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Twinckle Adwani

Abstract

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Twinckle Adwani

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कर्म

कर्म

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सुरभि बहू व किरण बुआ के बीच कई बार झगड़ा होता है किरण बुआ नाराज होकर बैठ गई और कहने लगी मैं बहुत अकेली हो गई हूं तो सुरभि बहू ने फिर कह दिया कि आप कि सखी वृद्ध आश्रम में मिली थी कह रही थी बहुत खुश हूं मेरा बहुत ध्यान देते हैं या किसी चीज की कमी नहीं है। 

अप्रत्यक्ष रूप से सुरभि की कही गई बातों का अर्थ किरण बुआ बहुत अच्छी तरह समझ गई और सोचने लगी कि मैंने पति के जाने के बाद एक अनाथ बालक को गोद लिया उसे पढ़ा लिखा कर काबिल बनाया आज वही बच्चे मुझे घर से निकाल रहे हैं और रात भर रोती रही अगले ही दिन में वृद्धाश्रम चली गई। 

सुरभि बहू ने बुआ को घर से निकालने के बाद अपनी मां को घर में बुलाना चाहा और जब मां को फोन किया तो उसे भाभी ने बताया कि वह वृद्ध आश्रम में रहती हैं आप वहां फोन लगा लीजिए सुरभि को अपनी गलती का एहसास होने लगा उसे बहुत दुख हुआ कि मां का अपना घर है फिर भी वह वृद्ध आश्रम में है भाभी ने उनकी सेवा नहीं की और वह खुद सोचने लगी कि मैंने भी तो यही कर्म किया है।

और सोचती है लोग कहते हैं अगले जन्म में पाप चुकाने पड़ते हैं मगर मुझे तो इसी जन्म में देखने मिल कहीं मेरा बच्चा ऐसा ना करें और सोच कर वृद्ध आश्रम जाती हैं और अपनी सास को वापस लाती हैं। उनकी एक मां कि तरह सेवा करती है।जिससे धीरे धीरे उनके रिश्ते मे सुधार होता है।


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