shivendra mishra 'आकाश'

Romance Crime Thriller


4.0  

shivendra mishra 'आकाश'

Romance Crime Thriller


मौत का किरायदार

मौत का किरायदार

11 mins 208 11 mins 208

प्रत्येक दिन की भांति आज भी संध्या हो चली थी, बारिश के मौसम के कारण सूरज दिखाई नही दे रहा था, काले घने बादलों ने जैसे उसे जकड़ लिया और वह फड़ फड़ाता हुआ कब से बादलों के आग़ोश से निकलने को बेचैन हो रहा हो, कुछ बदल छटे तो अस्तांचल सूर्य की किरणें कुछ देर के लिये आई और अपने जाने का संकेत करती हुई फिर बादलो की गोद मे डूब सी गई, जैसे फिर कभी न आने का मन बनाकर लौट गई हो।

बिरजेंद्र उर्फ बिरजू के घर के आगे आस पड़ोस के लोगो की भीड़ जमा थी, चालीस - पचास लोगों की भीड़ होने के बावजूद सन्नता सा छाया हुआ था, और सब के चेहरों का रंग उड़ा हुआ था, सभी के मन में एक ही प्रश्न था कि आखिर हुआ क्या। बिरजू इतना कमजोर कैसे हो गया जो दूसरों को इतना प्रोत्साहित, इंस्पायर करता था वह ऐसे कदम उठाएगा यह कभी सोचा नहीं था।

इसी सन्नाटे को चीरती हुई एम्बुलेंस आई और मेन गेट से अन्दर घर मे प्रवेश करती हैं। पुलिस की गाड़ियों की आवाजाही तेज हो जाती है पूरे घर को सील कर दिया जाता है साथी बिरजू के घर के बाहर आकर थानेदार साहब पड़ोसियों से पूछते हैं कि विरजेंद्र कब से दिखाई नहीं दिया? एक पड़ोसी कहते हैं कि जी हमें तो तीन महीनों से नहीं दिखाई दिया, दूसरे पड़ोसी कहते हैं कि बड़ा चंचल व्यक्ति था अभी एकाद महीना बीता होगा जो उससे मुलाकात हुई थी जब तो बढ़िया थे। बनर्जी साहब बोले कभी सोचा नहीं था कि बिरजू ऐसे कदम उठा लेगा बनर्जी साहब उसके सबसे खास पड़ोसी भी थे उनका घर उसके घर से सटा हुआ था, बहुत हंसमुख इंसान था काश ...काश ... अगर उसे कुछ प्रॉब्लम थी तो हमें बताया होता। मिसेस बनर्जी ने बनर्जी को कोहनी मारते हुए चुप रहने का संकेत किया,,, जैसे अपने आप मे ही बड़बड़ा रही हो कि आप ही थोड़े अकेले पड़ोसी है जो सब की खबर रखते हैं। बेनर्जी साहब संकेत पाते ही उस नेता के समान हो गये जो अपने आलाकमान का आदेश पाते ही चुप्पी साध लेता है।

थानेदार साहब ने कांस्टेबल को पंचनामा बनाने का आदेश देते हुए कहा कि बॉडी को उतारो और पीएम के लिए भेजो। अब तो पीएम में ही मालूम होगा कि हुआ क्या है! मिसेज बनर्जी ने श्रुति, बिरजु की धर्मपत्नी को पहले ही कॉल करके सारी घटना के बताया दिया था और उन्हें मायके से जल्द से जल्द आने को कहा।  कांस्टेबलने पंचनामा बनाते हुए बोला की बॉडी में कोई खरोच एवं घाव के निशान नहीं है, गले मे कुछ रस्सी का चौड़ा निशान हैं। अचानक से डोर मेट के नीचे अंगूठी मिलती है, जिसे और उसके मोबाइल फोन को साथ ही मे रस्सी को फरेन्सिक् लैब भेज दिया जाता है, बॉडी को पोस्टमार्टम के लिये रवाना करते हुए थानेदार साहब ने जाते हुए पड़ोसियों को भरोसा दिलाया की हर तरीके से जॉच होगी, विरजेंद्र जी कोई छोटे मोटे व्यक्ति नही बल्कि रिटायर्ड जिला जज थे, वे हमारे लिये भी उतने ही इम्पोर्टेन्ट है जितना आपके लिये, भरोसा रखिये इतना कहते हुए अस्पताल को रवाना हो गये।

२) श्रुति अपने परिवार के साथ आती है, उसकी आँखों से निरंतर अश्रुधारा बहने के कारण आँखे लाल रेगिस्तान की भांति सूखी हुई है अपनी सुदबुद खो बैठी हैं।

