'' इंतजार "
'' इंतजार "
वृद्धा आश्रम के दरवाजे पर
बैठी बूढ़ी मां करती है
पल पल अपने बेटे का
आने का इंतजार किया करती है ।
तड़पती हुई उसकी आंखें
दरवाजे पर टिकी होती हैं,
भुला नहीं पाती वह
अपने बच्चों के प्रति अपना प्यार को ।
दिन महीने साल बीत जाते हैं
पर खत्म नहीं होता इंतजार,
हर पल दिल में
सजाए रखती है वो झूठी आस ।
इंतजार करते-करते
वह छोड़ जाती है यह संसार,
फिर भी बेटा नहीं
आ पाता उसके पास ।
