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kacha jagdish

Horror Fantasy Thriller

4  

kacha jagdish

Horror Fantasy Thriller

किताब

किताब

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स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल है। पिछले कुछ दिनों से स्कूल के एक हिस्से में बड़ी अजीब घटना घट रही है। बच्चे और स्कूल प्रशासन भी डरा हुआ है। और उसमें भी आज एक बच्चा उस हिस्से में चला गया। पता नहीं उसने क्या देखा की वो बहुत डर गया और चिल्लाते हुए वहाँ से भागता हुआ आया। हालात इतनी खराब थी की उसे पूछने पर कुछ नहीं बता पाया। इस सबको देखते हुए स्कूल प्रशासन ने उस हिस्से में सबका जाना बंध करने का निर्णय ले लिया।


उस हिस्से को बंध किये हुए हफ्ता होने को आया है। राजू जो की एक नटखट बच्चा है, और अपनी शैतानियों के लिए स्कूल भर में मशहूर है। आज उसने होमवर्क नहीं किया था। और होमवर्क ना करने वालो को कडी सजा मिलने वाली थी, जब यह बात राजू को पता चला तो वह उस सजा से बचने के लिए क्लास से भाग गया। लेकिन अब उसके सामने यह सवाल था की वह जाये कहाँ। तभी उसे याद आया की स्कूल का जो हिस्सा बंध है उसमें कोई आता जाता नही, इसलिए उससे ज्यादा सुरक्षित स्कूल में कोई जगह नहीं होगी। राजू सीधा उस हिस्से की ओर सबसे छूपते हुए भागा। उसे याद आया की वहाँ एक लायब्रेरी है। राजू उसमें छुप जाता है। 


थोड़ी देर शांति से बैठे रहने के बाद जब उसे लगा की वह क्लास शुरू हो गई है तो वह लायब्रेरी में घूमने लगता है। सारी किताबें उसकी रेक में पड़ी थी लेकिन एक किताब नीचे पड़ी हुई थी। उसने ध्यान नहीं दिया। राजू घूमता रहा। थोड़ी देर बाद देखा तो वह किताब उस जगह से दूर पड़ी हुई थी। राजू नटखट होने के साथ थोड़ा जिज्ञासु था, तो जानने के लिए यह कैसे हुआ, या चूहा कहाँ है। राजू ने किताब उठा ली। 


"चलो, देख लेता हूँ। उसमें क्या लिखा है। आखिर यहाँ करने के लिए और कुछ भी नहीं है। "


उसमें लिखा था। यह कोई साधारण किताब नहीं है। और अगर तुम यह पढ़ रहे हो मतलब तुम उस छाये के आसपास हो। तुम्हारे लिए यह जानना बहुत जरूरी है की वो छाया आखिर है क्या?? और साथ में उसमें उसके साथ लड़ने का तरीका भी लिखा है। 


राजू इतना पढ़ा ही था की उसे लगा की कोई ओर भी है। राजू इधर-उधर देखने लगा लेकिन कोई नहीं दिखा। वह आगे पढ़ने ही जा रहा था की उसे सफेद धुआं दिखा जो की आंखों के सामने से गुजरा। वह कुछ समझ पाता उससे पहले लायब्रेरी में पड़ी किताबों में से वैसा ही धुआं निकल के उस पे हमला करने लगा। राजू बचने के लिए उस किताब का सहारा ढाल की तरह लेता है। तो किताब एक धनुष में बदल जाती है और उसे बचा लेती है। इतने में उसे भागने का मौका मिल जाता है। राजू उस किताब के साथ वहाँ से भाग जाता है। भागकर वह अपने क्लास में जा पहुंचता है। 


राजू क्लास के सब लोगो सच बताता है लेकिन कोई भी उसकी बातों पर भरोसा नहीं करता। और सजा से बचने का बहाना मान लेते है। और उसे क्लास रूम के बहार मुर्गा बनाने की सजा दी जाती है। स्कूल खत्म होती है। राजू उस किताब को लेकर घर को चला जाता है। घर में स्कूल में जो हुआ वह सब कहता है, लेकिन घर के सब लोग उसकी शैतानियों से वाकिफ थे इसलिए सबने अनसुना कर दिया। 


अपने कमरे में पूरे वाक्या के बारे में सोच रहा था की उसे उस किताब की याद आती है। राजू किताब अपनी बैग में से निकलता है और पहले से पढ़ने लगता है। 


