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Shiv kumar Barman

Abstract Fantasy Inspirational

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Shiv kumar Barman

Abstract Fantasy Inspirational

मैं कलम हूं

मैं कलम हूं

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तू न सोचना की ये दुनिया वालों,

मैं डरकर यूं कुछ ना बोलूँगी ।

जब तक मेरे सीने में सांस रहेगी,

मैं तब तक तुझको यूं तोलूंगी ।।


बेचारों को बारूद बना,

तू अग्नि कुण्ड में झोंक रहा।

ईसा,मूसा,यहोवा कह,

तू अपने स्वार्थ को सेंक रहा।


परमाणु युद्ध की भभक रही,

चारों तरफ चिंगारी है।

दुनिया दहशत झेल रही,

ये तेरी कारिस्तानी है।


देख दुदुम्भी द्वंद की,

मैं कैसे चुप कर सो लूंगी।

तू न सोचना दुनिया वालों,

मैं डरकर कुछ ना बोलूँगी।।


नारी हूं, नारायणी हूं,

मैं जगत कल्याणी हूं।

शांति,क्षमा,धृति,धैर्य की,

मैं धरा बन धारी हूं।


जब - जब धरती पर पाप बढ़े,

तब - तब दुर्गा अवतारी हूं।

मुझे ना छेड़ शुंभ सेवक बन तू,

मैं तेरे स्वामी की काली हूं।


देख तेरे दंभ को,

मैं विंध्यवासिनी बनकर तोड़ूंगी।

तू न सोचना दुनिया वालों,

मैं डरकर कुछ ना बोलूँगी।।


किसान, बेबस,मजलूमों की,

मैं उभरती हुई आवाज़ हूं।

मानवता के मर्म की,

मैं जलती हुई मशाल हूं।


हत्या,हिंसा,बलात्कारी की,

मैं दहकती हुई अंगार हूं।

सत्ता के सिरहाने की,

मैं ना ही कोई शुक्रगुजार हूं।


देश - प्रेम पर, मर मिटने की,

बस धरती मां की उधार हूं।

जब - जब जनता पर जुल्म बढ़ेगा।

मैं एक - एक को ना छोड़ूंगी।


तू न सोचना दुनिया वालों,

मैं डरकर कुछ ना बोलूँगी।।





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