प्यार की शर्त
प्यार की शर्त
जनवरी का महीना शुरु हो चुका था और इस बार भोपाल में ठंड अपना 20 साल का पुराना रिकॉर्ड तोड़ चुकी थी। चारों तरफ तेज ठंडी हवाएं चल रही थी और वीआईपी रोड पर भोपाल के तालाब का पानी समुद्र की भांति हिलोरे मार रहा था।
ठंड से सिकुड़ती हुई रोजी स्कूल ड्रेस में तेजी से राजा भोज की प्रतिमा की तरफ चली जा रही थी।
उसे अभी यह समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर रमन ने उसे यहां क्यों बुलाया है।
वह क्लास में ही थी ।केमिस्ट्री का पीरियड चल रहा था। 12वीं क्लास की परीक्षा के कारण सारे बच्चे ध्यान से मैडम का लेक्चर सुन रहे थे, कि अचानक रोजी के फोन में वाइब्रेशन हुए। उसने सोचा इस समय कौन फोन कर सकता है ।इस समय घर से तो कोई फोन कर ही नहीं सकता ।फिर । ।।तो यह रमन हो सकता है लेकिन वह कभी भी क्लास के टाइम पर डिस्टर्ब नहीं करता। फिर।।। आज अचानक ऐसा क्या हो गया।
उसने अपना बैग संभाला और बैग उठाकर धीमी चाल से मैडम के पास गई और मैडम को फुसफुसाते हुए झूंट मूठ का कोई ऐसा कारण बताया कि मैडम ने तुरंत उसे क्लास से जाने को अनुमति दे दी।
रोजी मध्यम कद की बेहद खूबसूरत गोरी चिट्टी लड़की थी ।उसके कंधे तक कटे हुए बाल, लंबी पतली ग्रीवा और सुंदर चेहरे पर सजी हिरनी सी काली आंखें , कमान सी तनी हुई सजीली भौंहें, गाल पर काला तिल तथा मुस्कुराने पर गालों में पढ़ते हुए गड्ढे, डिंपल उसे गजब की खूबसूरत लड़की बनाते थे।
उसके शरीर पर कहीं भी एक छ्टांक भी व्यर्थ का मांस नहीं था। भरे पूरे शरीर की इस सुंदर तम लड़की को देखकर अच्छे-अच्छे लड़के उसे पाने की, या एक झलक देखने की कामना करते थे।
रोजी अच्छे चरित्र की ,साफ मन की , सदा पढ़ाई में लिप्त रहने वाली स्कूल के टीचर्स की एक आज्ञाकारी छात्रा थी। वह गरीब होने के बावजूद भी सदा अच्छे नंबर लेकर पास होती रहती थी।
उसके पापा का देहांत तभी हो गया था जब वह कक्षा 5 में पढ़ रही थी रोजी की मां ने कुछ क्रिश्चियन घरों में जाकर खाना बनाने का काम शुरू कर दिया और उनसे जो थोड़ी सी आय होती थी उससे ही उसने रोजी को पढ़ा लिखा कर कक्षा 12 तक पहुंचा दिया था ।कक्षा 12 के बाद उसकी शादी रमन से होने को थी ।रमन डिसूजा एक अच्छे मध्यम वर्गीय परिवार का एकलौता लड़का था उसकी मां का देहांत हो चुका था और पिता रेलवे में नौकरी करते थे। रोजी की अत्याधिक सुंदरता की वजह से रमन के पापा ने खुद आगे बढ़कर रोजी का हाथ अपने इकलौते बेटे रमन के लिए मांग लिया था। क्योंकि उन्होंने रमन को रोजी के आसपास अक्सर ही आंखों में चाहत लिए मंडराते देखा था।
रोजी की आंखों में भी उन्होंने रमन के प्रति चाहत को नोट कर लिया था।
रोजी की मां को भी इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं थी।
और इस तरह दोनों परिवारों की सहमति के साथ-साथ उनका प्यार परवान चढ़ता गया।
रोजी ने स्कूल से बाहर निकल कर अपना फोन निकाला और रमन को फोन लगाकर पूछा "क्या बात है मैं क्लास अटेंड कर रही थी। पीरियड के समय तुमने मुझे कैसे डिस्टर्ब किया।"
"पढ़ाई तो होती रहती रोजी ,।आज तुमसे बहुत जरूरी काम था ।तुम सीधे बड़े तालाब पर राजा भोज की प्रतिमा के पास आ जाओ। मैं वहीं पर तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं।"
