Twinckle Adwani

Abstract

3.9  

Twinckle Adwani

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इस प्यार को क्या नाम दूं

इस प्यार को क्या नाम दूं

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सपना, यह गाँव की पहचान है स्कूल से कॉलेज हर क्षेत्र में प्रथम आती है। सपना के पिता के सामने अक्सर लोग बातें करते हैं पिता को गर्व होता है मगर उसके आसपास के वातावरण को लेकर भी वे चिंतित होते हैं। सपना की मां कैंसर के चलते छोटी उम्र में ही उसे छोड़कर चली गई घर में दादा-दादी पिता व चाचा चाची, चाचा नशे के आदी थे। नशे में मारपीट करते, अपनी जिम्मेदारी नहीं ली, न परिवार की. जिसके चलते पत्नी ने एक दिन घर ही छोड़ दिया

दादी हर काम खुद करती है कई कामो कि जिम्मेदारी सपना ने ले ली मात्र नवी क्लास में थी मगर हजार सपने उसके, पिता से उसका व्यवहार एक दोस्त की तरह था घर की आर्थिक स्थिति सामान्य थी 

गांव में मात्र दसवीं तक के स्कूल था,उसने टॉप किया अखबारों में सुर्खियां बनी गांव में मीडिया वालों उसका साक्षात्कार लेने आए , उनकी प्रसिद्धि बढ़ गई पूरा गांव मानो बधाई के लिए आने लगा पिता दादी इतने खुश थे कि बिना मिठाई खिलाए किसी को नहीं भेजते थे ।

दादा दादी को तो विश्वास ही नहीं होता था कि गांव में उनका नाम पोती करेगी अब हर जगह परिवार का मान सम्मान बढ़ गया था ।मगर गांव में आगे की शिक्षा के लिए स्कूल नहीं था ।लेकिन पास वाले गांव में था और सपना आगे पढ़ना चाहती थी पिता ने खुशी खुशी उसे एक साइकिल लेकर दी जिससे वह पास वाले गांव में आसानी से जा सके सपना न केवल पढ़ाई बल्कि हर काम को बड़ी कुशलता से करती थी ।

दादी अक्सर उठते बैठते हैं चाचा से कहती है तेरे नालायक बेटे से तो मेरी पोती अच्छी है मगर उन्हें कुछ कहना मतलब उलटे घडे़ में पानी डालना, पिता चाचा के विचारों में काफी मतभेद था मगर मेरे पिताजी बहुत ही नेक दिल इंसान थे मेरे लिए मेरे पिताजी सर्वश्रेष्ठ इंसान थे ।

 पापा ने मुझे साइकिल ले कर दी, कभी बारिश तो कभी तेज धूप कई बार बीमार हो जाती जिसके चलते कहते अब आगे की पढ़ाई मत करो ,तुम्हारे ऊपर घर की भी कोई जिम्मेदारियां है ।एक बार खराब मौसम के कारण बहुत देर से पहुंची फिर साईकल भी खराब हो गई ।

घर आते ही पिता की चिंता झलक रही थी गांव की एकलोती बेटी थी जो पढ़ने जाती थी। हमारी आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे मजबूत हो चुकी थी काफी संपन्न हो चुके थे इसके चलते एक बाई रख कर दी जिससे दादी और मुझे मदद मिलती थी ।साथ ही मुझे एक गाड़ी ले कर दे ताकि मैं जल्दी व सुरक्षित घर पहुंच सकूं

 मैं 12वीं का रिजल्ट भी बहुत अच्छा रहा अब गांव में कॉलेज न थे न आगे की कुछ जानकारी, सबको लगा बस, मगर मेरे स्कूल के प्रचार्या ने घर आकर पिता जी से मेरे आगे की पढ़ाई की बात की , मैंने कॉलेज जाने के सपने देखना शुरू कर दिया |

बहुत मनाया मगर सबको डर था  मुझे अकेले दूर नहीं भेजना चाहते थे मैंने पापा से बात नहीं की, खाना भी ढंग से नहीं खाया .आखिर पापा मान गए पापा मेरे एडमिशन के लिए खुद देखने गए थे कालेज, फिर मुझे साथ लेकर गए पूरे रास्ते में मैं खुश थी । बड़ी बड़ी सड़कें, बड़ी-बड़ी गाड़ियां , रोशनी आधुनिक वस्तुओं, वस्त्रों सजे धजे लोग अब मैं बच्चे की तरह चहक रही थी। पिताजी खुद भी खुश दिख रहे थे एक प्रसिद्ध कॉलेज में मेरा दाखिला मिल गया मैं जहां हॉस्टल में रहूंगी पिताजी ने बहुत देख परख मेरे लिए हॉस्टल चुना


 गांव में सब बधाई देने आने लगे कुछ तो डराने भी कि, शहर की हवा खराब है बच्ची कहीं बिगड़ न जाए कुछ दिनों बाद आखिर पूरा परिवार मुझे छोड़ने आया दादी रोने लगी दादा जी खुश थे ।कोई तो शहर आया पढ़ने, पिताजी खुश थे मगर शांत भाव से देख रहे थे कभी मुझे अलग नहीं किया इसलिए चिंतित भी थे।

पापा ने मेरे पसंद की हर चीज मुझे भेजी थी और हर थोड़े दिन में वह मेरे लिए मेरी पसंद के समान खाने-पीने की चीजें ढेर सारी लाते थे मां की तरह ही ध्यान रखते थे। कॉलेज की पढ़ाई शुरू हो गई

