Shalinee Pankaj

Romance


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Shalinee Pankaj

Romance


तेरा दिल मेरे पास अब भी है

तेरा दिल मेरे पास अब भी है

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सीढ़ियां चढ़ती हुई झरना ऊपर क्लास की ओर जा रही थी। खूब सारी सीढ़ियां चढ़ते हुए और हड़बड़ी की वजह से उसकी सांस फूलने लगी थी। वह लगभग लड़खड़ाते हुए दरवाजे तक गई, और बोली "मे आई कम इन सर" क्लास लेते हुए अचल ने उसकी तरफ देखा और इशारा किया अंदर आने का। झरना अंदर आई और क्लास में बैठ गयी।

आज झरना का कोचिंग क्लास में पहला दिन था और वह लेट हो गई झरना 12वीं कक्षा की छात्रा थी और स्कूल में टीचर नहीं थे गणित के। गणित ही उसका मुख्य विषय था, इसलिए झरना ने कोचिंग क्लास ज्वाइन किया, जो अभी नया नया खुला था और उस कोचिंग में रिजल्ट भी अच्छा आया था पिछले वर्ष। वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का इसलिए झरना ने भी सही समय में कोचिंग क्लास ज्वाइन कि वह सिर्फ गणित बस पढ़ने जाती थी। अचल सर उसे पढ़ाते थे। अचल खुद एमएससी का छात्र था। वह बहुत होनहार था। पार्ट टाइम जॉब की वजह से वह गणित पढ़ाने कोचिंग में आते थे, और एक पीरियड 12वीं वालों का ले करके वह चले जाते थे। ग्यारहवीं के बच्चे और दसवीं के बच्चों ने भी कोचिंग में जो हेड सर थे उनसे आग्रह किया कि अचल सर हमें भी गणित विषय पढ़ाया करें और चूंकि अचल सर तो खुद एक स्टूडेंट थी इसलिए वह समय नहीं निकाल पाते थे क्योंकि बारहवीं बोर्ड एग्जाम था तो वह सिर्फ 2 घण्टे के लिए मान गए जैसे उनका एमएससी हो जाएगा तो उन्होंने आश्वासन दिया कि आगे वह 10वीं 11वीं का भी क्लास भी ले लेंगे।

डेढ़ घंटे की अचल सर की क्लास रहती थी जिसमें एक घंटा ही झरना रह पाती थी वह अक्सर 15-20 मिनट और कभी-कभी तो आधा घंटा लेट से आती थी एक दिन अचल सर ने उन्हें क्लास में लिया ही नहीं झरना को भी गुस्सा आया! यह कोई मेरे स्कूल के सर तो है नहीं जो रॉब झाड़ रहे। झरना को इतना गुस्सा आ रहा है की वो भी क्लास में नहीं जाती है। अगले दिन फिर ऐसी होता है अपने नियम अनुसार झरना फिर से आज 20 मिनट लेट पहुँचती है। अचल फिर उसको क्लास में नहीं लेते हैं यह सिलसिला एक हफ्तों तक चलता है। अचल कुछ बोलते नहीं थे वह सिर्फ अपने काम से बस मतलब रखते थे बच्चों को पढ़ाते थे और चले जाते थे। किसी विद्यार्थी के पर्सनल जीवन से उन्हें कोई मतलब नहीं था। इधर झरना को उनसे बहुत नाराज़गी हो गई थी। झरना अचल से बहुत ज्यादा चिढ़ने लगी थी। अब वह अचल को विश भी नहीं करती थी एक हफ्ते बाद झरना को भी लगने लगा इस तरीके से कोचिंग में पैसा बस व्यर्थ जा रहा है वह तो क्लास भी नहीं अटेंड कर पा रही है अब अपना मतलब निकालना है तो मुझे क्लास में समय पर जाना पड़ेगा। क्योंकि लेट आने से अचल उसे क्लास में नहीं लेते हैं, जिसकी वजह से उसी की बेइज्जती होती है इसलिए झरना ने अब समय पर जाना शुरू कर दिया। पढ़ाई में होशियार थी इसलिए उसकी तरफ अचल ध्यान देते थे और उन्हें डांट फटकार के बिना कुछ बोले ही उनका काम हो गया और झरना समय पर आने लगी थी।

झरना अब मन लगाकर पढ़ने लगी थी एक माह हो चुका था। कोचिंग पढ़ते हुए उसे दिसंबर की ठंड शुरू हो चुकी । अचल सुबह 5:00 बजे क्लास लेना शुरू कर दिए क्योंकि उनको भी आगे अपने परीक्षा की तैयारी करनी थी। वह प्रतियोगी परीक्षा की भी तैयारी कर रहे थे जिसकी वजह से उन्होंने सुबह का समय दिया।

