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Bhawna Kukreti

Abstract


4.5  

Bhawna Kukreti

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फिर मिलेंगे...

फिर मिलेंगे...

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18/06/2021

डायरी से~


"आज जाने क्यों इक उम्मीद हुई, 

 जाने क्यों फिर दिल उदास हुआ ।" 


नया अतीत ...(नया ..जो बीत चुका है , ऐसा नही लगता ) बेहद शातिर होता है।अक्सर काफी समय तक , समय के साथ मिल कर परछाईं सा चलता है। हम किसी मोड़ पर उसे एक खूबसूरत विदाई देना चाहें तो भी वह अचानक से किसी प्रतीक , धुन, नाम ,महक ,रास्ते और भी न जाने किन किन रूपों में अचानक से धप्पा लगा कर बोलता है " फिर पकड़ लिया न!'। और आप , उसके हाथों में उसे खुद को थामे ...उसे देखते रह जाते है। उस एक तीव्र अनुभूति के पल में ...सम्पूर्ण अस्तित्व में कभी बहुत खुशी , कभी नाराजगी , कभी बेचारगी सी भी महसूस होती है...वाकई बहुत से लोग ऐसा ही महसूस करते है। 

 "अतीत ,महसूस ही तो होता है... सिर्फ महसूस ही हो सकता है! " 

ये लाइन ...दिमाग, तपाक से दिल के आगे रख देता है। दिल सोचता रह जाता है , काश कुछ बाते , लम्हे, लोग वगैरह जिंदगी में बरक़तों जैसे हमेशा साथ रहते! लेकिन वक्त के चलते कब ऐसा कुछ कर पाते है कि ..ऐसा "एक" अहसान खुद पर कर पाये। 

बहरहाल , मर्करी रेट्रोगेड कर रहा है तभी दिलो दिमाग मे ये उथलपुथल मची है। वाकई इस दौरान ही ये सख्त दिल, बेचैन हो अतीत को सुनना देखना उससे बातें करना चाहता है। 

"इंतज़ार...इंतज़ार करो इस दौर के बीतने का।"

हहहहह ...दिमाग ने फिर दिल को काबिज़ कर लिया है।अब वह जरिये दिखाने लगा है.. दिलचस्प मशरूफियतों के।

सो ,डियर अतीत...सच यही है ...हो तो नहीं पर महसूस हर बार होते हो, होते रहोगे...शायद तुमसे फिर मिलेंगे..हकीकत में न सही शब्दों में सही !!




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