Radha Shrotriya

Romance Fantasy Thriller


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Radha Shrotriya

Romance Fantasy Thriller


नील उपन्यास

नील उपन्यास

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नील उपन्यास भाग ५५ से ६०

आ ज़रा पास...तेरे माथे पर

अपने होठों से इक दुआ लिख दूँ

_ज़ुबैर अली ताबिश

                

"नलिनी की आँखों में सुबह का उजाला महकता। हँसती तो तितलियां उड़ना भूलकर उसे हँसते हुए देखती। चिड़ियों के झुंड उसे खेलते हुए देख उड़ान भूल कर पेड़ो पे लौट आते। किलकारी मार कर जब वो हँसती तो लगता कोयल कूक रही है।"

किस्मत के हाथों छली गयी इस नन्ही सी जान से दुआ खुद दुआ माँगती।

अपने आने वाले कल से बेखबर सुकून की नींद में सो रही थी नलिनी।

उसे सोते देख दादी ने पूरे घर का जायजा लिया। अगर कभी नलिनी को अकेले छोड़ना पड़ा। नहीं नहीं। ये तो मैं सपने में भी नहीं सोच सकती।

अगर इस बिन माँ की बच्ची को मैं थोड़ी सी भी खुशी दे पाऊँ और इसकी सही परवरिश कर लूँ तो मेरा जीवन धन्य हो जाएगा।

रेवती को घर पर मेरे रहने न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला।

दादी रसोई घर में गईं उन्हें सुबह जल्दी उठ कर चाय पीने की आदत थी मनसा काकी अभी उठी नहीं थी दादी ने गैस पर चाय चढ़ा दी तब ही पंडित जी के खांसने की आवाज़ सुनकर दादी ने उनसे भी चाय का पूछ लिया और दो कप चाय लेकर वो बाहर हॉल में आ गई।

आओ पंडितजी चाय पीओ।

पंडित जी : जय श्री कृष्णा माँ साब

दादी : जय श्री कृष्णा।

और बताओ यहाँ की आपकी दिनचर्या के बारे में।

पंडित जी : माँ साब सुबह की दिनचर्या से फुर्सत होकर गोविंद जी के मंदिर जाता हूँ दिन के 12 बजे के बाद वहाँ से वापिस लौटना होता है। कभी रास्ते में कोई जजमान मिल जाए तो बातचीत में वक़्त लग जाता है तो कभी-कभी घर आने में देरी भी हो जाती है।

अभी तक शादी नहीं की आपने?

जी माँ साब बात तो चली शादी की एक लड़की पसंद भी आई पर उसके हिसाब का लड़का मैं नहीं था बात ख़त्म हो गई।

गाँव में माँ, बापू शादी के बहुत पीछे पड़े हैं गाँव में लड़कियाँ भी है पर ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है।

इस तरह शादी करने से क्या फायदा गाँव में रहकर खेती किसानी कर आराम की जिंदगी में जीना नही चाहता यहाँ मंदिर की पूजा पाठ के साथ अपनी पढ़ाई कर रहा हूं।

दादी : ये तो बहुत अच्छी बात है क्या पढ़ रहे हो..?

पंडित जी : बी कॉम फाइनल में हूँ आपका आशीर्वाद रहा तो आगे भी अपनी पढ़ाई पूरी कर लूँगा।

दादी : घर पर कौन कौन है..?

माँ, बापू, दो छोटे भाई हैं।

कॉलेज कैसे जाते हो..?

मंदिर से आने के बाद। कभी कभी क्लास देरी की वजह से छूट भी जाती है पर वो मैं मेनेज कर लेता हूँ।

रामकिशन ने नलिनी की जिम्मेदारी तुम्हें सौंपी है कैसे ख़्याल रख पाओगे उसका?

अभी तो बहुत छोटी है वो।

तुम्ही ने तो हमें दी है ये परी जैसी बिटिया।

पर ये भी किस्मत की बात है रेवती कब से बच्चे के लिए परेशान थी इस बच्ची के पैर पड़ते ही गोद हरी हो गई उसकी पर किस्मत की फूटी है रेवती इस मासूम को वो अपना नहीं पायी और उसके बुरे स्वभाव के कारण ही रामकिशन ने इसे आपके साथ यहाँ रखने का फैसला किया आपसे ज्यादा अच्छे से इसका ख़्याल कोई और नहीं रख सकता।

इसलिए इसकी माँ मंदिर की चौखट पर इसे छोड़ गयी इसमें भी ईश्वर की कोई मर्जी होगी।

पंडित जी : जी माँ साब

अपनी जिम्मेदारी का एहसास है मुझे।

अगर रामकिशन भाई साब के बच्चे के जन्म लेते ही चल बसने की खबर मुझे पता नहीं चलती तो मैंने सोच लिया था कि इसकी परवरिश मैं ही करूँगा।

और मैं तो गोविंद जी का सेवक हूँ जो वो आज्ञा देते हैं मैं उनके आदेश का पालन करता हूँ।   

उनकी मर्जी यही रही होगी इसलिए नलिनी बिटिया मेरे पास आ गईं।  

अपनी पढ़ाई में घर रह कर भी कर सकता हूँ।

मंदिर की पूजा के लिए गाँव के परिचित हैं उन्हें बोल दिया है।

दो तीन दिन में वो मंदिर की जिम्मेदारी संभाल लेंगे।            

 फिर तो मेरा सारा टाइम अपनी बिट्टो के साथ गुज़रेगा, शाम को पार्क में घुमाने ले जाया करूँगा उसे खूब खुश होगी अपने जैसे बच्चों को देख कर।                    

माँ साब अभी चलता हूँ आज्ञा दीजिए। 

पंडित जी से बात कर दादी का मन शांत हुआ। ।

नलिनी :सो कर उठ गई थी बदला हुआ घर नए लोग। एक दादी का चेहरा ही पहचाना हुआ था वो चुपचाप बिस्तर पर ही बैठी रही।

दादी ने मनसा को आवाज़ लगाई।

मनसा: जी माँ सा। 

दादी : नलिनी को ब्रश करवा दो उसके बाद पीने के लिए पानी और दूध गरम कर बोर्नबीटा मिलाना और पानी के बर्तन में गिलास रख कुनकुना दूध लाना और नलिनी का रोज सुबह का यही रूटीन रहेगा।       

मनसा : जी माँ सा।       

चलो बिटिया रानी ब्रश कर लो।

मनसा ने स्लीपर निकाल कर नलिनी के पैर में पहनाई और उसकी उँगली पकड़ बाथ रूम में ले गई।

नलिनी : दादी के पास..

मनसा : क्या हुआ बिटिया ?

नलिनी : सूसू जाना है।     

मनसा : उसका पजामा उतार देती है जाओ बिटिया।

नलिनी :रोने लगती है.. दादी।

मनसा : दादी को बुलाती है।

माँ सा बिटिया रो रहीं हैं उन्हे सूसू आ रही थी पजामा उतार दिया पर वो रोने लगी।

दादी : उसे पॉटी जाना होगा।

दादी के अलावा किसी और के साथ नहीं जाती पॉटी।

दादी : क्यूँ रो रही है बिट्टो ?

नलिनी : दादी पॉटी जाना है।

दादी :"आजा बिटिया दादी ले चलेगी

दादी मुँह हाथ धुला कर उसे दूध का गिलास पकड़वाती हैं..

चलो जल्दी से गट गट कर के पी जाओ..

दादी की रानी बेटी फ़र्स्ट आएगी मैं काउंटिंग करती हूँ टेन तक आराम से पीना दूध। दादी: वन, टू, थ्री, फोर, फाइव, सिक्स, सेवेन

नलिनी : दादी फिनीश कर दिया देखो 

दादी : अरे वाह.. गुड गर्ल  

मनसा चलो जल्दी से ताली बजाओ बिटिया के लिए।

मनसा : अरे वाह। बिटिया ने दादी को हरा दिया। जुग जुग जिओ.. जल्दी_जल्दी बड़ी हो जाओ।        

दादी : मनसा नाश्ते में क्या बनाओगी..?

मनसा : माँ सा आप जो बोलें।

दादी : नलिनी पोहा, इडली खाती है आज क्या बन पाएगा।

मनसा : माँ सा आज पोहा बना देती हूँ। कल इडली बन जाएगी।

दादी : "ठीक है..

नाश्ते के आधा घंटे बाद जूस देना रहता है हर दिन वक़्त पर।

खाना एक बजे तक, चार बजे फ्रूट्स और रसोई में एक डब्बे में खुरमे रखे हुए हैं वो तीन चार निकाल कर एक कटोरी में रख कर देना ये खेलते खेलते खा लेती है..

रात का खाना आठ बजे तैयार कर लेना वेजीटेबल खिचड़ी या दलिया साथ में सूप अब से ये टाइम कब क्या बनना है तुम ध्यान रखना अब दोबारा नहीं बताऊँगी मैं।

मनसा : जी.. याद रहेगा माँ सा आप निश्चिंत रहें। 

बिटिया का पूरा ध्यान रखूंगी में आप अपना पूजा पाठ कर आराम करें।         

दादी : मेरी तरफ से निश्चिंत थीं। इंसान की पहचान थी उन्हें और उम्र का तजुर्बा भी।               

दो दिन बाद पंडित जी घर पर ही रहने लगे। उनके साथ नलिनी खूब खेलती। शाम को पार्क में बच्चों को बॉल खेलते देख ताली बजा कर अपनी खुशी जाहिर करती।

पंडित जी ने उसके लिए भी रबर की बड़ी बॉल ला दी अब वो भी अपनी बाल के पीछे दौड़ती पंडित जी उसके साथ खेलते।

दिन निकलते जा रहे थे नलिनी का स्कूल में दाखिला करवा दिया । 

स्कूल कॉलोनी में ही था अब हर दिन एक नया अनुभव लिए होता अब वो अपनी बात के लिए ज़िद करना सीख रही थी।

कार्टून फिल्म देखना उसे बहुत अच्छा लगता अगर कोई टी वी बंद कर देता तो रो रोकर घर सर पर उठा लेती।          

इन दिनों में रेवती ने कभी उसके बारे में नहीं पूछा.. उसके बेटे का नाम दीपक रखा गया वो भी स्कूल जाने लगा था।              

दादी की लाडली नलिनी का आज जन्मदिन था।

समय कैसे निकला पता ही नहीं चला

नलिनी आज दस साल की हो गई थी।

दूध सा उजला रंग, अच्छी कद काठी भरा पूरा शरीर अपनी उम्र से दो तीन साल बड़ी ही दिखती।

 रामकिशन जी : उसके लिए व्हाइट कलर की फ्राक लाए उससे मेचिंग के सेंडल उसे पहनकर परी जैसी लग रही थी।