"लेकिन ऐसा क्या काम आ गया तुम्हें जो तुम मुझे स्कूल से गोल लगाने को कह रहे हो ।जानते हो ना यह क्लास ट्वेल्थ है बोर्ड के एग्जाम सर पर है। यदि कुछ भी गड़बड़ हो गई तो मेरा रिजल्ट खराब हो जाएगा। सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।"
"रोजी तुम ही बताओ मैंने कभी तो वे स्कूल टाइम में छेड़ा है या कभी तो मैं स्कूल टाइम में बाहर आने को कहा है आज बहुत जरूरी काम है इसलिए तुरंत बाहर आ जाओ।"
रोजी अपना बैग संभाले हुए स्कूल के गेट पर आई और बाहर निकल कर वहां सेआधा किलोमीटर दूर वीआईपी रोड पर स्थित राजा भोज की प्रतिमा की तरफ चलने लगी।
आज राजा भोज की प्रतिमा के चारों तरफ पानी की लहरें बहुत तेजी से उफान मार रही थी।
राजा भोज की प्रतिमा के पास रमन खड़ा हुआ था।
वह चलते हुए सीधे रमन के पास पहुंची और पूछा। "तुमने मुझे इस समय यहां क्यों बुलाया है क्या बात है।"
रमन ने रोजी को बाहों में लेते हुए कहा "रोजी तुम कहती थी न कि रमन तुमने जब पढ़ाई कर ली है तो नौकरी भी कर लो। मेरी नौकरी का पूरा इंतजाम हो चुका है होटल का सेठ मुझे अपने यहां पर जूनियर मैनेजर की नौकरी का ऑफर दे रहा है। बस उसकी एक ही शर्त है जो कि मैं पूरी नहीं कर पा रहा हूं।"
"कैसी शर्त रमन।" उत्सुकता बस रोजी ने कहा।
"बड़ी अजीब सी शर्त है रोजी जिसे पूरा करना मेरे बस में बिल्कुल नहीं है उसे सिर्फ तुम ही पूरा कर सकती हो "
"बताओ तो सही क्या शर्त है।"
"तुम्हें याद है एक बार तुम मेरे बर्थडे मैं मेरे साथ उनके होटल में गईं थीं।"
"हां हां।। मैं कैसे भूल सकती हूं वहां हम लोगों ने कितना अच्छा डांस किया था।"
"और मैंने कहा था कि लाल फ्रॉक में तुम एकदम एंजेल लग रही हो।"
"धत्त ।।।तुम्हें तो मैं हमेशा ही एंजेल नजर आती हूं।"
"हां रोजी ।।तुम मुझे एंजिल ही लगती हो ।एकदम परी के माफिक।।।,मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं।"
"हां तो तुम तुम्हारी नौकरी का क्या कह रहे थे"
"मैं वही तो तुम्हें बता रहा हूं।
सेठ का कहना है कि वह मुझे मैनेजर की पोस्ट पर रख लेगा क्योंकि मुझे उसकी योग्यता है पर उसकी एक शर्त है "
"क्या शर्त"
"उसने उसने मुझसे कहा है कि कि,,,"
"यह क्या की की ,,,लगा रखी है ठीक से बोलो ना,,,। क्या बात है।"
"उसने मुझसे कहा है कि, वह तुम्हारी फ्रेंड रोजी है ना। उसे एक बार के लिए मेरे साथ बिस्तर पर छोड़ दो ।यदि वह मुझे खुश कर देगी तो तुम्हारी नौकरी पक्की।"
"मैंने इसीलिए तुम्हें यहां बुला लिया है। बोलो चलती हो। सेठ के पास। मेरी नौकरी फिर हमेशा को पक्की हो जाएगी। और मेरा घर खुशियों से भर जाएगा।"
रमन की बात सुनकर रोजी बहुत हक्की बक्की सी रह गई। उसने रमन से कहा" इडियट तुम्हें पता है ,!!!तुम क्या कह रहे हो!!!!।"
"मैं तुम्हें प्यार करती हूं और मेरी शादी भी तुमसे ही होने वाली है, और तुम हो कि मुझे दूसरों के आगे परोस रहे हो कैसे लड़के हो तुम।"
"रोजी!!! तुम देख तो रही हो!!! मैंने बहुत कोशिश कर ली !!पर मेरी कहीं भी नौकरी नहीं लग रही है!! और अब जब नौकरी लग रही है और बड़ी आसानी से लग रही है तो तुम !!!!और तुम मेरी मदद भी नहीं कर रही हो।"