झरना सुबह 5:00 बजे पहुंच जाती थी जबकि सुबह की वजह से बाकी बच्चे 5:30 तक पहुंचते थे लेकिन अचल को भी अच्छा लगता था कि झरना सुबह से आ जाती है और अब उसकी आदत सुधर गई है। धीरे-धीरे सभी बच्चे 5:15 तक तक पहुंचने लगे झरना को अक्सर अचल का इंतजार होता था। वह हमेशा उससे पहले पहुँच जाती थी और जब अचल आ जाते थे तो वह जानबूझकर उससे कुछ गणित के सवाल पूछती। कुछ ऐसा करती उसकी तरफ ध्यान दें जबकि अचल सवाल हल करा कर फिर उसकी तरफ ध्यान नहीं देते थे। वह तो सिर्फ अपने में मशरूफ रहते थे अपने कर्तव्य का ही पालन में उनका ध्यान रहता था।

झरना 18 वर्ष की थी यह उम्र ऐसी थी कि इसमें बच्चे फिसल ही जाते हैं झरना को लगने लगा था कि उसे अचल जी अच्छे लगते हैं, एक दिन झरना जल्दी-जल्दी सीढ़ियां चढ़ रही थी और अचल नीचे उतर रहा था दोनों की ज़ोरदार टक्कर होती है झरना सीढ़ियों में गिरने लग जाती है कि अचल उसे संभालता है किसी अनजान शख्स का स्पर्श! वह भी अचल जिसे झरना पसंद करती थी झरना को रोमांचित कर जाता है। वह कई दिनों तक सो नहीं पाती है उसे वह स्पर्श बार-बार याद आता है कि उसके कंधों को कैसे आंचल में अपनी बाहों में लिया था और उसे गिरने से बचाया। अब तो झरना और भी अचल की दीवानी हो चुकी थी हालांकि अचल भी थोड़ा परेशान हो गया था उसके बैरागी मन में भी झरना के लिए थोड़ा सा प्रेम जाग चुका था, पर वह जानता था कि वह 12 वी ही पढ़ती है और वह एम एस सी कर रहा है यानी उसकी पढ़ाई खत्म होने वाली है और झरना को अभी कॉलेज भी पढ़ना था। इस प्यार-व्यार के चक्कर में तो वो भटक जाएगी। अभी दोनों की राहें अलग है, दोनों की मंज़िल अलग है और यहीं तक का साथ भी है, क्योंकि 12वीं तक का ही हो कोचिंग में पढ़ाता था। उसके बाद तो झरना नहीं आएगी झरना को कॉलेज के पढ़ने के लिए दूसरी जगह जाना था और अचल को यहीं रहकर के बच्चों को पढ़ाना था, इसलिए ध्यान नहीं दिया पर झरना उसके प्रेम में दीवानी हो गई थी।

फरवरी आई वैलेंटाइन डे का दिन झरना आज सुबह पहुंच गई कोचिंग और एक कार्ड उसने बनाया दिल के आकार का उसमें आई लव यू उसने लिखा और गुलाब अंदर दबा दिया। साथ ही खत भी लिखा छोटा सा

"अचल जी!

आई लव यू

मैंने अपना दिल आपके हवाले किया, अगर आप भी मुझसे प्रेम करते हो तो, इस दिल पर अपना दस्तख़त कर मुझे सौंप दीजिएगा। आपके जवाब का इंतजार मैं हमेशा करूँगी....

     आपकी झरना"

और यह लिखकर झरना ने मौका देखकर अचल के बैग में उसकी डायरी के अंदर दबा दिया कई हफ्ते बीत गए। महीना बीत गया, लेकिन अचल ने कोई जवाब नहीं दिया। झरना सोचती रही क्या उन्होंने पढ़ा नहीं ? मेरा दिल उन्हें मिला होगा कि नहीं ? उन्होंने डायरी खोलकर देखा होगा कि नहीं ?बहुत सारे प्रश्न थे झरना के मन में जिनका जवाब वह भूसे में सुई की तरह ढूंढती रहती थी पर उसका दूर-दूर तक कोई जवाब नहीं था। अचल अभी भी क्लास में पढ़ाने आता तो झरना उसके चेहरे को यूँ देखती मानो उसके दिल का हाल दिखाई दे जाए, पर अचल तो अचल ही था पर्वत की तरह अडिग। वह वैसे ही देखता जैसे पहले देखता था उसके लिए वह सिर्फ एक पढ़ने वाली छात्रा थी इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं। अब तो कभी-कभी वह झरना के लिए थोड़ा नाराज़ जो जाता अपने स्वभाव के विपरीत। झरना हताश भी हो जाती थी। कभी-कभी प्रश्नों से ऐसी चोट करता कि उसके आत्मा सम्मान को चोट पहुंच जाती थी। सबके सामने वो झरना को डांट देता था की "तुम्हारा ध्यान कहां रहता है कुछ दिनों बाद एग्जाम शुरू है तुम अच्छे से सवालों को हल नहीं करती हो और वही वही प्रश्न बार-बार पूछती हो! झरना पढ़ाई में ध्यान दो! तुम ही एक नहीं हो ,मुझे सब की तरफ मुझे ध्यान देना है और मुझे खुद भी अपनी पढ़ाई भी करनी है मैं ज्यादा वक्त भी यहां नहीं दे सकता डेढ़ घंटे की जगह 3 घंटा तुम लोगों को पढ़ा रहा हूं, कि तुम लोग 12वीं का परीक्षा कम से कम तुम लोगों का एग्जाम अच्छे से हो जाए, और तुम हो वहीं की वहीं अटकी रहती हो।"