दादी ढेरों आशीष अपनी पोती को दे रही थीं उनका बस चलता तो सबसे छुपाकर रख लेती उसे।

अंदर ही अंदर चिंतित थी उसके लिए। उसकी माँ होती तो और बात थी मैं बूढ़ी आज के जमाने के चाल चलन से अंजान हूँ एक डर सा उनके मन में गहरे बैठता जा रहा था।

और रह रह कर रेवती पर उन्हें गुस्सा आता।

शाम को नलिनी के सभी दोस्त आए रामकिशन जी ने शानदार बर्थडे पार्टी का इंतज़ाम किया था।

बच्चों ने खूब डांस किया और अपने अपने पसंद का खाना भी इंजॉय किया।

सब दोस्तों को रिटर्न गिफ्टस दे कर नलिनी उन्हें बाहर तक छोड़ कर आई।

आकर रामकिशन जी से लिपट कर उन्हें थैंक यू बोला और अपने रूम में जाकर गिफ्टस देखने लगी।

 दादी, पंडितजी, और राम किशन जी उसकी खुशी में खुश थे पर चिंतित भी उसके चेहरे पर नज़र पड़े तो एक पल के लिए पलक झपकना भूल जाएं घर के लोग तो ठीक है पर बाहर किसकी निगाह कैसी हो रामकिशन जी ने पंडित जी से बोला अब से नलिनी को कहीं भी जाना हो तो उसे लेने छोड़ने आप जाएँ। 

स्कूल ट्यूशन के अलावा और कहीं जाने की कहे तो पूरी जानकारी ले कर ही वहाँ छोड़ना नहीं सही लगे तो मना कर दें नहीं माने तो फोन पर बात करवा दें।


नील उपन्यास भाग ५६

नलीनी की खुशी का ठिकाना नहीं था अपना कमरा बंद कर खुद को आईने में देख मुस्कुरा रही थी.. व्हाइट फ्राक उसे बहुत पसंद थी..

उसकी बार्बी डॉल पिंक ड्रेस में होती तो वो दादी से बोल कर व्हाइट फ्राक सिलवा लेती..

एक भी दाग उसे पसंद नहीं आता था इसलिए दादी ने ढेर सारी व्हाइट फ्राक उसकी गुड़िया के लिए सिल कर रख दी थी। 

नलीनी अब फिफ्थ क्लास में आ गई थी।

पढ़ने में होशियार थी क्लास में हमेशा अव्वल रहती, पढ़ाई के साथ साथ स्कूल में होने वाली गतिविधियों में एक्टिवली पार्टिसिपेट करती।

उसकी सफलता देख रामकिशन जी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता।

पर अपने मन की बात वो किसी से जाहिर नहीं करते थे पर दादी समझ जाती थीं।                       

 रेवती ने अपने बेटे दीपक को सर चढ़ा रखा था। उसके लाड़ प्यार ने उसे जिद्दी और बदतमीज बना दिया।

पढ़ाई के नाम से ही उसे रोना आता घर पर जो ट्यूशन टीचर आता उसको इतना परेशान करता की वो 15 दिन से ज्यादा नहीं टिक पाता।

रामकिशन जी डांटते तो रेवती बीच में आ जाती छोड़ो जी बच्चा है पढ़ लेगा।  

पंडित जी ने एम। कॉम कर लिया था साथ में पार्ट टाइम जॉब कर रहे थे, दो दिन पहले ही बैंक से उनका अपोइंटमेंट लैटर आ गया।

एक हफ्ते के अंदर ही उन्हें जॉइनिंग करनी थी उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें, नलीनी के पास कौन रहेगा दादी जी भी बुजुर्ग हैं जब दादी और रामकिशन जी से उसने बात की तो उन्होने उसे नौकरी जॉइन करने के लिए कहा।  उसके रिश्ते का भाई जो उसकी जगह मंदिर का पूजा पाठ संभाल रहा था उसे उसने नलीनी की जिम्मेदारी सौंपी इसके लिए उसने रामकिशन जी और दादी से परमीशन ली थी।

और वो लोग भी हीरा को अच्छे से जानते थे घर पर वो अक्सर आता रहता था, नलीनी उसके साथ खूब खेलती थी।

पंडितजी को दो दिन बाद जाना था इस वजह से उन्होंने हीरा को आज ही बूला लिया था,

ताकि उसे सब कुछ समझा सके।

हीरा 12 वी क्लास में पढ़ रहा था और मंदिर की पूजा संभालता था।

पर अब मंदिर की पूजा उसने किसी और पुजारी को सौप दी।       

हीरा की तो मानो मुँह मांगी मुराद पूरी हो गई जैसे.. वो जब भी यहाँ आता तो वापिस जाने का उसका दिल ही नहीं करता था।

अब से नलीनी को स्कूल छोड़ने जाना और छुट्टी में घर लाना।

शाम को ट्यूशन क्लास ले जाना और लाना ये सब हीरा की जिम्मेदारी थी।

साथ ही घर के छोटे मोटे जो भी काम हो वो सब देखना।          

हीरा काम करने में फुर्तीला था उसे एक बार किसी भी काम के लिए बोलने के बाद दोबारा कहने की जरूरत नहीं पड़ती थी।

पंडित जी का जाने वक़्त आ गया था।

मैं अपने कमरे में छुप कर रो रही थी उन्हे मैं नहीं दिखी तो वो ऊपर कमरे में आए आवाज़ दी पर मैं कुछ नहीं बोली..

पंडित जी बोले : बिटिया अपने अंकल को बाय भी नहीं करोगी और ये क्या मेरी बहादुर बिटिया रो क्यूँ रही है.. मैं तो तुझे भी वहीं बुला लूँगा जरा मामला सेट हो जाने दे.. हंस दे जल्दी नहीं तो मैं जा नहीं पाऊंगा।

नलीनी पंडित जी से लिपट कर रोने लगी उनका भी मन भर आया। फूल सी थी जब पहली बार गोद में उठाई थी नौकरी की मजबूरी नहीं होती तो कभी नहीं छोड़ कर जाते अपनी गुड़िया को।  

उन्होंने उसके सर पर हाथ फेरते हुए कहा अपना और दादी का ध्यान रखना अब बड़ी हो रही हो बिटिया किसी पर भी भरोसा न करना दरवाज़े को बंद रखना कहीं जाना हो तो हीरा को लेकर जाना फिर भी कोई भी बात हो मुझे किसी भी समय फोन कर लेना समझी तेरा अंकल आ जाएगा।

नलीनी : आप भी अपना ध्यान रखना आपकी बहुत याद आयेगी, नलीनी दरवाज़े तक छोड़ती है उन्हें। पंडित जी के जाने से एक खाली पन आ जाता है उसकी जिंदगी में।

कुछ दिन वो चुप चुप सी रही, स्कूल से आकर अपने कमरे में ही रहती हँसती बोलती भी नहीं। घर बे रौनक सा लग रहा था।      

दादी समझ रही थी पर उन्हे लगता था कि एक दो दिन उसे अपने साथ बिता लेने देना चाहिए जिससे उसका मन हल्का हो जाएगा।              

आज इतवार का दिन था नलीनी की स्कूल ट्यूशन की छुट्टी थी। नलीनी इतवार को देर से उठती थी।दादी नहाकर पूजा करने लगी.. नलीनी की नींद खुली तो वो हड़बड़ाकर उठी घड़ी में 9 बज रहे थे जल्दी से ब्रश कर नहा धोकर तैयार हो नीचे आयी।

दादी: बिटिया आज इतवार है कहाँ जा रही हो।    

नलीनी : दादी सॉरी कल आपको बोलना भूल गयी आज ट्यूशन है एक चेप्टर पूरा करवाएंगे सर।

और उसके बाद टेस्ट है 10 से एक बजे तक क्लास है। और अब हर इतवार को होगी      

दादी : ठीक है बिटिया नाश्ता कर लो और ऐपल रख लेना साथ में।

नलीनी : मनसा काकी जल्दी से नाश्ता दो।   

मनसा काकी : लो बिटिया गरमा गरम पनीर के परांठे तुम्हें पसंद है ना।      

नलीनी : आप मेरे लिए पनीर की स्टफिंग रख देना जब मैं आऊँगी तब गरम बना देना।     

मनसा काकी : ठीक है बिटिया। 

दादी : हीरा छोड़ के आओ नलीनी को।   

हीरा : जी दादी माँ                 

नलीनी : बाय दादी, दादी हाथ हिलाकर बाय करती हैं।                                    

हीरा नलीनी को उसकी क्लास के बाहर छोड़ कर आ जाता है..

नलीनी :नमस्ते सर, नमस्ते बैठो अपनी अपनी

नोट बुक निकालो सभी बच्चे।

सभी अपनी नोट बुक निकाल लेते हैं और लिखना शुरू करते हैं।

सर पढ़ाते वक़्त समझाते जा रहे थे।  

तभी जोर से कुछ गिरने की आवाज़ के साथ एक बच्चे की चिल्लाने की आवाज़ आई  सर अंदर कमरे की तरफ दौड़े उनके बेटा का पानी पर पैर फिसलने से गिरा हाथ में कप था वो गिरकर टूट गया और उसका पैना कोना बच्चे के माथे पर लग गया वो अपनी पत्नी के साथ उसे डॉक्टर के पास ले गए और बच्चों को कहा एक बार फिर से रिविजन कर लें।       

सर के जाते ही बच्चों को मौका मिल गया सब पढ़ना छोड़ बातों में लग गए।    

नलीनी चुपचाप बैठी सबको देख रही थी।    

निधि उसके पास आकर बैठ गई बोली तेरी बर्थडे पार्टी बहुत शानदार थी।  

नलीनी : थैंक्यू।             

निधि : आज क्या करेगी दिन में।                          

नलीनी : होम वर्क करके टी वी देखूँगी           

तू क्या करेगी।     

निधि : मैं तो मम्मी पापा के साथ मार्केट जाऊंगी शॉपिंग करने                        

सर को आने में टाइम लगता है और तब तक क्लास खत्म करने का वक़्त हो जाता है।

वो बच्चों की छुट्टी कर देते हैं। 

हीरा : पहले से ही क्लास के बाहर खड़ा था नलीनी को देख कर हाथ हिलाया   

नलीनी : बैग आगे रखने देती है और स्कूटी पर बैठ जाती है।

हीरा गाड़ी तेज चला रहा था जब भी स्पीड ब्रेकर आता नलीनी हीरा से टकरा जाती एक दो बार तो कुछ भी नहीं बोली।

हीरा को नलीनी का टकराना अच्छा लगा उसका मन कर रहा था कि नलीनी उसे कस कर पकड़ ले। अबकी जब स्पीड स्लो की उसने तो नलीनी बोली पंडित अंकल गाड़ी अच्छे से चलाते थे ऐसे कभी नहीं हुआ आप गाड़ी स्लो चलाओ।        