मिसेस बेनर्जी और मि. बेनर्जी उन्हें बार बार दिलासा ,संतावना देते है कि आप ही टूट जायेंगी तो बेटी रिमझिम का क्या होगा। हिम्मत रखिये,, लेकिन उसका क्या जिसका तो संसार ही छिन गया,जिसके नाम का सिंदूर भरती थी, जिसके साथ सात जन्मों का रिश्ता निभाने का वादा किया और वो आज इस तरह छोडकर चला जायेगा उसकी उसने कल्पना न कि थी। मेरी बेटी के सिर से पिता का साया छिन गया इतना कहती हुई फिर रो पड़ती हैं। रिमझिम उसे सँभालती हुई कहती है कि डैड को कुछ नही हुआ, उसे मालूम है कि अब माँ का एक सहारा वही है जो उन्हें टूटने से बचा सकती हैं।

मिस्टर बेनर्जी रिमझिम को साथ लेकर अस्पताल के लिये चलते है, रिमझिम जिसे यह बारिश की बूंदे प्यारी थी आज उनसे ही घृणा होने लगी, कार की विंडो पर गिरती बारिश की बूंदे पड़ते ही नीचे की ओर लुढ़क जाती, जैसे जैसे बारिश तेज होती, रिमझिम के हदय की धड़कन बढ़ती जाती, पानी की भाप काँच पर बढ़ती जाती,रिमझिम को अब अहसास होता जा रहा था कि उसके पिता का साया उससे दूर होता जा रहा है, उसका नीला आसमाँ अब काले काले बादलों से घिर चुका है, और आँखों के समुद्र में लहरों की जब हदबन्दी खुली तो वे सारे किनारों को पीछे छोड़कर फूट पड़ी।

अचानक से ब्रेक लगता है गाड़ी अस्पताल के दरवाजे पर रुकती हैं।

थानेदार साहब अंदर से हाथ मे पीएम रिपोर्ट लेकर आते है,, रिपोर्ट में तो नशीले पदार्थो का अत्यधिक सेवन बताया है, जैसे किसी ने नींद की गोलियों का ओवरडोज दे दिया हो।

और उनके गले पर रस्सी के निशान भी होना पाया गया है, फाइनली हैंगिंग के कारण मौत हुई है उन्होंने रिमझिम और बेनर्जी साहब को बताया। पीछे से श्रुति, मिस बेनर्जी और कुछ पड़ोसी भी मौके पर आ पहुँचे।

थानेदार साहब ने श्रुति की ओर देखते हुए बोले कि आपको किसी पर शक है?, किसी से कोई दुश्मनी या पुरानी रंजिश तो नही है।

श्रुति कुछ देर सोचकर बोली कि हमारी तो किसी से कोई दुश्मनी नही है, न ही किसी पर शक है, परन्तु इतना कह सकती हूं कि बिरजू सुसाइड कभी नही कर सकते इतना कहती हुई वे रोने लगती हैं। कांस्टेबल अंगूठी थानेदार की और बढ़ते हुए कहते है की यह मौका ए वारदात पर मिली थी। थानेदार साहब सभी की ओर अंगूठी दिखाते हुए पूछते है की आप इस अंगूठी को पहचानते हैं?,,, श्रुति ने हाथ बढ़ाते हुए अंगूठी को झपट लिया,,, ये तो मैंने सालिनी के हाथों में देखी थी। कौन सालिनी ? थानेदार साहब ने आश्चर्य से पूछा?

श्रुति आश्चर्यचकित हो थानेदार साहब से कहती है कि वह तो हमारी किरायदार है,

रिमझिम ने श्रुति की ओर देखते हुए कहा कि आपको पक्का पता है न कि ये सालिनी की ही हैं!

हा,, मैंने उसके हाथों में देखी थी श्रुति ने थानेदार साहब से कहा।

थानेदार साहब ने पूछा सालिनी कहां हैं? और आप में से किसी ने पहले नही बताया कि आपके यहाँ किरायदार भी हैं।

कब से आपके यह रह रही है वह। साथ मे कौन कौन रहता है उसके?

