Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!
Republic Day Sale: Grab up to 40% discount on all our books, use the code “REPUBLIC40” to avail of this limited-time offer!!

Ruchi Singh

Abstract Children

4  

Ruchi Singh

Abstract Children

खुशियों की बहार

खुशियों की बहार

3 mins
274


कमल राधा की शादी काफी धूमधाम से हुई थी। कमल अपने घर का अकेला बेटा था। उसके घर में उसके अलावा माता-पिता और दादाजी थे। कमल व राधा की शादी के 8 महीने बाद ही राधा के पैर भारी हो गए। 

बच्चे की आने की खबर सुनते ही घर में खुशियों की बहार सी आ गई। माता-पिता और कमल के दादा जी सब बहुत ही खुश हुए। 

राधा की भी खुशी का ठिकाना ही ना था। राधा को बच्चे के नन्हे कदमों की आहट मानो कोई खजाने जैसी महसूस हो रही थी। बड़ी चाहत थी राधा को मां बनने की। 

अब तो राधा को खाने पीने में बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता। कुछ भी खाने में अच्छा न लगे। कुछ न कुछ तकलीफ सी बनी रहे पर बच्चे का अपने अंदर सुखद अहसास उसे बहुत ही सुखमय लगता। 

कमल राधा का बहुत ध्यान रखता है और राधा की सासु मां भी घर के पहले वारिस होने के कारण राधा का बहुत ध्यान रखती हैं। समय-समय पर उसका जो मन हो सब खाने को दे देती हैं। उनका मन है बेटा हो या बेटी जो भी बच्चा हो स्वस्थ रहें। डॉक्टर के यहाँ जाकर समय-समय पर चेकअप कराती रहती हैं ।

राधा को 5 महीने पूरे होने पर अब बच्चे की हलचल महसूस होने लगी है। राधा डॉक्टर के यहां सोनोग्राफी के लिए जाती है। वहां सोनोग्राफी में बच्चे का पूरा शरीर, छोटे-छोटे आंख, नाक, कान, हाथ, पैर सब देखकर राधा बहुत ही हर्षोत्साहित होती है। अब तो दिन रात राधा को बच्चे के ही सपने आते रहते हैं। वह बहुत ही खुश रहती है। 

सातवें आठवें महीने में राधा को अब बच्चों के पैरों के आघात अपने गर्भ में महसूस होते हैं। जब राधा चॉकलेट खाएं तो बच्चे का मूवमेंट बहुत ही तेज हो जाता और उसकी अनुभूति राधा को बहुत सुख पहुंचाती है। 

धीरे-धीरे बच्चे की हलचल महसूस करते करते 9 महीने पूरे हो गया। एक दिन अचानक राधा को प्रसव पीड़ा शुरू होती है और उसके घर वाले उसे हॉस्पिटल ले जाते हैं। 

4 घंटे की पीड़ा सहने के बाद एक शिशु के तीव्र क्रंदन की आवाज से अस्पताल का वातावरण गुंजायमान हो उठा। कमल व उसके सभी परिजनों मे एक खुशी की लहर दौड़ गई। ऐसा पहली व आखिरी बार होता है, जब किसी मां को बच्चे का क्रंदन भी बहुत संतुष्टि प्रदान करता है। राधा भी मन ही मन खुशी से भगवान को शुक्रिया अदा करने लगी।

सिस्टर बच्चा लाकर राधा की सासु मां को दे देती हैं। सासू मां, कमल सब बहुत खुश है। 

थोड़ी देर बाद राधा को लेबर रूम से प्राइवेट वार्ड में शिफ्ट करते हैं तब वह बच्चे को पहली बार देखती है।राधा के गालों पर बच्चे को पहली बार देखने के खुशी के आंसू लुढक पड़े। 

नया मेहमान बिल्कुल सफेद रूई के फाए जैसा, काले काले घुंघराले बाल, बड़ी-बड़ी आंखें ,बिल्कुल लाल होंठ, बहुत ही सुन्दर, प्यारे, मासूम गुलाब के फूल जैसे मुंह में हाथ डाले राधा को देख रहा है।

थोड़ी देर बाद राधा ने बच्चे को स्तनपान कराया उसकी जो अनुभूति उसको हुई उसको शब्दों में बया करना मुश्किल है। राधा को आज अपने पूर्ण होने का एहसास हुआ। राधा एक लड़की से एक मां बन गई। 

मां बनने का अनुभव दुनिया में सबसे सुखद व अविस्मरणीय अनुभव है। जो हर स्त्री अपनी जिंदगी में उठाना चाहती है। 

3 दिन बाद ! 

राधा को अस्पताल से छुट्टी मिल जाती है। वह कमल के साथ घर पहुंचती है। 

सासू मां ने घर में बच्चे के स्वागत की तैयारी की हुई है। वह राधा को बोली कि तुम बच्चे को लेकर अपना पहला कदम घर के अंदर रखो। 

कमल के दादा जी जो कि अब परदादा बन गए हैं उनकी तो खुशी से आंखें झर झर बहने लगी। वह अपने छोटे से पड़पोते को हाथों में लेकर बहुत ही खुश होते हैं और उसे खूब आशीष देते हैं। अपने परिवार की वंश बेल को अपनी आँखों के सामने ही फलता फूलता देखकर खुशी से फूले नहीं समाते हैं।

 धन्यवाद ! 

आपकी रुचि ! 


Rate this content
Log in

More hindi story from Ruchi Singh

Similar hindi story from Abstract