इतना आगे कैसे निकल गए?"

"हमारी स्पीड ज्यादा थी।"

"अच्छा अब गाड़ी यहाँ से हटाओ शराब भट्ठी के पास ही रोक दिया आपने।"

"पर दीदी हम शहर से बाहर आ चुके है रात के 12 बज रहे है और आगे तो स्ट्रीट लाइट भी नहीं जल रही,अंधेरा है।"

"ओहहो यहाँ से गाड़ी आगे बढ़ाओ...."

"अच्छा दीदी!'

ड्राइवर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी और लघुशंका के लिए चला गया। रीटा खिड़की पर सर टिकाई की फिर नींद के आगोश में चली गयी।

"रीटा......रीटा" कोई खिड़की से अंदर हाथ डाल उसे उठा रहा था। उसके नाखून से रीटा के गाल में खरोंच आ गया। दर्द का एहसास हुआ और वो नींद से जाग गयी।

"क... क...कौन है?" शायद स्वपन ही था।

उसकी आँखे इधर-उधर देखने लगी। चारो तरफ घुप्प अंधेरा था। ड्राइवर गाड़ी में नहीं था। " न जाने मुरख छोड़कर कहाँ चला गया । मन ही मन बुदबुदाई ओर बाहर उतरने की कोशिश की पर अंधेरे में भूत का नहीं जिंदा इंसानों का भय एक लड़की के लिए ज्यादा रहता है ये सोच वो चुपचाप अपने साइड की खिड़की से टिक गई।

अचानक

उसने अपने तरफ की खिड़की से बाहर देखा तो

कब्रिस्तान था। " कमीने को कोई और जगह नहीं मिली कब्रिस्तान के पास गाड़ी रोक दी उफ्फ्फ! फोन लगाकर पुछु की कहाँ चला गया। मोबाईल टटोली तो मिल गया,ओह्ह कवरेज नहीं अब क्या करूँ स्विच ऑफ कर ऑन करूँ तो शायद कवरेज आ जाये।" मोबाइल स्विच ऑफ की

"रीटा.........." ये आवाज रीटा के कान के अंदर से होकर दिल तक आवाज गयी। रूह काँप गयी उसकी मोबाईल हाथ से छूट गया।

"कौन.... कौन है??"

आवाज कब्रिस्तान के तरफ से आ रही थी।

फिर वही आवाज किसी पुरुष की बार-बार रीटा सुनकर उसने अपने दोनों हाथ कान पर रख लिए की कुछ गीला सा महसूस हुआ। क्या है?? देखा तो हल्की खरोच का निशान ,खून की एक धारी की तरह गाल में जम चुंका था।

वो सोचने लगी 'ओह्ह मैं तो भूत प्रेतों पर विश्वास नहीं करती ,नहीं डरती ये मेरे ही नाखून से नींद में लगा होगा। सब मेरा वहम औऱ कुछ नहीं। मैं इस कब्रिस्तान की तरफ देखूँगी भी नहीं पर.... ये क्या वो अपलक कब्रिस्तान की तरफ देखने लगी? वो आवाज उसी दिशा से आ रही थी। एक पुरुष की आकृति नजदीक आती हुई दिखी  "रीटा ...."कहते हुए उसने हाथ फैला लिए। इतना घनघोर अंधेरे में वो सफेद पोशाक में आकृति स्प्ष्ट देख पा रही थी। चारो तरफ अंधेरे के साथ हवा भी सांय-सांय चल रही थी।

कुत्ते की भोंकने की आवाज ,फिर रोने की आवाज आने लगी थी।

रीटा भय के मारे कांपने लगी और खिड़की की काँच बन्द करने लगी पर वो कुछ भी नहीं कर पा रही थी।आवाज फिर कानो के पर्दे से टकराने लगी मानो आज कान से खून निकल जायेगा।

अचानक गाड़ी का दरवाजा खुला। रीटा बाहर उतर गई उस आकृति के पीछे जाने लगी। वो कब्रिस्तान के अंदर में किसी सम्मोहन से वशीभूत सी आगे बढ़ते गयी। चमगादड़ उड़ रहे थे। चारो तरफ घोर सन्नाटा था। हवा की सांय-सांय दुपट्टे को कांधे से उड़ा रही थी और वो आगे बढ़ते जा रही थी।

एक कब्र के पास पहुँचकर रुक गयी वो आकृति करीब आने लगी औऱ रीटा के काफी करीब आ समा गई वो बेहोश होकर गिर गयी उसी कब्र पर।

कुछ घण्टे बाद पीछे उसके दोस्तों की गाड़ियां आ गयी। ड्राइवर बाहर तक चला गया था। जो गाड़ियों के साथ आया। दादा ने गाड़ी में आकर झाँका रीटा नहीं दिखी सब ढूंढने लगे। आंटी ने ड्राइवर को डांटा "औऱ कोई जगह नहीं मिली कब्रिस्तान के पास गाड़ी रोक दी।" सुबह होने लगी ढूंढते हुए वो लोग कब्रिस्तान के अंदर आये तो रीटा बेहोश मिली।

" ये लो इन्हें कहीं और जगह नहीं मिली कब्रिस्तान में आकर सो रही है।" रोहित ने कहा।

" अरे सो नहीं रही बेहोश है।"

"कहीं किसी भूत- प्रेत का चक्कर तो नहीं।"

सब उसके कानों में सुनाई पड़ रहा था पर चाहकर भी वह आँख नहीं खोल पा रही थी,न उसके होंठो से कुछ निकल रहा था।