वह अभी छः सात महीने पहले ही शिफ्ट हुई है,अपने दो बच्चों के साथ रहती है और कहती है कि पति को उसने छोड़ दिया।

कास्टेबल ने आकर सूचना दी कि सालिनी नही है, वह सुबह से ही फरार बताया जा रहा है जहाँ वह काम करती है वहाँ आज गई ही नही। उसका मोबाइल भी स्वीच ऑफ आ रहा है।

रिमझिम से थानेदार साहब ने कहा कि आप माता जी को लेकर घर जाकर अंतिम संस्कार आदि की तैयारी करें।

हम पर पूर्ण विश्वाश रखें आरोपी कोई हो,,कही भी छुप जाये कानून के शिकंजे में जल्द ही होगा।

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वायु का वेग जब झोंका बन पेड़ की शाखा को कभी इस ओर को झुका देता है कभी उस ओर को झुकता हैं। आशातीत के लिये ये दृश्य किसी प्रार्थना से कम नही है, वह अगर इस प्रकार की समस्या को अपने समक्ष देखता है तो ईश्वर को हाथ जोड़ पुकारने लगता हैं, मन अस्थिर अनेक आशंकाओ की ओर उसका ध्यानाकर्षण हो उठता हैं।

पुरुषार्थी इस दृश्य में भी अपने पुरुषार्थ पर अटल विश्वास रखता है, जीवन मे सुख-दुख का आना जाना लगा रहता हैं,

श्रुति आज जल्दी में रिमझिम के साथ कोतवाली की ओर रवाना हुई,उसे खबर मिली हैं कि पुलिस ने सालिनी को शक के रूप में गिरफ्तार किया हैं।

थानेदार साहब ने सालिनी से पूछते हुई कहा की जब तुम अपने को आरोपी नही मानती,, तुमने बिरजु का क़त्ल नही किया तो तुम फरार क्यों थी? तुम्हे किरायदार होने के नाते अपने मालिक के घर पर होना चाहिये था,या नही,,, मिस श्रुति को संतावना देना चाहिये था या नही ? पर तुम तो यहा से गायब थी।

सालिनी ने थानेदार साहब से कहा कि मैंने कोई क़तल नही किया,मुझे जैसे ही मालूम हुआ कि हमारे मालिक नही रहे,उन्होंने सुसाइड कर लिया तो मैं घबरा गई और उस घर में जाने पर मुझे डर लग रहा था, कही बिरजु मालिक की आत्मा वात्मा न भटके।

"क्या तुमने कभी बिरजु को परेशान या गहरी चिंतन में देखा जिससे लगे कि वो अब नही जीना चाहता, तुमने आखिरी बार उसे कब देखा?"

हा कुछ दिन से बहुत परेशान दिखते थे, अक्सर श्रुति से बात बात पर झगड़ा होता रहता था, रिमझिम से भी कुछ खिंचे रहते थे, ये नही पता था कि वे यह कदम उठा लेंगे। मेरी आखिरी बार मुलाकात तीन चार दिन पहले ही हुई थी।

थानेदार साहब ने जोर देकर बोला कि तुमने ही उसकी हत्या की हैं? इसका जीता जागता उदाहरण है तुम्हारी वह अंगूठी जो वहां मिली। बताओ क्या किया तुमने? थानेदार साहब ने आँखे लाल करते हुए पूछा कि ये अंगूठी तुम्हारी ही है ना? बताओ? नही तो हमारे पास भी तुम्हारे झूठ का इलाज हैं!

सहमी, डरी हुई सालिनी कि आखों से आंसू बहने लगतें है, अपने गुनाहों का आज उसके सामने खाका खुलता हुआ दिखाई दे रहा था, किसी और के द्वारा नही बल्कि स्वयं के ही द्वारा। वह रोती हुई कहती है कि हां मैंने ही बिरजू की हत्या की। "लेकिन आपके कारण ही।"

थानेदार ने चौकते हुए पूछा "मेरे कारण!,,,

हा आपके ही कारण, आपके सिस्टम के कारण, मैं आपके सिस्टम से,आपसे और सारे जजों को दुश्मन मानती हूं।

जिसने एक शीला को न जाने कितने किरदार निभाने को क्रलिष्ठ बना दिया। मेरे पति को झूठे हत्या के केस में सजा बिरजू ने ही न्यायधीश के रूप में सुनाई थी, मेरे पति ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी, तभी निश्चय किया कि बदला लूंगी। इसलिये मैंने अपने जाल में बिरजेंद्र को फसाया।

ये सब उस श्रुति के कारण ही किया।

"मैं जानबूझकर उनके घर मे किरायदार बनकर आई थी, कुछ महीनों के अंदर मैने श्रुति और बिरजू का विश्वास जीत लिया,और बिरजू को तो अपनी माया में लिया।

जब ग्रीष्म के बाद प्यासी धारा पर प्रथम वर्षा होती हैं तो जल धरती की सतह में जा बैठता है, उससे उठने वाली हर गंध हमे सुधन्धित लगती हैं।