इस तरीके से बातें करना लोगो हतोत्साहित भी कर देता लेकिन उसके इन सब कटाक्ष में एक प्रेरणा रहती थी आगे बढ़ने की क्योंकि जब कटाक्ष किया जाता है उसके स्वाभिमान को चोट पहुँचती है वह झुकता या टूटता नहीं है बल्कि इसे आगे बढ़ता है। झरना ने अब अपनी पढ़ाई में ध्यान देना शुरू किया।झरना का परीक्षा शुरू हो गया कोचिंग क्लासेज बंद हो गई सब एग्जाम में व्यस्त हो गये।

12वी में झरना का बहुत अच्छा परीक्षा परिणाम आता है। आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज में दाखिला लेती है।

कॉलेज की दुनिया की रंगीनियत ही अलग होती है। मानो खूब सारे रंग-बिरंगे पुष्प से बच्चे रहते है। अपने सपनों को पूरा करने का ज़ज़्बा लेकर सब कॉलेज में मन लगाकर पढ़ाई करते है, क्योंकि विद्या अध्ययन का ये अंतिम पड़ाव होता है जहाँ बच्चों को अपने कैरियर की भी चिंता लगी रहती है। बहुत दोस्त भी मिलते है। झरना अब आगे बढ़ चुकी थी। हालांकि दिल में प्रेम वाली जगह अब भी खाली थी क्योंकि वो जगह तो अचल ने ले ली थी। जब भी उसे अचल की याद आती उसका मन दुखी होकर चीत्कार उठता वो बेचैन हो जाती थी कि जिससे इतनी मुहब्बत की उसकी बेरुखी क्यों? वो चाहकर भी अचल को भुला नहीं पाती थी। उन दिनों कॉलेज में एक लड़के ने झरना को प्रपोज भी किया। वो झरना को बी एस सी प्रथम वर्ष से पसन्द करता था पर झरना उसे दोस्त ही मानती थी। जीवन में आगे बढ़ने के लिए व अचल को भूलने के लिए उसने उस लड़के विवान के प्रपोज करने पर नाराज़गी नहीं दिखाई पर कोई जवाब भी नहीं दिया। विवान ने इसे उसकी हाँ समझी पर कभी भी झरना का व्यवहार में दोस्ती एक साफ सुथरी दोस्ती के अलावा कुछ भी नहीं था।

इधर अचल ने अपनी पढ़ाई पूरी की औऱ प्रतियोगिता पास कर प्रोफेसर के पद पर उसी कॉलेज में आया। पाँच वर्षों में अचल का हुलिया काफी कुछ बदल चुका था। बढ़ी हुई दाढ़ी व आँखों में चश्मा था। झरना भी एम एस सी अंतिम वर्ष की परीक्षा दिला रही थी। फेयरवेल पार्टी में सभी प्रोफेसरों के साथ नया प्रोफेसर साहब यानी अचल भी आया था। जब अचल का परिचय करवाया गया उस वक्त झरना क्लास में नहीं थी लेकिन अचल के स्पीच खत्म होने के वक्त वो आ चुकी थी। जाने क्यों वो उस नए प्रोफेसर को देख होश खोने लगी थी। पार्टी खत्म हुई। सब जाने लगे थे। कहीं वो अचल जी तो नहीं थे ये सोचते हुए उदास सी झरना भी जा रही थी। उसके कदम से कदम मिला कोई और भी चल रहा था। कि झरना ठहरकर उसकी ओर देखा। उस शख्स ने अपने बैग से डायरी निकाली उसमें से वो दिल जिसमे उसके दस्तख़त थे झरना की ओर बढ़ाया और आगे बढ़ गया। झरना दौड़ते हुए उसके आगे गयी और उसके सीने से लग गयी। "अचल जी आप, इतना वक्त लगा दिए जवाब देने में। मेरी खबर भी नहीं ली कभी। किस बात की सजा दिए बताओ।" ये कहते हुए वो रोये जा रही थी।

"पगली अचल से झरना कभी अलग हो सकता है क्या? पहले जवाब दे देता तो न तुम पढ़ाई पूरी कर पाती और ना ही मैं कुछ बन पाता। मुझे तो तुम्हारी पूरी खबर थी बस इंतजार था कि तुम्हारी पढ़ाई पूरी हो जाये और मैं जीवन में कुछ बन जाऊँ देखो मैंने कॉलेज में नौकरी ज्वाइन की और तुम्हारी विदाई हुई अब तो सीधे अपने घर ले जाऊँगा हमेशा के लिए।"



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