Himanshu Sharma

Abstract Comedy

3  

Himanshu Sharma

Abstract Comedy

जीव-हत्या

जीव-हत्या

1 min
395


मेरे एक जानकार पान की दुकान चलाते हैं और साथ ही में चाय की टपरी भी उन्होंने खोल रखी है! मकर संक्रांति अभी बस हाल ही में गई थी और मैं वहाँ टपरी पे चाय पी रहा था कि तभी मैंने उनसे पूछा:

"क्या भाईसाहब कैसी रही संक्रांति? खूब पतंग उड़ाई होगी आपने?"

"नहीं भाईसाहब! माँझे से जीव-हत्या के 'चान्स' बन जाते हैं इसलिए मैंने पतंग उड़ानी छोड़ दी"

तभी हमारे संवाद को भेदती इक आवाज़ आई, "भैया! गुटखा दीजियेगा!", उन्होंने उसे गुटखा पकड़ा दिया और मैं मुस्कुरा उठा! उन्होंने भी मेरी मुस्कराहट की वजह भाँप ली और वो थोड़े सकुचा गये! हम दोनों के मन में प्रतिगुंजित था एक ही वाक्य,"माँझे से जीव-हत्या होती है इसलिए पतंग उड़ानी छोड़ दी", मैं मुस्कुराये जा रहा था और वो शर्माये!


Rate this content
Log in

Similar hindi story from Abstract