मैने उसके मन को भाव लिया था, उसे प्रेम की प्यास लगी थी, जो वह अपने काम मे व्यस्तता और परिवारजनों से दूर रहने के करण नही मिल पाती थी,उसको जीवन मे कमी महसूस होती थी, श्रुति से भी उसकी अक्सर अनबन रहती थी, उसके विचारों का तालमेल उससे नही होता था,जिसका मैंने फायदा उठाया। उसके विचारों में मेरी साफ छवि जो निर्मल प्रेम के आडंबरों से मंडित हुई भी अच्छी लगती थी, उसके मन मे श्रुति और मेरे प्रेम के बीच मे तुलनात्मक विचारों ने जगह ले ली थी।

जहाँ उसे श्रुति का छुपा और अप्रकट प्रेम नही दिखाई देता था और मेरा विषैला प्रेम उसे स्वर्ग के समान दिखाई पड़ता था।

जब मुझे लगा कि अब बिरजू को मैने अपने प्यार के बस में कर लिया हैं, तो एक रात को मैंने वो लगती करबा दी जिससे बिरजू मेरी हर बात मानने को मजबूर हो गया, मैंने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया था, की अगर उसने सारी प्रोपर्टी मेरे नाम नही की तो मैं उसके खिलाफ दुष्कर्म का आरोप लगा सारी मीडिया के सामने उसे बदनाम कर दूंगी। मगर श्रुति को मेरे और बिरजु के सम्बन्धो के बारे में पता चल गया। मैंने सोचा था कि इसमें मेरा ही फायदा होगा कि श्रुति घर और बिरजू को छोड़कर चली जायेगी, तब मैं आराम से बिरजू को ठिकाने लगा दूंगी। फिर सारी प्रॉपर्टी और मकान मेरा।

लेकिन उस कम्बख़्त श्रुति के कारण मेरा पूरा प्लान ही नष्ट हो गया",,,सालिनी ने दाँत पीसते हुए थानेदार साहब कहा।।

थानेदार साहब बोले,,,,"बहुत शातिर निकली तू तो",,,,अब तो जेल में अक्ल ठिकाने आयेंगी तेरी। श्रुति ने क्यों तेरा प्लान बिगाड़ दिया,ऐसा क्या किया उसने?

"श्रुति ने घर छोड़ने की बजाय बिरजू का साथ दिया, उसकी कमजोरी ही उसकी मजबूत सहारा बनती जा रही थी, बिरजू को उसने मेरे खिलाफ रिपोर्ट करने का बोला था, वह उसके प्रेशर में था किंतु स्वच्छंद रूप से वह निर्णय नही ले पा रहा था मैंने मौका देखते ही उसे उसकी जगह पर पहुँचा दिया किन्तु श्रुति, और रिमझिम घर में नही थी नही तो उन्हें भी मौत के घाट पहुँचा देती। फिर आसानी से मेरा रास्ता साफ था।"

जब तुमने मारने का सोचा था तो ज़हर देकर उसे फंदे पर क्यों लटका दिया? थानेदार साहब ने सालिनी से पूछा,,

सालिनी थानेदार साहब से कहती है कि मौका अच्छा था, श्रुति और रिमझिम दोनों घर पे नही थे, सुबह चाय के बहाने बिरजू को बुलाया जिसमे नींद की गोलियों को मिलाकर पिला दी, कुछ समय बाद वह बेहोशी में जा पहुँचा, फिर उसे फंदे से लटका सुसाइड का मामला बना दिया। और फिर मैं वहाँ से फरार हो गई थी। ये इसलिये किया क्योकि श्रुति को लगे कि बिरजू ने आत्महत्या की है उसे मुझ पर बिल्कुल भी शक नही होगा।

थानेदार ने सालिनी की तरफ आतंकित दृष्टि से देखते हुए कहा कि तुझे ज़रा सा भी कानून का डर नही लगा। हत्या कितना कठिन जुर्म है, आरोपी कितना भी शातिर, चालक, और बदमाश हो कानून के लिये कुछ न कुछ तथ्य छोड़ ही जाता है, तुमने न सिर्फ हत्या ही कि बल्कि श्रुति और रिमझिम को भी मारने का इरादा बनाया। अगर कभी न्यायधीश ने कोई गलत फैसला भी दे दिया तो उसके लिये आप उच्च और सर्वोच्च न्यालय आदि संस्थानो का सहारा लेकर अपने लिये न्याय की मांग कर सकते है, इस प्रकार कानून को अपने हाथों में लेना और इरादतन वारदातों को अंजाम देना, आप कभी भी अपने साथ न्याय नही कर सकते।

अब रिमझिम किसी प्राइवेट कंपनी में नॉकरी करने लगी, मनुष्य का स्वभाव ही ऐसा होता है कि उसके जीवन में किसी के आने या जाने के बाद मूलतः जिम्मेदारी का अहसास होने लगता हैं। श्रुति अब अपने बगीचे में फूलों की नर्सरी के द्वारा अपने अकेलेपन को दूर करती हैं।


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