हीरा :ठीक है।

उसे डर भी लगा अगर नलीनी ने दादी से या रामकिशन जी से कहा तो नौकरी चली जाएगी।


नलीनी की लाइफ में आगे क्या हुआ अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है जितना लिख सकती थी क्योंकि किसी की जिंदगी के बारे में लिखना और खासकर बचपन और युवा अवस्था इसमे समय लगता है ये वैसे ही है जैसे घर बनाते वक़्त उसकी नींव भरना उसकी मजबूती पर ही पूरा घर टिका होता है इस तरह ही हर बच्चे के जीवन में उसकी बाल्यावस्था बहुत महत्वपूर्ण होती है हम उसे जैसा सिखाएंगे वो आसानी से सीख जाता है साथ ही जो देखता है वो सारी बातें उसके कोमल मन में बैठ जाती हैं जिन्हे वो कभी नहीं भूलता।

 ऐसा ही युवावस्था का काल होता है जो बच्चे का भविष्य बना भी देता है और हमेशा के लिए बिगाड़ भी देता है। हम लोग घर में रह रहे लोगों (रिश्तेदारों) नौकरों किरायेदारों पर आँख मूँद कर भरोसा कर लेते हैं पर इसका खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है उनका जीवन जहन्नुम बन जाता है चाइल्ड अबयूज के कई केस देखने में आते हैं इसमें जो दोषी पाए जाने वाले करीबी रिश्तेदार नौकर, किराएदार, पड़ोसी ही पाए जाते हैं अगर आपके घर में बच्ची है तो किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए नादानी में उठाए गए कदम आने वाले जीवन को नर्क बना देते हैं डर के चलते बच्ची कुछ बोल नहीं पाती और इस नर्क में धंसती ही जाती है। बेहतर होगा माँ पिता अपने युवा होते बच्चों से बात करें उन्हें विश्वास दिलाएं कि हर स्थिति में वो अपने बच्चों के साथ हैं अगर उनसे कुछ गलत भी हुआ है तो उसे रोका जा सकता है नहीं तो बाद में इसके परिणाम बच्चों के साथ माँ पिता को भी भुगतना पड़ते हैं उन्हें सेक्स संबंधित जानकारी माँ बेटी को और पिता अपने युवा होते बेटों को दें तो वो बच्चों के साथ होने वाली घरेलू यौन हिंसा से उन्हे बचा सकते हैं।                     

 इस कहानी का किसी भी व्यक्ति से कोई लेना देना नहीं है ये एक काल्पनिक कहानी है इसमें समाज की बुराइयों को दूर करने करने और उससे किस तरह से हम बच सकते हैं ये बताने का प्रयास किया गया है चूंकि इस भाग में नलीनी टीन एज में है और हीरा भी युवा है इस उम्र में लड़के लड़कियों का एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना स्वाभाविक है पर ये आकर्षण गुनाह में न बदल जाए इस दिशा में ध्यान देना पैरेंट्स का कर्तव्य है।


नील भाग ५७


घर आकर नलीनी ने दादी को आवाज लगाई.. दादी.. दादी..

दादी : क्या हुआ बिट्टो सब ठीक तो है..?

नलीनी : पता है दादी आज ट्यूशन क्लास में क्या हुआ।

दादी : क्या हुआ बिटिया..?

नलीनी : हमारे सर का बेटा पानी पे पाँव फिसलने की वजह से गिर गया और उसके हाथ से कप गिर गया और उसका काँच उसको चुभ गया बहुत खून निकला सर उसे डॉक्टर के पास ले गए तुरंत..

दादी : ओह। अब कैसा है..?

नलीनी : पता नहीं चल पाया दादी सर से पूछने की हिम्मत नहीं हुई वो परेशान लग रहे थे, घर आकर सर ने सब बच्चों की छुट्टी कर दी।

उन्हें हॉस्पिटल में ज्यादा वक़्त लग गया था।

दादी : कोई बात नहीं बेटा.. तू परेशान न हो।

दादी मनसा काकी को आवाज लगाती हैं..

मनसा : जी माँ सा

दादी : बिट्टो के लिए खुरमे और बनाना शेक ले आओ

मनसा : जी.. अभी लाई

नलीनी : दादी अभी मन नहीं है..

दादी : अच्छे बच्चे जिद नहीं करते, पढ़ लिख कर दादी का नाम रोशन करने है ना..?

नलीनी :दादी से लिपट जाती है। दादी उसके सर पर प्यार से सहलाती है।

मनसा : लो बिटिया.. बनाना शेक पीते हुए काकी आप वर्ल्ड का बेस्ट बनाना शेक बनाती हैं।

मैं जब पढ़ने बाहर जाऊँगी तो आपको भी अपने साथ ले जाऊँगी।

मनसा : बिटिया तुम्हें छोड़कर तुम्हारी काकी कहाँ जाएगी..जबसे तुम आई हो तुम्हारे काका के पास तक नहीं जाती मैं।

वो खुद ही रविवार को आ जाते हैं मुझे मिलने।

नलीनी : दादी मैं अपने कमरे में जा रही हूँ। ठीक है बिटिया। हीरा कहाँ है..?

दादी : पता नहीं बिटिया तुझे लेकर आया था। यहीं कही होगा या पढ़ रहा होगा पढ़ने में तेज है वो।

नलीनी : दादी मुझे कैरम खेलना है।

आप मुझे मेरे किसी दोस्त के घर जाने नहीं देती हैं।

मैं अकेले बोर हो जाती हूँ।

आप हीरा को भेज दो मेरे साथ खेलने के लिए।

दादी : तू जाकर कपड़े बदल मैं उसे भेजती हूँ।

नलीनी : ठीक है मेरी प्यारी दादी। खुश होकर नलीनी दादी को किस करती है ।

दादी : हीरा को आवाज लगाती हैं । हीरा..

हीरा : जी दादी माँ।

दादी : हीरा तुम नलीनी बिटिया के कमरे में चले जाओ उसके साथ कैरम खेल लो।

वो अकेले बोर होती है।

सोचती हूँ कि उसकी एक दो दोस्तो को बुला लिया करूँ घर पर।

पर वही बात है कि उन्हें यहाँ बुलाऊंगी तो नलीनी को भी उनके घर भेजना पड़ेगा और आज की दुनिया के हिसाब से नलीनी बहुत भोली है।

यही सोच कर रह जाती हूँ।

हीरा : आप सही कह रही हैं दादी माँ।

आप परेशान न हो मैं नलीनी के साथ खेल लिया करूंगा।

और आप कहें तो शाम को मैं नलीनी को पार्क में ले जाया करूंगा, वहाँ बेडमिंटन खेल लेगी। इससे उनका मन लग जाएगा.. और फिटनेस भी बनी रहेगी।

दिन भर वो घर में रहती हैं।

उनके साथ के दोस्त अपने परिवार के साथ बाहर आउटिंग के लिए जाते हैं।

अब नलीनी बड़ी हो रही है उसका मन भी होता होगा।

कल जब मैं उसकी कोचिंग क्लास के बाहर उसे लेने के लिए गया था तब मैंने सुना था,

उसकी सहेली ने पूछा तू घर पर क्या करेगी.. नलीनी बोली होम वर्क कर टी वी देखूँगी और तू क्या करेगी नलीनी ने पूछा..?

वो बोली पैरेंट्स के साथ शॉपिंग के लिए जाऊँगी।

इसलिए आज नलीनी को पहली बार महसूस हुआ कि काश उसके भी माँ पिता होते तो वो भी उनके साथ बाहर घूमने जाती।

वो घर पर अकेले बोर होती है कोई उसके साथ खेलने के लिए नहीं है।            

दादी : हीरा तू जा नहीं तो बुरा मान कर मुँह फूला कर बैठ जाएगी।

हीरा : जाता हूँ दादी माँ।

"अंधा क्या चाहे, दो आँखें"

और दादी ने बिना मांगे ही सब दे दिया हीरा को। उसने अपनी खुशी दादी के सामने जाहिर नहीं की।

बोला बस आख़िरी आंसर लिख रहा था।

उसे पूरा कर नलीनी के साथ खेलूंगा जब तक उसका खेलने का मन होगा तब तक।

आप आराम करिए।

दादी : खुश रहो बेटा।

हीरा का तो बस नहीं चल रहा था नहीं तो वो उड़कर नलीनी के पास पहुंच जाता।         

उसे कोई आंसर नहीं लिखना था।

उसे पता था कि इस समय मनसा काकी नीचे ही रहती हैं।

रामकिशन जी ने उनसे बोल के रखा हुआ था की माँ को दिन में अकेला नहीं छोड़ना। वो जब तक सोती हैं मनसा काकी भी आराम कर लेती हैं।

अगर कोई आए जाए तो मनसा काकी देख लेती हैं।

इससे दादी के आराम में खलल नहीं पड़ता।

हीरा सीधा नलिनी के कमरे में जाता है।

और जो वो देखता है उसे देख कर उसके होश उड़ जाते हैं।

नलीनी के कमरे का दरवाज़ा हल्का सा खुला हुआ था । शायद उसे लगा होगा कि बंद हो गया है।

वो बाथरूम से बाहर निकल कर आयी और बाथरोब उतार कर साइड टेबल पर रख दिया।

आईने में खुद को देखकर नलीनी हैरान रह गयी।

इससे पहले उसने खुद को बिना कपड़ों के कभी आईने में नहीं देखा था।          

अपने शरीर को छूकर देखना उसे अच्छा लग रहा था।

उसने ड्रार से एक नेपकिन निकाला और हल्के हाथों से अपने चेहरे को पोंछा, उसके बाद अपने स्तनों को नीचे से पोंछा पानी की बूँदे उसके स्तनों के आस पास मोती सी ठहर गई थी।

स्पर्श करने पर उसके बदन में अलग सा रोमांच हो रहा था।

ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ था।

नहा कर अपना बदन रोज ही पोंछती है वो।

उसने नेपकीन रख अपने हाथों से उन्हे छुआ तो उनमें और कसाव आ गया निप्पल और उभर कर कठोर हो गए यूँ भी तीन चार दिन से उसे स्तनों में दर्द और भारीपन सा महसूस हो रहा था।

उसने सोचा शायद पीरियड शुरू होने वाले होंगे निधि को तो दो बार पीरियडस आ भी गए हैं।