सब वहाँ पहुँच गए पर दादा ने सर्किट हाउस में रुकने का प्रबंध किया रीटा को होश नहीं आ रहा था डॉक्टर को लेकर आये। डॉक्टर ने चेक किया हल्का फीवर था।

डॉक्टर बाहर बात कर रहे थे कि रीटा को होश आया पर आँखे चढ़ी हुई थी। कुछ अजीबो गरीब आवाज आ रही थी स्त्री की देह में पुरुष की आवाज सुनकर नौकर भी थर्रा गए। किसी ने भूत प्रेत का साया कहा। डॉक्टर ने तुरन्त अंदर आकर रीटा को शांत कराना चाहा तो रीटा ने जोर से हाथ को झटका डॉक्टर दूर जा गिरा। उसके बाकी सब दोस्त शादी में गए थे पर रोहित रुका था रीटा के पास।

डॉक्टर व रोहित किसी तरह उसे काबू में लाने की कोशिश करते तो वो समान आंखों के इशारे से हवा में उछालने लगी और अचानक से फिर बेहोश हो गयी डॉक्टर ने रोहित के साथ मिलकर किसी तरह उसे बांधा औऱ बाहर आ गए।

"ये क्या है डॉक्टर साहब।"

""कुछ समझ नहीं आ रहा।"

" ड्राइवर ने कल रात वाली बात बताई की ये कब्रिस्तान में मिली।"

"ओह्ह नो"

"क्या हुआ डॉक्टर साहब।"

"देखिए मैं डॉक्टर हुँ फिर भी यहाँ दहशत है उस कब्रिस्तान का। कहते है जॉन नाम का एक लड़का किसी लड़की से एकतरफा प्यार करता था औऱ प्यार में असफल होकर आत्महत्या कर ली। तब से कोई लड़की वहाँ नहीं जाती कई हादसे हुए है,उस जगह से सम्बंधित। वो बुरी आत्मा पहले लड़की के शरीर को वश में करता है फिर सम्मोहन द्वारा सुसाइड के लिए मजबूर करता है।"

"ओहहो ये सब बकवास है।"

रोहित की बात सुन डॉक्टर साहब भड़के बोले " बेटा

रीटा को बचाने के बारे में पहले सोचो। आत्मा पर विश्वास है या नहीं ये तर्क बाद में करना।"

"वैसे मैं जा रहा हूँ दवा असर नहीं करेगी तो दुआ करना सब ठीक हो। "

"पागल है ये डॉक्टर कुछ भी बकवास किये जा रहा है।" रोहित बड़बड़ाता हुआ अंदर जाता है तो क्या देखता है। रीटा का शरीर हवा में तैर रहा है। वो ये देख काँप जाता है। तब तक उसके दोस्त भी शादी लौट आते है। आरोही ये देख बेहोश हो जाती है। सर्किट हाउस का एक सेवक दीना आता है रोहित से कुछ कहता है। रोहित हामी भरता है।

दीना के आते तक हालत खराब थी सबकी। रीटा जैसे ही होश में आती फर्श पर कभी उल्टा चलती तो कभी दीवारों पर सर पटकती।

आधे घण्टे बाद दीना आता है एक स्वामी जी के साथ। उसने कदम रखते ही पहले अभिमंत्रित जल से पूरा घर के चारो तरफ छिड़काव किया। ताकि वो आत्मा यहाँ से जा न पाए। कमरे में जाने के पूर्व सिद्ध जल का पूरा छिड़काव करते हुए कमरे तक पहुँचते है। स्वामी जी के कमरे में प्रवेश करते ही दरवाजा बंद कर अभिमंत्रित मौली धागा से दरवाजा को भी बांधते है। स्वामी जी व उनके शिष्य लगातार मंत्रोच्चार करते हुए उसके तरफ जल फेंकते है। रीटा की हरकतें भयानक हो जाती है उसके सहेलीयां आँखे बंद कर एक कोने में खड़ी हो जाती है रोहित भी रूह कंपाने वाले इस दृश्य को देख नहीं पा रहा था पर वो रीटा से प्रेम करता था। उसे बचाने के लिए कुछ भी कर सकता था।

सब मंत्रोच्चार कर रहे थे रीटा थोड़ी कमजोर पड़ने लगी थी पर वो दुष्ट आत्मा अजीब आवाज में चिंघाड़ते हुए कहता है " इसे साथ ले जाऊंगा नहीं तो कभी नहीं जाऊंगा,क्योंकि इसे ही मेरी आवाज सुनाई दी।"

स्वामी जी को कुछ सूझता है और वो रोहित के हाथ में अभिमंत्रित सिंदूर देते हुए तुरन्त रीटा की मांग भरने को कहते है। रोहित लपककर रीटा का माँग भरता है।

"मूर्ख ये किसी की ब्याहता है साथ नहीं ले जा सकता इसे !" ये कहते हुए एक थैला खोलते है।

"नहीं ई ई.......वो आत्मा चित्कारते हुए झोला में प्रवेश करती है कि तुरन्त उसे अग्निकुंड में डाल देते है। रीटा निढाल होकर बिस्तर पर गिर जाती है।

कुछ दिन बाद स्वामी जी के कहने पर उनके आश्रम में रोहित व रीटा ने पुनः विधिवत शादी की। वो लोग जब वापस आने लगते है। ठीक उसी जगह पर गाड़ी अचानक से रुक जाती है। रोहित बाहर निकल कर देखता है ,पीछे सब गाड़ियां भी आ जाती है।

"क्या हुआ ? "नितिन ने कहा !

कुछ नहीं रोहित गाड़ी में बैठता है गाड़ी आगे बढ़ती है कि तभी कब्रिस्तान की तरफ से एक आवाज रीटा के कानों पे सुनाई देती है।


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