चोरी
चोरी
अख़बार में ख़बर थी की मंदिर से भगवान की मूर्ति चोरी हो गयी…
एक पाठक भगवान की चोरी की ख़बर से अचरज़ से भर उठा…
ख़बर थी ही हैरानकुल…
उसके मन में अनेक सवाल आने लगे…
क्यों?
कैसे?
कहाँ?
कब?
कौन?
ख़बर में आगे राजधानी के एक बड़े मंदिर से रात के अंधेरे में चोरी का ज़िक्र था…
चोर कौन होगा? वह सोचने लगा…
चोर क्या पुजारी होगा?
अरे, नहीं…वह तो बेहद पवित्र होते हैं…
चोर कोई मुस्लिम नहीं हो सकता क्योंकि वे बुत परस्त नहीं होते…
चोर सिख तो कदापि नहीं होगा क्योंकि वे गुरु ग्रंथ साहब को मानते हैं…
चोर कोई ईसाई भी नहीं हो सकता क्योंकि वे सलीब पर लटके येसु को मानते हैं…
और दलित तो बिल्कुल नही होगा क्योंकि उनके स्पर्श मात्र से भगवान अपवित्र हो जाते हैं...
फिर कौन?
वह परेशान हो गया क्योंकि उसका भगवान चोरी हो गया था…
भगवान की चोरी तो हाई प्रोफ़ाइल केस हैं…
उसे विश्वास था की ज़रूर इस केस की जाँच पुलिस, ईडी, सीबीआई और ज्यूडिशियरी करेगी…
पाठक को पता हैं की सरकार के पास सारी संस्थाएँ हैं…
लेकिन बिना रिश्वत के कैसे ढूँढा जाएगा?
और भगवान तो मज़लूमों का होता हैं उसका किसी वीआईपी या नौकरशाह से विशेष रिश्ता भी नहीं हैं…
कहाँ ढूँढे फिर भगवान को?
कैसे ढूँढा जाये फिर भगवान को?
पाठक परेशान था क्योंकि अब भगवान ही मालिक हैं यह भी वह बोल नहीं सकता था…
वह सोचने लगा की अब जाये तो कहाँ जाये…
व्याकुल मन से किसके पास जाये? अब तो भगवान भी नहीं हैं…
अनमनेपन से आगे पढ़ते हुए उसे अचानक अख़बार में ईडी के छापे की ख़बर दिखी…
अब उसे बिश्वास हो गया की उसके भगवान तो अब ज़रूर मिलेंगे…
ईडी कहीं भी छापा मारकर चोर को गिरफ़्तार कर भगवान की मूर्ति को बरामद भी करेगी…
पाठक के फ़ोन की घंटी बजी…
बॉस का फ़ोन था…
अचानक आए फ़ोन से पाठक झट से अख़बार बंद कर फ़ोन में बिजी हो गया…
बॉस के ऑर्डर से अर्जेंट काम के लिए उसे ऑफिस जल्दी जाना होगा…
पाठक ऑफिस जाने की तैयारी में लग गया…
ख़बरे तो छपती रहती हैं…
अख़बारों का काम ही हैं ख़बरें छापना…
आज की ख़बरें हो गयी…
कल फिर अख़बार में नयी ख़बरें होगी…
ईडी ने भगवान की मूर्ति को छापा मारकर बरामद कर लिया…
भगवान वापस आयेंगे…
श्री राम की तरह मंदिर में पुनः विराजमान होगी…अपनी सारी शक्तियों के साथ…