किताब में लिखा था की यह सब एक समय की बात है जब कई तांत्रिक मिलकर किताब पर अपनी शक्ति का प्रयोग कर रहे थे और उनकी इस प्रयोग की सफलता के तौर पे उन्होंने एक धुआं जैसी शक्ति को जागरुत किया। यह शक्ति किताब और पढ़ने वाली साधन सामग्री पर अपना प्रभाव दिखाते है। उनके प्रभाव से ज्ञान की बातें, ज्ञान के प्रति रुचि कम होने लगती है। ऐसा ही उन तांत्रिक के आजू-बाजू होने लगा। जब लोगों को पता चला तो उन्होंने अच्छे तांत्रिक से मिलकर उन्हें दूर करने की कोशिश की। उन तांत्रिकों में से मैं भी एक था। और हम सबने मिलकर एक प्रयोग किया। जिसके फल स्वरूप हमें यह जादुई किताब प्राप्त हुई। 


ये किताब दिखने में आम किताब जैसी ही है लेकिन उस धुएं से लड़ने के लिए धनुष में बदल जाती है। 


हमने काफी कोशिश की। कई सालों तक लड़ाई चली लेकिन हमें उन्हें रोकने कामयाबी जरूर मिली। फिर भी धरती पर से भगा नहीं पाये। जब भी एक विशेष समय बनता है तो वो धुआं धरती पर आता है। 


यह जानकर हम सब तांत्रिक ने इस जादुई किताब पर एक जादू किया जिससे जभी वो धुआं धरती पर आये तो यह किताब वहाँ हो। और इसलिए ही यह किताब वहां मिली होगी। अब तुम्हें आगे देखना है तुम्हें क्या करना है। 


राजू किताब को अपनी बैग में वापिस रख देता है। आम किताब की तरह अपने साथ रखता। 


एक दिन स्कूल में सबको पता चला की उस हिस्से में चीखने की आवाज आ रही थी। सब लोग बहुत डर गये और इसके चलते स्कूल कुछ दिनों तक बंद करने का फैसला लिया गया। राजू भी सबकी तरह स्कूल में से निकल गया। लेकिन रास्ते में उसे खयाल आया की क्यों ना किताब की बात परखी जाये। इसलिए वो स्कूल वापिस जाता है। सब लोग जा चुके थे। स्कूल बिल्कुल सूनसान था। 


राजू अपनी बैग में से वो जादुई किताब निकालता है। स्कूल के उस हिस्से की ओर आगे बढता है। 


जैसे ही उस हिस्से में राजू पहुंचता है तो वो धुआं सारी ज्ञान की बातें किताबों में से खा रहा था। वह किताब को आगे करता है लेकिन कुछ नहीं हुआ। राजू सोचने लगा की फस गया। और वहाँ से भागने लगा लेकिन इतने में ही धुआं जान जाता है और उसकी ओर आगे बढ़ता है।


वह बचते हुए स्कूल में छुप जाता है। वह किताब को देखकर बोलता है की फसा दिया तूने। तभी किताब का एक पन्ना खुलता है। उसमें लिखा था की इसे धनुष बनाने के लिए इसे पढ़ने के लिए किताब जैसे पकड़ते थे वैसे पकड़ना पड़ता है। राजू बोलता है, " धनुष चलता कैसे है?" किताब में दिखता है माना तुम किताब पढ़ रहे हो ठीक वैसे ही।


राजू ज्यादा समझ में नहीं आता लेकिन जैसा लीखा था ठीक वैसा ही करता है। किताब धनुष में बदल जाती है। अब चलाने के लिए पढ़ने की कोशिश करता है। धनुष चलता भी है। 


राजू अब वहाँ से निकल के स्कूल के गेट की तरफ भागता है। 


लेकिन धुआं उसे बीच में ही रोक लेता है। राजू भी बचाव में लड़ने लगता है। लड़ते हुए उसे दिखाई देता है की वह एक दरवाजे के इर्द-गिर्द धुआं घूम रहा है। ऐसे ही देखा तो कुछ दिखा लेकिन जब किताब सामने रखकर देखा तो दरवाजे पर लिखा था की, 


' ज्ञान से कुछ प्राप्त नहीं होता इसलिए ज्ञान बेकार है। '


राजू दरवाजे पर निशान लगाते हुए कहता है की, " ज्ञान से ज्ञान प्राप्त होता है उस ज्ञान से सब कुछ।" 


धनुष से एक तीर निकलता है और दरवाजे को लगता है। दरवाजा टूट जाता है। सारा धुआं उसमें खींच जाता है और सब सामान्य हो जाता है। 


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