DEEPTI KUMARI

Abstract


4.5  

DEEPTI KUMARI

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जिंदगी और मौत

जिंदगी और मौत

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जॉन बेहद परेशान था। परिवार की बढती जिम्मेदारी और मेरिया के साथ उसके झगडों से वो बहुत खिन्न रहने लगा। नौकरी चले जाने से परिवार पर आर्थिक संकट भी आ गया था। जॉन आजकल शराब भी पीने लगा जिससे मेरिया उसकी पत्नी बहुत नाराज रहती थी। एक दिन मेरिया और जॉन का झगड़ा बहुत बढ गया मेरिया गुस्से में घर छोड़ कर चली गई। जॉन का पूरा परिवार पूना में रहता वो नौकरी के सिलसिले में मेरिया के साथ मुंबई रहता था। जॉन के फादर की भी तबियत ठीक नही रहती थी उनके इलाज का खर्च और छोटे भाई जोजफ की पढाई का खर्च भी जॉन के कन्धे पर था। नौकरी जाने से वो बेहद परेशान और हताश था। वो हमेशा जान देने के बारेमें सोचता रहता" ऐसी जिन्दगी से अच्छा मर ही जाउँ...न ये सब देखूँगा न दुख होगा...ओह जीसस हेल्प मी अदरवाइज़ किल मी...मै अब और कुछ नही देखना चाहता ...जीसस " हताशा भरे स्वर में जॉन ने कहा। जॉन इतना डिप्रेस था कि उसे नीन्द ही नही आ रही थी...उसने शराब में मिलाकर नीन्द की गोलियां खा ली। उसे अचानक से बहुत हल्का मेहसूस हुआ यूं लगा जैसे उसके शरीर में कुछ है ही नहीं आस पास का शोर उसे बहुत धीमा सुनाई दे रहा था और धीरे धीरे सब शान्त हो गया उसकी आंखे बन्द हो गई। जब उसकी आंख खुली तो उसने खुद को एक अन्धेरी जगह पाया...एक बन्द संकरी जगह...वो किसी बॉक्स में बन्द था..जॉन बार बार हाथ से बॉक्स को मारने लगा चीखने लगा। " खोलो मुझे...बाहर निकालो...मुझे घुटन हो रही है" जॉन बार बार चिल्ला रहा था। बहुत देर चिल्लाने के बाद किसी ने बॉक्स खोला वो कोई सफेद चेहरे वाला अधेड था जिसका नाम पीटर था। उसने उसे बॉक्स यानी ताबूत से बाहर निकाला।

"कौ..कौन हो तुम...मैं यहां कैसे आया..मैं तो घर पर था" धबराहट भरे स्वर में जॉन ने कहा।

"तुम यंग मैन भी न...ड्रामा बहुत करता है..एक तो खुद मरेगा और मानेगा भी नहीं ...तुम घर पर 2 दिन पहले था अब तुम अपने नये घर कब्रिस्तान पर हो " सफेद चेहरे वाला पीटर बोला।

"कब्रिस्तान....मैं मरा कब..."आश्चर्यचकित होकर जॉन ने पूछा।

"2 दिन पहले जब तुम नीन्द की गोलियां खा कर सोया था ..अरे मैन तुम्हारा वेलकम है आजकल यंग मैन खूब आ रहा है इधर" हँसते हुये पीटर ने कहा।

"ये कैसे हो सकता है मैं इतनी जल्दी नहीं मर सकता" जॉन बोला।

"अरे तुमको मरना नहीं था तो जहर खाया क्यों"? पीटर ने सवाल किया।

"मैंने..वो मैने दुखी होकर खा लिया ..मैं सच में मर जाऊंगा ये नही पता था " उदास होकर जॉन बोला।

"मौत और जिन्दगी दोनो से मजाक नही करते यंग...अब यहाँ आ गये हो तो यहां का माहौल देख लो आओ मैं तुम्हे पूरा कब्रिस्तान घुमाता हूँ" पीटर बोला।

पीटर उसे अपने साथ घुमाने लगा वहां का माहौल बेहद डराने वाला था। मुर्दे अपनी कब्रों से बाहर बैठे थे वो जिस तरह मरे थे उसी तरह बैठे थे घायल होकर मरे तो घायल थे हाथ पैर टूटने से मरे तो टूटे थे..ट्रेन से कटने से मरे तो कटे हुये थे। किसी का सर अलग किसी का धड अलग..।

"पीटर यार कब कपड़े बदल पाऊंगा कब जन्म मिलेगा कब खाना खा पाऊँगा...15 साल से ऐसे रह रह के बोर हो गया हूँ" एक भूत ने पीटर से कहा। "और आत्महत्या करो...अब जब तक तुम्हारा एज पूरा नही होगा तुम ऐसे ही भटकेगा..." पीटर बोला।

"क्या हुआ था इनको" जॉन ने सवाल किया।

"ये पिंटो है घर मे लडाई होने पर इसने आत्महत्या कर लिया था..अब जब तक इसका एज पूरा नही होगा ऐसे ही रहेगा...बैसे तुम्हारा साथ अच्छा निभा देगा..जब ये आया था तब तुम्हारी एज का था" कहकर पीटर हंस पडा। पीटर और जॉन अलग अलग कब्रो से गुजर रहे थे पीटर सबकी कहानी उसे बता रहा था। तभी वो दोनो एक औरत की कब्र से गुजरे..पीटर को देखते ही उस औरत ने मुह घुमा लिया।