उसने बताया भी था कि छूने पर उसकी छाती में दर्द हो रहा है।

पीरियड होने के बाद उसका दर्द ठीक हो गया था।

अपने हाथों से जब उसने अपने स्तनों को सहलाया तो उसके बदन में एक सनसनी सी दौड़ गई।

पहले तो उसे समझ में नहीं आया कि हो क्या रहा है।

पर उसे अच्छा लग रहा था।

अपने शरीर से प्यार होने लगा था उसे।

एक बार आँख भर कर काँच में खुद को देखा।

बिना कपड़ों के भी इतने खूबसूरत लगते हैं,

ये सोचते हुए उसने बॉडी लोशन हाथ में लेकर पूरे बदन पर लगाया।

वो इस बात से अंजान थी कि उसके अलावा कोई और भी वहां है।

इस वक़्त यहाँ उसके अलावा कोई और नहीं आता था। अगर आता तो दादी के कहने पर। 

काँच में अपने आप को देखते हुए वो शर्मा कर हट गयी इस नज़र से उसने पहले कभी खुद देखा ही नहीं था।

उसका दूध सा गोरा रंग, यौवन की आभा से दमकता हुआ चेहरा, भरे भरे गुलाबी होठ.. लंबे सुनहरे बाल। जो हमेशा चोटी मे बंधे रहते थे आज गीले होने के वजह से खुले हुए हैं ।

बेड पर अपने पैर रख कर उसने उस पर नेल पेंट लगाया निधि ने बर्थडे पर उसे ब्लू नेल पेंट गिफ्ट किया था। जो उसके गोरे पैरों पर खिल रहा था।

लंबी चिकनी सुन्दर टांगे उसे देख कर हीरा अपने होश खो रहा था।

उसके मन में प्रेम का सागर हिलोरें ले रहा था।

"यौवन का पूरा खजाना उसकी आँखों के सामने था।"

पर वो कोई भी ग़लती करना नहीं चाहता था जानता था कि उसकी कुत्ते जैसी गत बनाकर उसे रोड पर फेंक देंगे ये लोग।   

नलीनी से आठ, नौ साल ही बड़ा था हीरा, उसके मन की उमंगे इस समय चरम पर थी।

"नलीनी के लिए उसकी दीवानगी बढ़ती जा रही थी" और ये किसी पर जाहिर भी नहीं कर सकता था।

उसकी उम्र के दोस्त इंग्लिश मूवी देख कर उसको स्टोरी सुनाते थे।

पर हीरा का मन कभी ये सब देखने का नहीं किया।

पर अब वो तो उसकी आँखों के सामने रूप का सागर था जिसमें डूबने का उसका दिल कर रहा था।

"नलीनी ने ओरेंज कलर का टॉप और शॉर्ट्स पहना।" तभी हीरा के हाथ से दरवाज़ा खुल गया..

"नलीनी डर कर चिल्ला पड़ी कौन है..?"

हीरा : मैं हूँ, दादी ने तुम्हारे साथ केरम खेलने के लिए बोला है। 

नलीनी : कब आये तुम..?    

हीरा : बस अभी अभी

नलीनी : अच्छा। 

 हीरा : एक बात बोलूँ नलीनी, बुरा तो नहीं मानोगी।?

नलीनी : हाँ बोलो..       

हीरा : तुम बहुत सुन्दर हो नलीनी, बिल्कुल परी के जैसी।               

नलीनी सच में?                      

हीरा : बिल्कुल सच।

मैंने एक बार सपने में परी देखी थी तुम बिल्कुल उस परी के जैसी दिखती हो।

अच्छा तुम आँख बंद करो कस कर मैं अभी दिखाता हूँ तुम्हें..

नलीनी :ओके। लो कर ली।      

 हीरा दरवाज़े को हल्के हाथों से बंद कर देता है।

और नलीनी की आंखों पर हाथ रख कर उसे काँच के आगे ले गया उसने नलीनी को बहुत नज़दीक से पकड़ा था।

आँख खोलो। 

 नलीनी: देखती है काँच में तो वो खुद है।

"हीरा इसमें कोई परी नहीं झूठ बोला मुझे।"          

हीरा : गॉड प्रमिस और तू बता उसकी भी कसम खा सकता हूं मैं।   

अब देख तो काँच में।  

 नलीनी : देख लिया।    

हीरा :ऐसे नहीं बाबा। मैं जैसे दिखाऊंगा वैसे.. बोल जल्दी, कैरम भी खेलना है दादी डाटेंगी नहीं तो।                             

नलीनी : चल दिखा,

हीरा : पहले बोल तू बीच में कुछ नहीं कहेगी, जो मैं करूँगा रोकेगी नहीं।           

नलीनी : हाँ। नहीं रोकुंगी।  

हीरा : अब मैं तेरी आँखें बंद करूंगा ठीक है?  

नलीनी :हाँ, ठीक है।         

हीरा : नलीनी को गोद में उठा लेता है..

नलीनी : ये क्या कर रहे हो..?    

हीरा : देख नलीनी तुझसे पहले ही पूछा था मैंने?

अब भी मना कर दे अगर बीच में बोलना है तो..

 नलीनी : अच्छा नहीं बोलूंगी बस एक बात बता दे तू क्या कर रहा है..

हीरा : तूने इंग्लिश फिल्म देखी है कभी जिसमें एक प्रिंसेस होती है?         

नलीनी :नहीं देखी।

हीरा :किसी दिन दिखाऊंगा अपने दोस्त से लाकर। पर तू किसी को बताना नहीं।

"अब मैं जो करता हूं देख। तुझे अच्छा लगेगा हम दोनों दोस्त हैं इस गेम में.. ठीक है?        

 नलीनी : ओके.. अब तक नलीनी के मन में भी उत्सुकता जाग उठी थी ये जानने की कि वो परी जैसी है..हीरा बोल रहा है और इंग्लिश फ़िल्म में जो प्रिंसेस है वो कैसी होती है अगर देखना है तो हीरा की बात माननी पड़ेगी।      

हीरा : नलीनी अब गेम शुरू करते हैं.. हीरा नलीनी को गोद में उठा कर आईने के सामने ले आता है और गोद से नीचे उतार कर उसके बाल आगे की ओर कर बिखराता है थोड़े से आगे के बाल उँगली पर लपेट कर रोल करता है और उसके चेहरे के पास खोल देता है और खुद घुटने के बल उसके सामने बैठ जाता है आँख खोलो प्रिंसेस..

नलीनी : खुद को काँच में देखती है।

बहुत ही प्यारी लग रही थी वो और माथे पे बिखरी लट उसकी खूबसूरती में चार चाँद लगा देती है।

उसने ऐसे बाल क्यूँ नहीं बनाए पहले वो सोचती है।      

प्रिंसेस ये महल खास आपके लिए बनाया है आपको पसंद आया।    

नलीनी : हाँ, सुंदर है..?

हीरा : सिर्फ सुन्दर।  बहुत मेहनत से बना है ये महल किसी और प्रिंसेस का इतना सुंदर महल नहीं है..              

नलीनी : बहुत सुन्दर है प्रिंस।        

हीरा : ओ डियर थैंक यू.. नलीनी का हाथ चूम लेता है।

नलीनी : को अजीब लगता है रोकना चाहती है फिर उसे लगता है कि हीरा खेल खत्म कर देगा।         

हीरा : प्रिंसेस आपके हाथ बहुत सॉफ्ट हैं एक बार और चूम लूं आप इजाज़त दें तो..

नलीनी : हाँ, प्रिंस।

हीरा मुस्कुराते हुए उसके हाथ को अपने हाथ में लेकर सहलाते हुए चूमता है।

खड़े होकर उसके बालों की लटों को छूकर कितने ब्यूटीफूल हेयरस हैं तुम्हारे इनकी खुश्बू मुझे दीवाना बना देती है उसके बालों को सूँघते हुए उसके बालों में हाथ फिराता है।

और अपने बहुत पास ले आता है उसे..

उसकी कमर में हाथ डालकर बोलता है दुनिया का हर खूबसूरत लड़का तुम्हारी कमर में हाथ डालकर तुम्हारे साथ डांस करना चाहता है प्रिंसेस।

मैं कितना भागयशाली हूँ कि तुम्हारे साथ खड़ा हूँ।

नलीनी: उसकी बातों के जाल में फँस कर खुद को प्रिंसेस समझने लगती है।    

हीरा : आओ प्रिंसेस मेरे पास आओ। तुम्हें आँख भरकर देखना चाहता हूं ये रात खत्म होने से पहले तुम्हें प्यार करना चाहता हूँ..

बोलो प्रिंसेस तुम मेरा साथ दोगी।       

नलीनी : हाँ, प्रिंस।

हीरा : आओ मेरे साथ इस पल का ही हीरा को इंतजार था वो नलीनी को अपनी बाहों में भरकर उसके होठों को चूमने लगता है।

नलीनी अपने आप में नहीं होती उसे सब सपना सा लगता है वो भी हीरा की बाहों में सिमट जाती है और उसे चूमती है।

तभी हीरा के हाथ का कसाब उसे अपनी छाती पर महसूस होते हैं।

वो दर्द से छटपटा कर जोर से चिल्लाती है।

हीरा क्या कर रहे हो तुम..?

हीरा नादां बनते हुए.. क्या हुआ प्रिंसेस।  

नलीनी : अब ये गेम नहीं खेलना..

हीरा : ठीक है पर खत्म तो करना होगा बीच में नहीं छोड़ते इसलिए मैंने पूछा था तुमसे.. 

नलीनी : ठीक है जल्दी खत्म करो।    

हीरा : प्रिंसेस आज का दिन बहुत सुन्दर था

इस दुनिया की सबसे ज्यादा सुंदर लड़की मेरे साथ है ये दिन में कभी नहीं भूलूंगा अगर जिंदा रहा तो तुम्हें मिलने फिर आऊंगा.. 

आओ डियर तुम्हें इस जादुई महल से बाहर निकाल दूँ अगर किसी ने देख लिया तो तुम हमेशा के लिए यहाँ कैद हो जाओगी नलीनी को गोद में उठा कर उसके होठों को बेतहाशा चूमने लगता है उसकी छाती पे हाथ फेरते हुए तुम बहुत आकर्षक हो डियर ,अजंता की मूरत सा तराशा हुआ बदन है।

तुम्हारा अंग अंग बेपनाह खूबसूरत है मन करता है कि तुम्हारे पूरे बदन को चूम लूं सुबह से रात तक रात से सुबह तक तुम्हें प्यार करूँ..

नलीनी को गोद से उतार देता है।

अब हम महल से बाहर आ गए गेम ओवर।             

कैसा लगा ये गेम तुम्हें। ???

