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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

Abstract

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कलमकार सत्येन्द्र सिंह

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जय-वीरू

जय-वीरू

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जय अब बूढ़ा हो गया था.बहुत ज्यादा चलने फिरने की ताकत न रह गई थी उसमे.दो बच्चों का पिता वीरू जो अब घर सम्भालता था, उसका ही बेटा था.

दोनों में दो दिन से एक झगड़ा चल रहा था.जय, कोरोना के इस वातावरण में आवश्यक सामान लेने बाहर जाना चाहता था तो वीरू नहीं चाहता था कि जय घर से बाहर निकले.नए किरदार के ये जय-वीरू एक दूसरे को बचाना चाहते थे.


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