"रमन क्या तुम उम्र भर उस सेठ की जूठन को स्वीकार कर पाओगे।"
"इसमें जूठन जी ऐसी कौन सी बात है रोजी। सिर्फ एक बार की ही तो बात है ।उसके बाद मेरी नौकरी लग जाएगी और मैं तुरंत तुमसे शादी कर लूंगा। फिर हमारा सुंदर घर होगा। छोटे-छोटे बच्चे होंगे। और यह सब सिर्फ एक ही तरह से तो हो सकता है है ।तुम मेरे साथ चलो ना सेठ के पास।"
रोजी ने रमन के प्रस्ताव पर कुछ देर विचार किया और फिर रमन के साथ उसके होटल की तरफ चल पड़ी। रमन आज बहुत खुश था उसे अब पूरा विश्वास था थी 2 घंटे बाद अब उसे मैनेजर की नौकरी मिल जाएगी और उसके खुशहाली के दिन शुरू हो जाएंगे।
रोजी के मन में होटल की तरफ चलते हुए अनेक ख्याल आ रहे थे। उसे लग रहा था कि रमन बहुत मतलबी है। अपने स्वार्थ के पीछे वह कितने नीचे तक गिर सकता है। की उसे अपनी मंगेतर को भी किसी के सामने परोसने में कोई संकोच नहीं है।
उसके मन के दूसरे हिस्से ने कहा "यदि यह सब करके भी रमन की जिंदगी खुशहाल बन सकती है तो अपने मंगेतर की खातिर यही सही।"
लेकिन अगले ही पल फिर उसे ख्याल आया नौकरी करने के लिए यह रास्ता बिल्कुल ठीक नहीं है ।जिस सेठ के यहां रमन नौकरी करेगा वह हमेशा के लिए रोजी को जब भी जी चाहेगा, तब बुला लेगा और उसकी जिंदगी नर्क बन जाएगी।
रोजी ने सोचा दुनिया के सभी लोग अपनी मेहनत करते हैं और सफल होते हैं, तो रमन क्यों नहीं हो सकता ।उसे इसी तरीके से सिर्फ अपनी मेहनत के दम पर सफल होना पड़ेगा। उसकी खातिर ,थोड़े से प्यार की खातिर, इतना बड़ा और इतना गंदा कदम उठा लेना सरासर बेवकूफी होगी।"
चौराहे पर आकर रोजी वही खड़ी हो गई और उसने रमन से कहा
"रमन माना कि तुम मुझे बहुत प्यार करते हो और मुझसे शादी भी कर रहे हो पर सोचो!!! एक नौकरी की खातिर तुम अपनी मंगेतर को किसी के भी सामने परोस सकते हो क्या यही तुम्हारा मोरल है।"
"अगर इतनी छोटी से शॉर्टकट से चलकर मुझे नौकरी मिल सकती है तो इसमें बुरा क्या है रोजी।"मचलते हुए रमन ने कहा।
रोजी का दिमाग पूरी तरीके से भन्ना गया । उसने अपने हाथ में पकड़ी हुई किताब को बैग में रखा और एक जन्नाटे दार चांटा रमन के गाल पर रसीद कर दिया।
और बोली।
" छी धिक्कार है तुझ पर रमन। यह तो बहुत अच्छा हुआ जो यह घटना हम लोगों के विवाह के पहले ही होली। यदि विवाह के बाद भी तुम इसी तरह मुझे सेठ के सामने परोसने की शर्त रखते तो मैं क्या कर लेती"
"जाओ रमन ।आज से तुम्हारा रास्ता दूसरा है और मेरा दूसरा।मुझे अभी स्कूल वापस जाना है।। ढंग से पढ़ाई करनी है।।। और अच्छे परीक्षा परिणाम के बल पर मुझे किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला लेकर पूरी पढ़ाई करती है।"
"तो तुम मुझसे शादी नहीं करना चाहती !!! सोच लो!!!!" अपने उंगलियों के निशान से भरे लाल हो रहे गाल को सहलाते हुए रमन ने कहा।
"शादी ,!!!!शादी तो तुझसे मेरी जूती भी नहीं करेगी!!!! रमन जो अपनी पत्नी की इज्जत की रक्षा नहीं कर सकता, ऐसे मर्द से शादी करने से तो कुंवारा रह जाना अच्छा है।।। आज के बाद मुझसे कभी मत मिलना।।। हमारी रहें आज से जुदा-जुदा है "कहते हुए रोजी अपने स्कूल की तरह तेजी से चल पड़ी।