नलीनी : हीरा तुम जाओ मुझे नींद आ रही है।       

 हीरा : ठीक है। पर इस गेम के बारे में तुम किसी को नहीं बताओगी समझी।

हीरा चला जाता है।          

नलीनी : खुद से ये क्या किया तूने नलीनी।

हीरा ने झूठ कहा तुझे । ‌                   

हीरा सही नहीं है।

रास्ते में भी डिवाइडर आने पर वो जान बूझकर ऐसे गाड़ी चला रहा था कि मैं उससे टकराऊँ।                           

"ओह। मैं उसकी बातों के जाल में कैसे फँस गई।"

 "है भगवान मदद करो"        

नलीनी आँख बंद कर सोने की कोशिश करने लगी।       

हीरा : हीरा को कुछ समझ में नहीं आ रहा था जवानी का जोश उसपे सवार था वो नलीनी को पूरी तरह से पा लेना चाहता था।                                    

 उसे लगता था कि वो नलीनी को प्यार करता है पर ये सिर्फ़ शारीरिक आकर्षण था जिसे वो प्यार समझ रहा था।        

हीरा बाथरूम में नहाने के लिए गया और शावर के नीचे खड़ा रहा थोड़ी देर बाद वो बाहर आया और तैयार होकर वो छत पर चला गया जो आज हुआ वो उसे सोच कर हैरान था ।

इस तरह से वो नलीनी के करीब आ जाएगा उसने सोचा भी नहीं था, 

नलीनी की सुंदरता और मासूमियत ने उसे पागल बना दिया था अब उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था..                    

दादी : हीरा..                               

हीरा: हाँ दादी माँ..                       

दादी : कहाँ हो तुम बेटा                  

हीरा : नीचे आकर छत पर था दादी माँ।                                       

 दादी : नलीनी के साथ कैरम खेला।? एक पल के लिए तो सकपका गया हीरा। खुद को संभालने की कोशिश करते हुए। हाँ दादी खेला था।            

वो थक गयी उसे नींद आने लगी तो मैं अपने कमरे में चला गया था।          

अभी छत पर टहलने के लिए ही गया था आपकी आवाज़ सुनकर नीचे आ गया।

नलीनी की नींद लग जाती है।

वो एक सपना देखती है, जिसमें वो एक राजमहल में है और दासीयां उसकी सेवा में लगी हुई हैं।

तभी एक दासी उसे लेने आती है चलीए राजकुमारी जी आपके स्नान का वक़्त हो गया है।

एक दासी उसका गाउन पकड़ कर चलती है वो महल के अंदर के गुप्त रास्ते से निकल एक बगीचे में पहुंच जाती हैं।

बहुत सुन्दर पेड़ पौधे लगे हुए हैं तरह तरह के रंग बिरंगे फूल खिले हुए हैं।

हिरन के शावक कुलांचे मार कर खेल रहे हैं, मोर नृत्य कर रहे हैं, पेड़ों की डालें फल, फूलों से लदी हुई हैं।

नलीनी ये देखकर हैरान रह जाती है इतनी सुंदर जगह भी है इस धरती पर उसने कभी सोचा भी नहीं था वो खुशी से झूम उठती है।  ।                      

दासीयां : राजकुमारी जी स्नान का वक़्त हो गया है आइए..   

नलीनी : दासी के साथ चलती है.. आगे एक कुंड बना है उसमें साफ नीला पानी भरा हुआ है।

गुलाब के फूलों की पत्तियां जड़ी बूटियों, चंदन की सुगंध से आसपास का वातावरण भी सुगंधित हो रहा है।

एक दासी उसका गाउन खोलती है, एक दासी बालों का जुड़ा खोलती है।

एक उसकी चोली की गाँठ खोल कर उसे पानी में अंदर उतरने में मदद करती है।

अब उसके बालों में एक औषधीय पैक लगाया जाता है।

उसकी सुगंध से उसे नींद सी आने लगती है। चंदन, केसर से उसके चेहरे हाथ पाँव को मल मल कर उसे स्नान करवाया जाता है।

उसके बाद व्हाइट बड़ी सी टॉवल में उसका बदन चारों ओर से ढंक कर सुगंधित धूप उसके बालों में और बदन को दी जाती है और उसी गुप्त रास्ते से उसे महल में उसके कक्ष में पहुंचा दिया जाता है।

साथ वाली दासीयां वहाँ से लौट जाती हैं। अंदर उसका श्रंगार करने वाली दासीयां उसके वस्त्र हाथ में लिए खड़ी होती हैं।

वाइन कलर का गाउन उससे मेचिंग की ज्वेलरी बालों में लगाने के लिए वेणी, दूसरे देशों के राजा, महाराजाओं द्वारा उपहार में भेजे बेशकीमती इत्र दासीयां उसे तैयार करती हैं। जेवर पहनाकर इत्र लगाती हैं केश सज्जा कर उसमें वेणी लगा देती हैं।

उसके बाद उसे उसके पलंग पर बैठाकर एक दासी उसकी नज़र उतारती है और दासीयां उसके रूप की तारीफ करती हैं राजकुमारी जी आपके रूप के आगे तो अप्सराएं भी पानी भरती हैं।

आपके रूप के चर्चे दूर दूर तक हैं हर राज्य के राजकुमार आपसे विवाह की इच्छा रखते हैं। पर आप तो राजकुमार के सिवा किसी और के बारे में बात करना भी पसंद नहीं करती.. नलीनी : कुमुद तेरी फिजूल की बकवास फिर शुरू हो गई।?      

कुमुद : क्षमा करें राजकुमारी भूल हुई।     

नलीनी : तुम सब प्रस्थान करो राजकुमार आते ही होंगे..  

दासीयां: चली जाती हैं।      

एक सेवक : राजकुमारी जी राजमाता ने आपके लिए भिजवाया है..

नलीनी : क्या है इसमे?    

सेवक : फल, मिष्ठान, दूध

नलीनी : रख कर जाइए.. जैसी आज्ञा राजकुमारी।  

हीरा : राजकुमार के भेष में कक्ष में प्रवेश करता है।

मेहरून कलर के कुर्ते पर जरी का काम किया हुआ नीचे गोल्डन पजामा पाँव में गोल्ड वर्क की हुई जुतियाँ कान में कुंडल, गलें में लंबी सी मोतियों की माला, हाथ में तलवार चेहरे पर तेज जो भी देखे उसके रूप पर मोहित हो जाए।      

नलीनी : उसे देख पलंग से उठ कर खड़ी हो जाती है..

हीरा : महल कैसा लगा राजकुमारी, कोई परेशानी तो नहीं हुई आपको?           

नलीनी : बहुत सुन्दर महल है राजकुमार, हमें कोई तकलीफ़ नहीं हुई।     

हीरा : आपसे मिलने के लिए हम बेचैन थे राजकुमारी, काम की व्यस्तता के चलते दिन में आना संभव नहीं हो पाया।

राज कुमारी आपने भोजन किया..?     

नलीनी : खाना खाने का मन नहीं था हमने मना कर दिया था तब भी राजमाता ने फल, मिष्ठान सेवक से भिजवा दिये हैं।

कितना ख़्याल रखती हैं वो सबका आप भाग्‍यशाली है राजकुमार।

राजकुमार : अब वो आपकी भी माता हैं हम शीघ्र ही आपसे विवाह कर लेंगे।

फिर आप हमें छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी।

अब करीब आ जाइए ये दूरी हमसे बर्दाश्त नहीं हो रही है।    

नलीनी : कुछ दिनों की तो बात है राजकुमार। उसके बाद तो हम हमेशा के लिए ही आपके हो जाएंगे।

थोड़ा धीरज रखिये मन को समझाइए।

शादी से पहले ये सब शोभा नहीं देता.. ।                         

राजकुमार : राजकुमारी जब मन वचन से हम एक हो गए हैं तो अब ये बेरुखी कैसी ?

हमसे अब और इंतज़ार नहीं होता है.. और राजकुमार नलीनी का हाथ पकड़ कर पलंग पर ले आता है।

उसके हाथों को चूम कर उसके होठों का एक गहरा चुंबन लेता है राजकुमारी के रोकने के बाद भी उसके बालों का जुड़ा खोल कर उसकी चोली की गाँठ खोलता है और अपने कपड़े उतार लैंप जला कर कमरे की बत्ती बुझा देता है।

नलीनी को बाहों में समेट वो उसे पा लेना चाहता है। पर नलीनी नहीं चाहती शादी से पहले शारीरिक संबंध बनाया जाए उसके संस्कार ऐसा करने से उसे रोकते हैं।

वो नींद में बड़बड़ाने लगती है छोड़ दो मुझे प्लीज छोड़ो तभी दादी की आवाज़ से घबराकर उठ जाती है।

चारों तरफ देखती है न महल न राजकुमार दादी माँ खड़ी हैं।  

दादी : बिटिया क्या हुआ कोई डरावना सपना देखा क्या ?

किसने पकड़ा था तुम्हें..?

नलीनी : मुझे.. मुझे कौन पकड़ेगा दादी माँ.. ।

सपने में बड़बड़ाने की आदत है मेरी आप जानती तो हो।   

दादी : सर पर हाथ फेरती हैं, खुश रहो बिटिया। नीचे आ जाओ कुछ खा पी लो फिर, हीरा के साथ पार्क में बेडमिंटन खेलने चली जाना थोड़ा खेलना भी सेहत के लिए जरूरी है।


 नील भाग__ ५८                   

नलिनी: जी दादी अभी आती हूँ।

दादी के जाने के बाद नलिनी उस सपने के बारे में सोचती है। और उसे खुद पर ही हंसी आ जाती है।

वो उठकर मुँह हाथ धोकर कपड़े चेंज करती है और नीचे जाती है।                         

दादी : आ गयी बिटिया.. चलो कुछ खाकर खेलने जाओ।                 

नलिनी : दादी बोर्नबीटा वाला दूध और केला चाहिये।                 

दादी : मनसा.. बिटिया के लिए बोर्नबीटा का दूध और केला ले आओ।               

 मनसा : लो बिटिया.. नलिनी : थैंक यू काकी केला उठाकर खाती है।         

हीरा : दादी माँ आपने बुलाया मुझे।               

दादी : हाँ बेटा, तुम्हें कुछ खाना है तो खा लो.. उसके बाद नलिनी को बेडमिंटन खिलाने पार्क में ले जाओ.. गाड़ी आराम से चलाना भीड़ भाड़ से बचके..                   

हीरा : जी दादी माँ.. मैं तैयार हूँ आप नलिनी से बोलो तैयार हो जाए।         

नलिनी : उलझन मैं थी कि क्या करे,

हीरा के साथ जाने का उसका बिलकुल भी मन नहीं था।

कल किस तरह से उसने कहानी में उलझाकर उसके साथ अपनी ज़िद पूरी की और दादी को बताने के लिए भी मना कर दिया।

अगर वो मना नहीं करता तब मैं ये बात दादी को बता पाती???          

