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Monika Jayesh Shah

Horror Action Thriller

4  

Monika Jayesh Shah

Horror Action Thriller

जिंदगी मिलेंगी ना दोबारा..

जिंदगी मिलेंगी ना दोबारा..

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कहानी लिखने से पहले दोस्तों एक बात कहनी है.. में तो एक छोटी सी writrup हू.. जो दिल से कविता और कुछ विचार लिखती हूं... हा कुछ अलग अहसास सी जो दिलमे दिलसे आता वहीं.. आप सब का धन्यवाद करती हू.. आप पसंद करते है लाईक करते है.. खास कर story mirrior पर हमे एक नया प्लेटफार्म मिला है.. जहा हम अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते है...

चलो फ़िर शुरू करते एक आप बीती कहानी.. लिखने की नयी कोशिश के साथ ..

एक दिन की बात है.. चोमासा बारिश का समय था.. हम रात की बस में अपने गांव जा रहें थे... ननिहाल..

रात के अंधेरे में सुनसान सफर पर.. स्लीपर कोच बस में सफ़र कर रहे थे.. किसे क्या पता था की ज़िन्दगी में ऐसा हादसा भी होगा.. सफर के पहले जब बस में बैठे तो कोई किसी को और कोई किसी को अलविदा कर रहा था..सबके गाड़ी में जानें की अपने अपने मुकाम पर दिल में एक अलग सी खुशी थी...बस आगे बढने लगी..रास्ते में एक ढाबे पर खाने रुकी फिर सबने खाना खाकर...बस में बैठे और..सो गए...एक गहरी नींद में... सुबह की एक नई आशा के साथ अपने अपने घर पहुंचने की... अचानक मध्य रात्रि जब सब गहरी नीद में सो चूके थे.. बस एक डिवाडर से टकराई और पेट्रोल गिरने से आग लग गई,। सब पूरी नींद में थे... थी किसी को कुछ पता नहीं था की हमारे साथ क्या होने वाला है.. हम तो अपने गांव छुट्टी मनाने की खुशी में अपने घर परिवार के साथ जा रहें थे...

हमारे सामने वाली बगल की खिड़की में एक भाई ने कांच फोड़ा और हमे जल्दी उतारने की कोशिश की... हमे जैसे गाड़ी से बाहर बोरा में समान भरते है ..वैसा फेका क्योंकि समय नहीं था और बस धीरे धीरे आग पकड़ रही थीं सब की चिल्लाहटे सुनाई दे रही थी बचाओ बचाओ... कोन कही दौड़ रहा था.. कोन सो रहा था.. कोई जल रहा था आखों के सामने थरारक मंजर देखकर किसी को सूझ नही रहा था की क्या करे अपनी जान कैसे बचाए.. वो तो धन्य उस भाई का जिन्होंने मदद की और हमे बहार फेका..पर खुद उस आग में स्वाहा हो गया... सोचा ना था की ऐसा मंजर ऐसा किस्सा जो हमारे साथ हुआ.. देखने को भी मिलेगा हमे.. और खुद अपने साथ होगा, चोटे बहुत आयी पर उस वक्त जान बचेगी भी नही खुद को ही पता ना था...

बस कहना यही है ..कि ज़िन्दगी सिर्फ एक बार मिलती है.. उसे खुशी से जियो क्या पता कल ये ज़िन्दगी दोबारा ना मिले.. ये तो हमारी खुशनसीबी थी की हम अपने परिवार से दोबारा मिल पाए .. दोस्तों बस कहना यही है.. अपनी ज़िन्दगी है खुशहाल तरीकों से जियो आप जैसा जीना चाहते है वैसे ही.. किसी की ख़ुशी में तुम्हें ख़ुशी मिले.. या अपनी खुशी से किसी को एक नया मुकाम.. जो जी में आए वही करो क्या पता ये ज़िन्दगी कब चली जाये और हम रहे ना रहे... ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा।


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