संस्कार
संस्कार
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वह दुल्हे मंडी में गए।
तरह तरह के दुल्हे...देसी...विदेशी...सरकारी नौकरी वाले...बिजनेस वाले...खानदानी रईस...आदि।
सबकी अपनी कीमत...लाख...दो लाख...करोड़...
कोई साईकल में ही बिकने को तैयार...तो कोई बेटियों के आदान प्रदान वाले बार्टर सिस्टम में संतुष्ट होने को तैयार।
सबसे ज्यादा कीमत तो घर जमाई की थी।
एक दूल्हा संस्कारी था...वह मुफ़्त में उपलब्ध था।