"दादी क्या सोचती मेरे बारे में कि मैं कितनी गंदी लड़की हूँ।"

अब अगर मैं खेलने जाने के लिए मना करूंगी तो दादी सो सवाल पूछेंगी।

कल हीरा के साथ खेलने के लिए दादी से मैंने ही कहा था।

पर हीरा मेरे साथ इस तरह करेगा ये मुझे नहीं पता था।

"कुछ सोचकर.. चलो मैं भी तैयार हूँ।"          

दादी : सोचती हैं कि हीरा बहुत समझदार है नलिनी की चिंता रहती है उसे।

उन्हे हीरा की कल की बात सही लगी सारे बच्चे अपने माँ पिता के साथ घूमने खाने जाते हैं। नलिनी घर पर ही रहती है बच्ची है उसका भी तो मन करता होगा.. दादी हीरा को रूपए निकाल कर देती हैं।    

हीरा नलिनी का ध्यान रखना और घर आते समय इसकी पसंद की आइसक्रीम खिला देना।      

दोनो जाते हैं रास्ते में नलिनी हीरा से कोई बात नहीं करती..

हीरा भी चुप रहता है।

पार्क पहुंच कर गाड़ी खड़ी कर दोनों अंदर जाते हैं..         

नलिनी: एक बेंच पर जाकर बैठ जाती है। खेलते हुए बच्चों को देखती है।     

हीरा : नलिनी को देखता है पर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाता.. वो भी पार्क में खेलते बच्चों को देखने लगता है।

तभी एक बड़ी रेड कलर की रबर की बॉल नलिनी के पैर से टकराती है।

नलिनी : देखती है सामने से एक छोटी बच्ची दौड़ कर आ रही है, नलिनी उसे बॉल फेंककर देती है वो हँसते हुए उसे दौड़ कर पकड़ लेती है।

फिर नलिनी की तरफ़ फेंकती है नलिनी को भी मजा आने लगता है..

बच्ची के माता पिता दूर से ही अपनी बच्ची को देख कर खुश होते हैं ।                          

हीरा : मौके का फायदा उठाकर नलिनी और बच्ची के साथ खेलने लगता है वो लोग एक दूसरे को बॉल पास करते हैं।

छोटी बच्ची जैसे ही बॉल पकड़ लेती है खुश होकर हँसने लगती है।             

निन्नी.. निन्नी उस बच्ची की माँ उसे आवाज़ लगाती हैं बच्ची बॉल लेकर हीरा और नलिनी को बाय करके चली जाती है।           

नलिनी: हीरा को देख कर वापिस जाने है..तभी हीरा उसका हाथ पकड़कर रोक लेता है..

नलिनी : हाथ छोड़ो..                      

हीरा : सॉरी नलिनी। अब गुस्सा छोड़ो चलो बेडमिंटन खेलते हैं।       

घर पर दादी पूछेंगी तो क्या बोलोगी।?                

उस दिन भी मैंने तुमसे पूछा था तभी वो गेम खेला था.. बोलो नलिनी..?           

तुमने हाँ कहा था कि नहीं..?

तुम चाहो तो बोल दो दादी को सब।           

चलो हम वापिस घर चलते हैं..

हीरा जाने लगता है।            

नलिनी : रुको।

हम बेडमिंटन खेलते हैं।       

नलिनी खेलते खेलते थक कर बैठ जाती है।

बस अब नहीं..

भूख लग रही है घर चलते हैं। 

हीरा : ठीक है चलो।

रास्ते में एक जगह गाड़ी रोकता है..

नलिनी : क्या हुआ।?  

हीरा: कुछ नहीं.. चलो साथ में आओ।

(ये एक रेस्टोरेंट जैसी जगह है जहाँ ज्यादातर स्टूडेंट्स ही थे।)

तुम्हें भूख लगी थी ना..?      

नलिनी : हाँ। पर दादी ने आइसक्रीम खाने के लिए ही पैसे दिए हैं तुम्हें।        

हीरा : तुम चिंता नहीं करो पैसे हैं मेरे पास। आओ बैठो। क्या खाओगी बोलो..?   

नलिनी : पिज्जा मैं तो देर लग जायेगी दादी गुस्सा करेंगी..?

हीरा : बर्गर ले लो..पिज्जा तुम्हें किसी और दिन खिला दूँगा।    

नलिनी : ठीक है। दोनों बर्गर खाते हैं नलिनी चुप ही रहती है।

हीरा : आइसक्रीम?     

नलिनी : वनीला।                   

हीरा : गाड़ी निकालकर बैठो नलिनी।

नलिनी : आराम से चलाना..    

हीरा : हाँ। हीरा समझ गया था कि नलिनी का मूड अभी सही नहीं है और उसकी छोटी सी भी ग़लती से बात बिगड़ सकती है।       

नलिनी : दादी .. दादी..

दादी : क्या हुआ बिटिया घर सर पे क्यूँ उठा रही हो।?                 

नलिनी : दादी आज पार्क में बहुत मजा आया।     

 पता है मैं बेंच पर बैठी थी और एक छोटी बच्ची की बॉल मेरे पैरों के नीचे आ गयी मैंने उसे फेंक कर दी और फिर उसने मुझे और वो हमारे साथ खेलने लगी। हीरा मैं और वो निन्नी नाम था उसका एक दूसरे को बॉल पास करके खेल रहे थे।

फिर उसके पापा मम्मी ने उसे बुला लिया और वो चली गई। फिर हीरा के साथ बैडमिंटन खेला और रास्ते में आइसक्रीम भी खाई। आप कितनी अच्छी हो दादी लिपट जाती है दादी से।


दादी : अच्छा अब जल्दी से उठो जाकर हाथ मुँह धोकर कपड़े बदलो फिर फ्री होकर होम वर्क करो और खाना खाओ।                    

'दादी की प्यारी बेटी'।                           

नलिनी अपने कमरे जाकर कुछ देर बैठती है उसके बाद नहाने चली जाती है..         

पसीने की वजह से उसका बदन चिप चिप कर रहा था, नहाकर उसे अच्छा लगता है।         

वो नाइट ड्रेस ही पहन लेती है।                 

बर्गर खाने की वजह से उसका पेट भरा हुआ था।

वो हीरा से नाराज़ थी पर आज हीरा के साथ उसे बहुत अच्छा लगा बर्गर, पिज्जा सब खाने का उसका कितना मन चाहता है पर किसके साथ मार्केट में खाने के लिये जाये ।

सोचते हुए अपनी होम वर्क की कॉपी निकाल कर लिखने बैठ जाती है उसे वक़्त का अंदाजा नहीं रहता तभी दादी की आवाज़ सुन घड़ी देखती है 10 बज रहे हैं।                   

नलिनी.. दस बज रहे हैं जल्दी से खाना खाने आ जाओ ।   

नलिनी : आती हूँ दादी।       

मनसा काकी : आज खाने के लिए लेट हो गई बिटिया रानी।

तुम्हारी पसंद के फ्राइड राइस बने हैं।

नलिनी : काकी थोड़ा कम कर दो आज ज्यादा भूख नहीं है।               

दादी : बिटिया तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना..

माथा छूकर देखती हैं।

"खाना क्यूँ नहीं खा रही हो.."

तुम्हें तो फ्राइड राइस पसंद है ना?

नलिनी : दादी जोर की नींद आ रही है होम वर्क बहुत ज्यादा था थक गयी हूँ मैं।         

दादी : जाओ बिटिया सो जाओ..

इतनी देर तक बेडमिंटन खेलने की आदत नही है तुम्हारी इसलिए थक गई हो। मनसा एक कप हल्दी वाला दूध नलिनी को उसके कमरे में दे आओ।

मनसा : जी माँ सा।  

हीरा : आप मुझे दे दो मैं ऊपर ही जा रहा हूँ। नलिनी के कमरे का दरवाज़ा खुला था।         

हीरा : दरवाजे को नोक करता है।     

नलिनी: खुला हुआ है दरवाज़ा..              

हीरा : काकी ने दूध भेजा है टेबिल पर रख कर बाहर आ जाता है।        

नलिनी : कमरे का दरवाज़ा लगा लेती है।               

मनसा : माँ सा इनका फोन आया मेरी दूर के रिश्ते की देवरानी नहीं रही मुझे दो, तीन दिन के लिए गाँव जाना होगा।

इतने सालों में पहली बार मनसा ने जाने के लिए छुट्टी मांगी थी।   

दादी : ठीक है तू जा अपना ध्यान रखना  

मनसा : जी माँ सा। चलती हूँ।

जबसे मनसा आई दादी को सींक भी हिलाने की जरूरत नहीं पड़ी।

खाना बनाना दादी के बांये हाथ का काम था, पर रामकिशन बनाने नहीं देता था।

कहता जिंदगी भर काम कर लिया अब आप भजन पूजन करो और बिट्टो के साथ समय बिताओ आपके अलावा है कौन उस बच्ची के पास l

जबसे बिट्टो के साथ दादी यहाँ आयी उनकी दिनचर्या बिट्टो के हिसाब से ही ढल गई। अब तो बिट्टो बड़ी हो गई है अपना काम खुद कर लेती है।

दूसरे दिन सुबह नलिनी के टिफ़िन लिए दादी नमकीन पूरी और हलवा बना देती हैं।  

नलिनी :स्कूल के लिए तैयार होकर नीचे आती है.. दादी बड़ी अच्छी खुश्ब आ रही है।

आपने हलवा बनाया है आज..?

दादी : हाँ। अपनी बिट्टो का लंच आज मैंने बनाया..

ले थोड़ा सा खा ले। 

नलिनी : वाह । क्या स्वादिष्ट हलवा है दादी।

आपकी उँगलीयां चूम लूं कितना स्वाद है आपके हाथों में..। 

दादी : चूम लेना बिट्टो पर स्कूल से आके..

नलिनी : घड़ी देख कर.. हीरा.. जल्दी चलो देर हो रही है।

दादी : बिट्टो हीरा कबसे बाहर खड़ा है तू देरी कर रही है। अच्छा। बाय दादी..

रामकिशन : प्रणाम माँ सा.. कैसे हो आप बिट्टो स्कूल गयी?