"ये कौन हैं..." जॉन ने सवाल किया।

"ये अपना वाइफ है..रोजी..बहुत नाराज है मुझसे..."पीटर ने जवाब दिया।

" क्यों नाराज क्यों...झगड़ा हुआ क्या"? जॉन ने अगला सवाल किया। "हम शराब बहुत पीता था और एक दिन शराब हमको पी गया..मेरे मरने के बाद रोजी ने बहुत प्रोब्लम फ़ेस किया...फिर रोजी भी मर गया..और मरने के बाद यहां आया। लेकिन जबसे आया है हमसे नाराज है..बोलता है तुम्हारे वजह से सब हुआ...हा हा हा मगर प्यार बहुत करता है हमको" पीटर बोला। उसकी बात सुन जॉन सोच में पड़ गया।

"क्या मैं अपने घर जा सकता हूँ थोडी देर के लिये" जॉन ने सवाल किया।

" नही..मैन अब से तुम्हारा घर परिवार सब ये ही है...बैसे तुमको जाना क्यों है घर" पीटर ने कहा।

"मेरिया को पता नही होगा...सब कैसे सम्हालना है भाई की फीस का और पापा की दवाई भी लाना था...बहुत जरुरी है..." जॉन बोला।

" अब सब तुम जीसस के भरोसे छोड़ दो.."पीटर का जवाब था। "लेकिन.."

"ये तो तुमको पहले सोचना था..अब टाईम निकल गया है " पीटर ने जॉन के कन्धे पर हाथ रख कहा।

"पीटर बस एक मौका...मै सब ठीक कर दूंगा" जॉन बोला।

"नो माय सन...तुमने देर कर दिया..शायद तुमको पता नहीं तुम्हारे सुसाइड के अगले दिन ही बॉस तुमको दोबारा बुला रहा था जॉब पर..." पीटर ने बताया।

"क्या...ओह नो..."जॉन उदास हो गया।

"हां जॉन...मेरिया भी बहुत बीमार पड़ गई है क्योकी वो प्रेगनेंट थी और तुम नही रहे" पीटर के इतना कहते ही जॉन रोने लगा। "ओह नो ...ये मैने क्या कर दिया...मेरिया..मॉम डैड..जोसेफ सबका फ्यूचर खराब कर दिया...और उस अजन्मे बच्चे का भी" रोकर जॉन बोला।

"जल्दबाजी मे कोई फैसला नही लेना चाहिये माय सन..अगर तुम थोडा वेट कर लेते तो मेरिया का कॉल आता तुम्हे..वो घर आना चाह्ती थी गुड न्यूज़ देने " पीटर ने कहा। "अब मैं क्या करूं ...कैसे जाऊं..अगर मैं नही पहुचा तो सब बर्बाद हो जायेगा"। रोकर जॉन बोला।

"अब तो तुम्हे 40 साल तक यही इसी हालात में रहना होगा ...तुम सब देख सकोगे मगर कर कुछ नही पाओगे..मौत किसी समस्या का हल नही है..तुम खुद ही बताओ तुम कब ज्यादा असहाय थे आज या कल " पीटर ने जॉन की ओर मुखातिब होकर पूँछा।

"बहुत बड़ा मिस्टेक कर दिया मैने...सब बर्बाद कर दिया..सब बर्बाद कर दिया...सब बर्बाद कर दिया..."जॉन चीख चीख कर रोने लगा। "अब पछताने के अलावा तुम कुछ नही कर सकते ये कहकर पीटर ने जॉन को ताबूत में फेक दिया ताबूत में गिरते ही जॉन की आंख खुल गई वो चौंक कर उठा...तो उसने खुद को बिस्तर पर पाया...सपना था..जॉन महज एक सपना देख रहा था चारों ओर देख उसने राहत की सांस ली। उसका सर बहुत दुख रहा था दिन के 2 बज रहे थे नशे की वजह से उसकी आंख ही नही खुली थी मगर सपने ने उसकी आंखे जरुर खोल दी थीं। उसने अपने परिवार की तस्वीर को देखा फिर गॉड को देखा।

"जीसस आप मुझसे क्या कहना चाहते थे मैं समझ गया। "जॉन की आंखो में आंसू थे उसने उठकर सबसे पहले शराब की बोतलों को फेंका..फिर अखबार मे vacancy को अंडरलाईन किया। मॉम डैड से बात की और भरोसा दिलाया कि वो दवाई और फीस दोनो का इन्तेजाम कर देगा। फिर उसने मेरिया को फोन लगाया।

"हेलो मेरिया....शाम को तैयार रहना मैं लेने आ रहा हूँ अभी एक इंटरव्यू देने जा रहा हूँ शाम को आकर पिक करता हूँ"....जिस आत्मविश्वास से जॉन ने बात की मेरिया भी आश्वस्त और खुश थी। जॉन को भी भरोसा था....वो सब ठीक कर देगा। एक दिन की मौत ने उसे जिन्दगी की कीमत समझा दी थी।


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