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Aarti Ayachit

Abstract


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Aarti Ayachit

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परवरिश

परवरिश

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अरे-भागवान! बहुत मुश्किल से संभली हो बीमारी से !

सफर में संभलकर जाना ! सुनकर रश्मि बोली!जी पतिदेव जीवन में तमाम उतार-चढ़ावों को पार करते हुए, उम्र के इस पड़ाव पर आकर लगा! कैसे मैने घर-नौकरी के साथ, बुजुर्गों की सेवा करते हुए, बच्चों को झुलाघर में रखकर भी सामंजस्य बिठाते हुए उनकी परवरिश की और वक्त की रफ्तार में बच्चे कब बड़े हो गए ? पता ही नहीं चला।फरवरी में परिक्षाओं के कारण जरूरी है न जाना।

अब इस लॉकडाउन में बच्चों के साथ-साथ पतिदेव भी घर से ही ऑनलाइन-कार्य को दे रहें अंजाम तो सोशल-मीडिया के साथ मैं भी पूर्ण-आत्मविश्वास से कहूँ ! मैं ही-काफी-हूं।


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