दादी : हम सब बढ़िया हैं बेटा, बिट्टो स्कूल गई अब बड़ी हो गई है समझदार भी। अब उसकी चिंता रहती है मुझे।

रामकिशन : सही कह रही हैं आप माँ सा। फिक्र उसकी मुझे भी रहती है मैं सोचता हूँ कि दसवी की परीक्षा के बाद ग्यारहवी से उसको हॉस्टल में पढ़ने भेज दूँ जयपुर में वनस्थली में उसका एडमिशन करवा देता हूं पढ़ाई में होशियार है दो साल की बेफिक्री भी हो जाएगी और उसे अपने साथ के बच्चे भी मिल जाएंगे तो अच्छा लगेगा उसे और अब आप भी थक जाती हैं तो आप भी उसकी तरफ से निश्चिंत हो जाएँगी आपकी भी तपस्या रही है इतने साल १६ साल की हो जाएगी अब हमारी बिट्टो।

दादी : देख तो कैसे समय निकल गया जरा सी थी पंडित जी जब लाए थे। अब तो मुझसे लंबी हो गई है।

दस दिन बाद बिट्टो का जन्‍म दिन है। फिर तुम उसे हॉस्टल भेज दोगे।

रामकिशन में चाहती हूँ कि इसकी माँ की निशानी इस जन्‍म दिन पर इसे दे दें।

उस पेंडिल के साथ एक कागज पर लिखा था की जब ये समझदार हो जाए तब इसको ये लैटर देना।

रामकिशन : माँ आप चेन दे देना पर लैटर जब ये अठारह साल की होगी तब ही दूँगा अभी मन कोमल है कहीं ऐसा न हो इसका असर इसकी पढ़ाई पर पढ़े।

दादी : तू ठीक कह रहा है रामकिशन अभी सब रहने देते हैं जब ये अठारह साल की होगी तब दे देंगे।

मनसा की देवरानी नहीं रही वो गाँव गयी है.. 3-4 दिन में आने का बोल गयी है।        

रामकिशन : माँ आज ही पंडित जी से बात करता हूँ कुछ दिन बिट्टो के पास रह लेंगे बहुत दिन हुए उन्हे उससे मिले ।                      

आज के लिए आप हीरा से बोलकर बाहर से बिट्टो के पसंद का खाना मँगवा लेना।  

दादी : तू यहाँ की चिंता मत कर।                     

दादी : हीरा बिट्टो का स्कूल से लाने का टाइम हो रहा है ।    

हीरा :लेने जा रहा हूँ दादी माँ..।     

दादी : हीरा रास्ते में उसके पसंद का जो भी वो खाए ले आना..

हीरा : जी। आपके लिए क्या लाऊँ..?

आप क्या खाओगी। ?

दादी : आज एकादशी है मेरा उपवास है फल रखे हुए हैं..         

नलिनी:: स्कूल के गेट पर ही मिल जाती है..

दादी से बात करने में हीरा थोड़ा सा लेट हो जाता है।

नलिनी : हीरा को देख कर गाड़ी पर बैठ जाती है। चलो।       

हीरा :रास्ते में डोमिनोज पर गाड़ी रोकता है।             

नलिनी : यहाँ क्यूँ रुके हो। ?   

हीरा : दादी माँ ने कहा था कि तुम्हारे पसंद का खाना पैक करवा लूँ।              

हीरा : पिज्जा ऑर्डर कर देता है और दादी को फोन करके बताता है कि वो पिज्जा हट पर है नलिनी को यहीं पर खिला दूँ या पैक करवा कर ले आऊँ..?  दादी : बेटा तू वहीं खिला दे। मुझे उसकी महक अच्छी नहीं लगती जी घबराता है।     

हीरा : आप नलिनी से बोल दो.. ठीक है तू उसे फोन दे।    

नलिनी दादी से बात करो।       

नलिनी : हैलो दादी। हाँ, हैलो बिट्टो में दादी बोल रही हूँ। तू वहीं पर खाले।

कुछ और खाने का मन हो तो वो भी खा लेना समझी।  

घर आते समय ब्रेड, बटर लेती आना अपने लिए।

"ठीक है दादी।"।

'नलिनी खुश हो जाती है। न जाने कब से उसका मन पिज्जा हट में पिज्जा खाने का था ।"।          

उसकी दोस्त जब बात करती तो वो चुप रह जाती थी.. उसने हीरा को थैंक यू बोला।      

हीरा : नलिनी बैठो में पिज्जा लेकर आता हूँ। नलिनी पिज्जा देखकर छोटी बच्ची की तरह खुश हो जाती है        

नलिनी : हीरा तुम भी खाओ।

हीरा : पहले तुम खाओ      

नलिनी : साथ में खाते हैं।

हीरा खुश हो जाता है।

वो नलिनी और अपने लिए कोल्ड कॉफी मंगवाता है।

नलिनी ने इससे पहले कभी कोल्ड कॉफी नहीं पी थी उसकी खुशी का ठिकाना नहीं था।

सब कुछ जैसा वो चाहती थी उसे मिल रहा था। बच्चों की खुशियाँ कितनी छोटी छोटी होती हैं।

वो हीरा से बोलती है दादी ने ब्रेड बटर लाने के लिए बोला है।            

हीरा : ठीक है ले लेंगे।

नलिनी तुम्हें कुछ और चाहिए?

नलिनी: नहीं..पेट बहुत सारा भर गया।   

हीरा : उसकी बात सुनकर मन में ही मुस्कुराता है और नलिनी को गिफ्ट पेपर में लिपटा हुई चॉकलेट देता है।     

नलिनी : क्या है इसमें।?  

हीरा : मेरी तरफ से गिफ्ट है तुम्हारे लिए।          

घर पर जाकर खोलना तुम।  

चलो अब जल्दी दादी माँ इंतज़ार कर रही होंगी।      

नलिनी : घर पहुंच कर.. दादी..। दादी।

दादी : आती हूँ बिटिया.. बहुत खुश लग रही है आज तो बिट्टो। 

नलिनी : हाँ, आज मैं बहुत बहुत खुश हूँ।

पता है दादी मैंने आज पहली बार पिज्जा हट में पिज्जा खाया बहुत टेस्टी था।

और हीरा ने कोल्ड कॉफी भी पिलवाई आज तो पार्टी हो गई दादी आपकी वजह से।       

कितती प्यारी हो दादी आप लव यू दादी नलिनी दादी को कस कर पकड़ लेती है..।

दादी : छोड़ बिट्टो.. इन बूढ़ी हड्डियों में अब इतनी जान नहीं है।       

नलिनी : आप आज से दो बार दूध पीना दादी आपकी हड्डियाँ मजबूत हो जाएंगी।      

दादी : ठीक है बेटा पी लूँगी। तू कल भी स्कूल से आते में पिज्जा खा लेना मनसा काकी के आने तक दो दिन तू तेरे पसंद का खाना खा ले।

नलिनी : कल मेरी सारी सहेलियाँ विनीता के घर जाएंगी दिन में हम खेलेंगे शाम को वो केक काटेगी तब हम आ जाएंगे खाना दिन में रहेगा उसकी मम्मी ने बोला था अपनी ड्रेस साथ में रख लेना।

उसके पापा हमें स्कूल में लेने आ जाएंगे और सबके घर पर छोड़ भी देंगे।

दादी : ठीक है पर ज्यादा मस्ती नहीं करना.. नहीं करेंगे पक्का प्रॉमिस।       

नलिनी : दादी हीरा को बोलो केरम खेलने के लिए साथ में।          

दादी : हीरा जा बेटा थोड़ी देर खेल ले..          

हीरा : जी दादी माँ । हीरा ऊपर जाता है नलिनी। नलिनी.. डोर नोक करता है..

आ जाओ गेट खुला हुआ है।

हीरा :चलो केरम निकालो..

 नलिनी : बैठो तो.. पहले तुम्हारी गिफ्ट खोलते हैं।        

नलिनी पेकिंग खोलती है बड़ी वाली डेरी मिल्क चॉकलेट।खुश हो जाती है।

थैंक यू हीरा तुम्हारी गिफ्ट बहुत अच्छी है पर हम आधी आधी खाएँगे।     

हीरा : नलिनी ये तुम्हारे लिए ही है मुझे चॉकलेट पसंद नहीं है।       

नलिनी : तुम एक बाइट खा लो।    

हीरा : एक बाइट ले लेता है।

नलिनी : अब सारी चॉकलेट में खाऊँगी।       

हीरा तुमसे एक बात पूछूँ..?    

अचानक से नलिनी की आवाज़ में गंभीरता आ जाती है। 

हीरा : हाँ पूछो?                            

नलिनी :तुम अभी इतने अच्छे से रह रहे हो मेरे साथ पहले भी तुम अच्छे दोस्त की तरह ही रहे हो।

हम साथ में कितना खेलते थे जब पंडित जी अंकल यहाँ पर थे।

उस दिन तुमने वो सब क्यूँ किया और फिर प्रिंसेस की झूठी कहानी।?

हीरा : उस दिन तुम्हें ट्यूशन से घर पर छोड़कर याद नहीं में क्या कर रहा था, तभी दादी ने बोला कि तुम्हारे कमरे में जाऊँ और तुम्हारे साथ केरम खेलूँ।

नहीं तो तुम नाराज़ हो जाओगी।

मुझे तो खुद ही तुम्हारे साथ खेलना अच्छा लगता है।

दादी माँ से मैंने कहा कि एक आंसर लिख कर जाऊँगा, जबकि उस समय में कुछ भी नहीं लिख रहा था पता नहीं कैसे झूठ निकल गया मेरे मुँह से।

लेकिन मैं सीधे तुम्हारे कमरे में आया।

तुम्हारे कमरे का दरवाज़ा भिड़ा हुआ था जैसे ही मैं खोलने को हुआ तुम बाथरूम से बाहर निकल कर आयीं ओर तुमने अपना बाथरोब उतार कर टेबिल पर रख दिया। तुम्हें इस तरह देख कर मैं अपने होश खो बैठा तुम नेपीकिन से जब अपना बदन पोंछ रही थी मैं खुद पर से अपना काबू खो रहा था तुमने अपने पैरों पर नेल पेंट लगाया तुम किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थीं मैं इंसान ही हूँ तुम इतनी सुन्दर हो नलिनी मेरा ईमान डोलने लगा तुमने कपड़े पहने तभी मेरा हाथ दरवाज़े पे लग गया और दरवाज़ा खुल गया।

और वो सब हो गया जो नहीं होना चाहिए था।

अगर तुम्हारा दरवाज़ा न खुला होता तो ऐसा कभी नहीं होता।

तुमसे मेरी रिक्वेस्ट है अपने कमरे में आकर सबसे पहले उसे बंद करो अगर कभी किसी दोस्त के घर जाती हो तो अकेले कमरे में मत रुको सोते समय दरवाज़ा अंदर से लॉक करो।

हर बार लड़का गलत हो ऐसा नहीं होता कभी हालत भी मजबूर कर देते हैं।

स्त्री सौंदर्य के आगे बड़े बड़े ऋषि मुनियों के ईमान डोल गए तपस्या भंग हो गई। 

में तो एक आम इंसान हूँ और विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षण स्वाभाविक है।

तुम बहुत छोटी हो अभी।

कोई भी लड़की अपने माँ, पिता, भाई की निगाह में ही छोटी और मासूम होती है।

दूसरे की बेटी, बहन जब शॉर्ट स्कर्ट या शॉर्ट्स में रोड पर चलती है तो लड़के तो छोड़ो अधबूढ़े भी उसकी जांघों की मांसलता देखते हैँ।

उसकी छाती के उभार देखते हैं.. भले ही उस उम्र की बेटी और पोती उनके घर में हो।

असल में ये गंदगी हम लोगों के दिमागों में भरी हुई है। लड़की और औरत को उपभोग की वस्तु से ऊपर देखने में हमारे यहाँ पुरुषों की मर्दानगी घट जाती है।

अगर घर में लड़को को छोटे से ही लड़कियों की इज्ज़त करना सिखाई जाए जैसे लड़कियों को बचपन में सीखाते हैं बेटा भाई है हर बात में उसका सम्मान करना पहले उसे खाना देना ये भेद घर से मिटाना होंगे लड़का लड़की को एक निगाह से देखा जाए एक जैसा सम्मान मिले।

इससे ही सोच में बदलाव आएगा।

दिमाग में भरी इस गंदगी की सफाई हो जाए तो असल मायने में हमारा भारत देश स्वच्छ हो जाएगा ।

हमारे देश की बेटियाँ बैखोफ होकर आ जा सकें।

अपने घरों में उनके साथ गलत न हो।

हम जैसे जिस्म के भूखे भेड़ियों के द्वारा कितनी ही मासूम बच्चियाँ रौंद दी जाती हैं।

में खुद को भी गुनाहगार मानता हूँ मैंने भी उस दिन का दोष तुम्हें ही दिया अगर उस दिन तुम्हारी जगह कमरे में मेरी बहन या माँ होती तब भी मैं ये ही करता क्या ?

