प्रेम पत्र
प्रेम पत्र
फूल तुम्हें भेजा हैं ख़त में
फूल नहीं मेरा दिल है…प्रियतम मेरे ख़त में लिखना क्या ये तुम्हारे क़ाबिल हैं…गाना गुनगुनाते हुए मुझे प्रियतम को प्रेम पत्र लिखने की ललक हुयी…मैंने सोचा कुछ अलग करते हैं तो प्रेम पत्र लिखने के लिए चैट जीपीटी का सहारा लिया…देखूँ तो इसे की शायद इसकी मदद से लिखने पर क़्या होता हैं…प्रेमी तो ज़रूर इम्प्रेस हो जायेगा…शायद अपने घर वालों से मिलाने भी ले जाये…हो सकता हैं शादी की बात पक्की हो जाये…
क्योंकि हम प्रेम में थे तो मिलने की ललक होती थी…कभी पार्क सिनेमा हॉल या फिर मॉल में प्रेम में ही मिला करते थे…मिलने पर प्रेम की ही बातें होती थी…
चैट जीपीटी ने लेटर तो एक झटके में लिख दिया…मैं हैरान परेशान हो गयी…क्या हैं यह? इतने जल्दी?हैरान होते हुए मैं पढ़ने लगी। अरे, यह क्या? एकदम फॉर्मल प्रेम पत्र !!!!
अब मैं क्या करूँ?इसमें तो मेरी एक भी फीलिंग्स नहीं थी…मेरे मन में न जाने कितनी सारी बातें थी…बहुत सी बातें तो चाह कर भी मैं अपने प्रेमी को कह नहीं पाती थी…कितनी सारी बातें थी जो मैं एक्सप्रेस ही नहीं कर पाती थी…हैरान होते हुए मैं कंप्यूटर स्क्रीन पर इधर उधर देखने लगीआंसर को देखा तो उसके नीचे था की मैं और अच्छा कर सकता हूँ…चैट जीपीटी हैं तो स्मार्ट…
कुछ सोचते हुए मैंने प्रॉम्प्ट चेंज किया…झट से फिर लेटर सामने आया…चमत्कारिक नज़र से मैं उस नये प्रेम पत्र को पढ़ने लगी…थोड़ी सी भावनाएँ थी तो उसमें लेकिन वह मेरी नहीं थी…शायद किसी और की थी…मेरी मन की कोई भी फीलिंग्स उसमें नहीं थी…मेरे मन की फीलिंग्स के लिए वहाँ कुछ भी नहीं था…आज हमारा मिलना नहीं था तो प्रेम पत्र लिखना ही था…फिर से प्रॉम्प्ट चेंज कर दिया…फिर से नया प्रेम पत्र मेरे सामने था लेकिन वह मेरे प्रेमी के लिए नहीं था…क्योंकि मज़मून से नज़र आ रहा था की उसे मैंने न लिखकर किसी और ने लिखा हैं…प्रेमी तो मुझे जानते थे…प्रेमी तो मेरे मन की एक एक फीलिंग्स जानते थे…वह तो झटके से जान लेगा की यह किसी और के लिए किसी और ने लिखा हुआ प्रेम पत्र हैं…यह तो ऐसा होगा की प्रेमी का ना तो प्रेम पत्र पर और ना ही लिखने वाली प्रेमिका पर कोई अधिकार नहीं होगा…
क्या करूँ?
ये सारे प्रेम पत्र मेरे किसी काम के नहीं हैं…अब चैट जीपीटी वाले प्रेम पत्र को डिलीट ही करना होगा…डिजिटल एरा से एनालॉग सलूशन का सहारा लिया…काग़ज़ कलम लेकर मैं प्रेम पत्र लिखने बैठ गयी…मेरी सारी भावनाएँ कैसे कुलाँचे मारने लगी…जैसे सारी फीलिंग्स काग़ज़ पर उतारने लगी…मुझे तुमसे इश्क़ हैं…मोहब्बत हैं… और भी न जाने क्या…मेरी सारी भावनाएँ उँडेलने लगी…
फूल तुम्हें भेजा हैं ख़त में…फूल नहीं मेरा दिल हैं…प्रियतम मेरे…इस गाने में पिरोयी गई मन की फीलिंग्स आसानी से कन्वे कर देगी…ये चैट जीपीटी का क्या?इसके पास जो मेरी फीलिंग्स मेरे प्रियतम के लिए हैं वह कहाँ से होगी भला? इसी मदहोशी में गुलाबी लिफ़ाफ़े में प्रेम पत्र को मैंने पोस्ट कर दिया…ख़यालों में मैं प्रेमी के पास पहुँच गयी… प्रेम पत्र अपनी स्पीड से मिलेगा तब मिलेगा…