उस दिन बहुत सोचा इस बात को और खुद को धिक्कारा मैंने।

पंडित जी कितने विश्वास पर मुझे यहाँ छोड़कर गए थे वो तुम्हें अपनी बेटी मानते हैं.. और मैं छी छी.. कितना गिर गया था..

और उस दिन गाड़ी के लिए भी जब तुमने मुझे बोला था।

तब भी मेरी ग़लती नहीं थी किसी लड़की को बैठा कर मैंने पहली बार गाड़ी चलायी थी।

मुझे थोड़ी घबराहट सी हो रही थी दोस्त लोगों से हमेशा सुना जब अपनी गर्लफ्रेंड के साथ वो कहीं जाते हैं तो वो जान बूझकर ब्रेक लगाते जिससे वो उनसे टकराए और उसकी छाती का स्पर्श उन्हे गुद गुदा जाता है इसमें उन्हे बहुत मजा आता।

मैंने भी उस दिन यही सोचा ऐसा करने पर कैसा महसूस होता है देखें।

और गाड़ी के ब्रेक भी सही नहीं थे।

संभालते हुए भी जोर से ब्रेक लग गया।

दूसरे दिन जब तुम्हें लेने गया तब मैंने ब्रेक सही करवा लिए थे।      

मैं अब से तुम्हारा पूरा ध्यान रखूँगा नलिनी।

मेरी वजह से तुम्हें कभी भी कोई तक़लीफ नहीं होगी ये एक दोस्त का वादा है जिसे में आखरी साँस तक निभाऊंगा।        

नलिनी : आज से हम पक्के वाले दोस्त हैं।

हीरा मेरी शादी हो जाएगी तब भी हमारी दोस्ती ऐसी ही रहेगी। बोलो हीरा।?     

हीरा : हाँ नलिनी। अब हम हमेशा दोस्त रहेंगे।                  

दादी : बिट्टो नीचे आओ..

नलिनी : लो दादी आ गई।

दादी : जाओ जल्दी से अपना दूध का गिलास उठाओ और केला भी ले आओ।          

दादी एक केला आप भी खाओ।         

दादी : अभी चाय पी है मैंने, यहीं रख दो कुछ देर बाद में खा लूँगी। तुम खेलने जाओ।    

दादी हीरा को आवाज़ लगाती हैं तब तक हीरा आ जाता है..

नलिनी : बाय दादी।

नलिनी हीरा के साथ चली जाती है।              

हीरा : तुम तो बहुत अच्छा बेडमिंटन खेलती हो नलिनी..    

नलिनी : पहले स्कूल में खेलती थी टीम सिलेक्शन में बहुत बेईमानी होती है टीचर अपने पसंद के स्टूडेंट्स को लेते हैं जो उनकी चमचागिरी करते हैं और जो अच्छा खेलते हैं उन्हें उससे मतलब नहीं टीम हारती है तो स्कूल की रेपुटेशन खराब होती है टीचर को उनकी तनख्वाह समय पर मिल जाती है उन्हे स्कूल से क्या लेना देना है।       

पर प्रिंसिपल को सच कौन बताए।

अगर प्रिंसिपल थोड़ा सा भी ध्यान दें स्कूल की हर गतिविधि पे तो उससे स्कूल के साथ स्टूडेंट्स का भी भला हो।

हमारे स्कूल की बेड मिंटन की टीम बहुत अच्छी है, अगर सिलेक्शन ईमानदारी से होते तो हमारा स्कूल ही जीतता।       

हीरा : हाँ, ये तो सब जगह होता है स्कूल, कॉलेज सही बच्चों को मौका नहीं मिल पाता। 

नलिनी: चलो बातें करते बहुत वक़्त हो गया है दादी चिंता करेंगी।                  

हीरा : चलो.. रास्ते में आज शानदार पानी फुल्की खिलवाता हूँ। हमारे कॉलेज की लड़कियों की भीड़ रहती है दिन में यहाँ।       

हीरा :भैया दो जगह पानी पूरी खिला दो..

पानी पूरी वाला : तीखी या मीठी चटनी के साथ।         

नलिनी : मीठी चटनी के साथ..

हीरा : दोनों जगह मीठी चटनी के साथ।               

 नलिनी : बहुत अच्छी है हम दादी के लिए भी लेते हैं।         

हीरा : बीस रुपए की फुल्की पेक कर दो।        

नलिनी : दादी।

"हाँ"

दादी: बिट्टो खेल आयीं।  

 हाँ दादी। और देखो हम आपके लिए पानी पूरी भी लाए।       

हँसते खेलते दिन बीत रहे थे नलिनी की 12 th की परीक्षा का रिजल्ट आने वाला था..

हीरा के भी कई जगह से इंटरव्यू कॉल आ रहे थे.. नलिनी ने 95% से 12th की परीक्षा पास की बंगलोर के अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल गया उसे।उसका 18 th बर्थडे पर रामकिशन जी ने शानदार पार्टी रखी नलिनी के दोस्तो के अलावा शहर के सब नामी गिरामी लोगों को भी बुलाया।             

नलिनी ने अपने दोस्तों के साथ बहुत मस्ती की डांस किया उसे खुश देख दादी रामकिशन जी, पंडित जी के साथ हीरा भी बहुत खुश था।           

तभी अचानक हीरा वॉश रूम में जाता है और फूट फूट कर रोने लगता है वो नलिनी को बहुत चाहता था पर उस दिन की ग़लती की सजा उसने खुद को दी और खुद से ही वादा किया उसका हमेशा ख़्याल रखने और किसी और लड़की को अपनी जिंदगी में कभी नहीं आने देगा। वो जानता था कि उस समय वो नलिनी से अपने प्यार का इज़हार करता तो भी नलिनी उससे नफरत ही करती इसलिए उसने नलिनी का विश्वास जीत कर उसकी दोस्ती चाही..

नलिनी : हीरा। हीरा.. कहाँ हो तुम.. नलिनी को जब वो अंदर नहीं दिखा तो उसे खोजती हुई वो वाशरूम की तरफ़ आ गयी।

हीरा ने नल चालू किया पानी की आवाज़ सुनकर नलिनी को लगा हीरा अंदर है..

डोर नॉक किया.. हीरा।   

हीरा : कमाल की लड़की हो कम से कम एक काम तो चैन से करने दो।

आता हूँ चलो..

नलिनी : ठीक है पर जल्दी आओ।

हीरा अपना चेहरा ठीक करता है झूठ में हँसने की कोशिश करता है जिससे चेहरा सही लगे..

हीरा आओ अपने फ़्रेंड्स से मिलवाती हूँ तुम्हें..

ये मेरा बेस्ट फ्रेंड हीरा..

सब लड़के लड़कियाँ हैलो बोलते हैं और हीरा भी उन्हें हैलो कहता है

और नलिनी से बोलता है रामकिशन जी ने किसी जरूरी काम से बुलाया है और निकल जाता है।

दोस्तों और मेहमानों की भीड़ में नलिनी उसका चेहरा नोटिस नहीं कर पाती..।

दादी समझ जाती हैं वो हीरा के पास जाती हैं उसके कंधे पर हाथ रख प्यार करती हैं।             

मैं समझ सकती हूँ तेरे मन की बेटा पर तुझे उदास देख लेगी तो ये पागल लड़की जाएगी नहीं..

दादी आप चिंता नहीं करो।     

सारे मेहमान चले जाते हैं तब रामकिशन जी, दादी, पंडित जी और हीरा को भी बुलाते हैं..

दादी : नलिनी यहाँ आओ बिटिया पंडित जी एक बैग देते हैं नलिनी को लो बिटिया तुम्हारी अमानत इसके अन्दर कागज़ पर लिखा था जब तुम समझदार हो जाओ तब ये चिट्ठी हम तुम्हें दें जिससे तुम अपनी माँ की मजबूरी को समझ सको और हो सके तो अपनी माँ को माफ़ कर सको..    

पंडित जी जिस टॉवेल में नलिनी लिपटी हुई थी वो गले की चैन और हाथ की पोची भी उसे दे देते हैं.. दादी बोलती है बिटिया इसे गले में पहन लो तुम अठारह बरस की हो गयी हो अपनी माँ का आशीर्वाद समझ कर पहन लो दादी चैन नलिनी के गले में पहना देती हैं..

नलिनी पेंडल खोलकर देखती है उसमें कृष्ण भगवान की फोटो और के लिखा होता है नलिनी माथे से लगा लेती है। 

चिट्ठी पढ़ने वो मना कर देती है.. हॉस्टल में जाकर पढूंगी।

ठीक है पंडित जी उसे कलेजे से लगा लेते हैं..

सबकी आँखें भीग जाती हैं।

पंडित जी उसे ईयर रिंग देते हैं बिट्टो ये पहन लेना। जी.. रख लेती है।

दो दिन बाद नलिनी को जाना होता है।

हीरा उसे छोड़ने जाएगा रामकिशन जी ने दोनों की टिकिट करवा दी थी साथ ही हीरा से दस दिन तक वही होटल में ठहरने के लिए बोला।

नलिनी का हॉस्टल में सामान शिफ्ट करवाकर जरूरत की सभी शॉपिंग वहीं से करवा देना जब तक कि नलिनी की क्लासेस चालू न हो जाएं और दो तीन दिन वो क्लास अटेंड कर ले तब तक तुम वहीं रहना।     

हीरा : आप चिंता न करो।     

रामकिशन जी नलिनी को i phone देते हैं उन्होने उसे प्रॉमिस किया था 12th में अच्छे पर्सेंटेज लाएगी तो i phone देंगे.. नलिनी खुश हो कर उनके लग जाती है.. ।



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