मैं हमेशा से गर्ल्स स्कूल में पढ़ी ,कभी लड़कों से ज्यादा बात ही नहीं की मगर शहर का रहन सहन माहौल अलग था । यहां लोग भेदभाव नहीं करते थे आपस में लड़के-लड़कियां बैठते खाते घूमते मैं भी उस माहौल में ढलने लगी सबसे बातें करती रविवार को हम सब मिलकर घूमते थे मैंने शहर नहीं देखा था तो हर इतवार बस शहर ही देखते थे नई नई जगह जाना नई चीजें खाना ,मेरी दोस्ती आकाश से हुई जो मेरे साथ पढ़ता था बहुत अच्छा नेकदिल लगता था हम एक दूसरे से बातें करते हमारी दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई , कई ऐसी बातें होती थी जो न पापा से कर पाते न दादी से, मगर हम आकाश से करते थे! 

वह भी हमें उतने ही विश्वास और प्यार से हर बात बताता था हमारी दोस्ती गहरी थी यह बहुत लोग जानते थे मगर इसके बारे में हम दोनों के घरवालों को कुछ पता नहीं था मेरे हर जन्मदिन में आकाश को बहुत अनमोल बना दिया  मुझे गिफ्ट खुद बनाकर देता था बहुत अच्छा आर्टिस्ट था वह लिखता भी था वह मुझ पर भी लिखता था मुझे बहुत खुशी होती थी उसकी बनाई गई पेंटिंग आज भी मैंने संभाल कर रखी है उस जमाने में मोबाइल नहीं हुआ करते थे तब लैंडलाइन फोन हुआ करते थे हम चोरी चुपे बातें कर लेते थे एसटीडी से तो कभी कहीं से वैसे तो हम कॉलेज में मिलते थे मगर कई छुट्टियों में हम मिल नही पाते थे । चिट्ठी से भी हमारी बातें होती थी ।

 आकाश मुझे अच्छी तरह समझता था मैं बिन मां की बच्ची थी कुछ कमियां तो जीवन में थी जिसे उसने पूरी कर दी उसके लिए भी उतनी ही खास थी जितना वह मेरे लिए, हमारी हर सुबह एक दूसरे की मुस्कान से शुरू होती थी और हर रात एक दूसरे के लिए प्रार्थना कर .दीवाली की लंबी छुट्टियों में ही मैं घर जाती थी पापा से चिट्ठी में बात हो जाती थी मेरी पढ़ाई को 5 साल हो चुके थे। पापा मेरी शादी को लेकर बातें करते , कई रिश्ते सामने से आते हैं मैं मन ही मन आकाश का रिश्ता बहुत मजबूत हो चुका था हम एक दिन भी बिना मिले नहीं रह सकते थे।प्यार इंसान को बहुत बदल देता है हम साथ साथ जीने मरने की हजारों सपने देखे मेरा प्यार सच्चा था आकाश का भी ,हमने कुछ ऐसा नहीं किया जो हमारी मर्यादाओं के खिलाफ हो।

 पिताजी गांव आने की जिद करते वापस गांव जाने का मन था मगर आकाश के बिना जीना मुश्किल लगता था पिताजी ने कहा इस बार बार तुम गांव आओगी तो शादी कर के जाओगी। मैं जब गांव गई तो पापा ने कहा कुछ दिनों बाद तुम्हें कुछ लोग देखने आ रहे हैं हैं उनका बेटा शहर में नौकरी करता है ।मैं पापा से कई बातें कहना चाहती थी मगर हिम्मत नहीं हुई काश मां होती, मैं पूरी रात सो नहीं पाई , मैं जब भी सामने जाती है उनका मुस्कुराता हंसता चेहरा देखकर हिम्मत नहीं होती थी फिर मैंने आकाश से लैंडलाइन में बात की बड़ी हिम्मत कर , हमने पापा से बात की मगर पापा नहीं माने, गांव में जात-पात और अमीरी गरीबी  कई चीजों को लेकर सोच अलग थी। मैंने बहुत कोशिश की मगर पापा टस से मस नहीं हुए पापा ने कहा मैंने तुम्हारी हर बात मानी है , यह बात नहीं मानूंगा 

* उसे भुलाना मेरे बस में नहीं और पाना किस्मत में नहीं*

आकाश के पिता नहीं थी मां ने ही से पाला उसके घर वाले भी नही मान रहे  थे न मेरे, आकाश की मां ने काफी संघर्ष कर पाला था जमाने की कई बातें सुनी थी वह नहीं चाहती थी और बाते सुने ,वह शादी के लिए यहां तक कह दिया अगर शादी की तो मेरा मरा हुआ मुंह देखोगेहम दोनों कि कोशिशें नाकामयाब रही दोनों की शादी सब की मर्जी से हो गई मैंने पिता को धोखा देने की कोशिश की मगर मेरे संस्कार मुझे इजाजत नहीं दे देते बचपन से जिस पिता ने प्यार किया उसे धोखा नहीं दे सकती थी।बंधनो मे बंधे से हम रिश्ते निभा रहे थे दिल से तो नही, मेरी नौकरी जारी रही कॉलेज में पढ़ाती थी शायद ही कोई ऐसा दिन हो जब हमने दूसरे को याद ना किया हो, आकाश ने मुझे आकाश जितना अनंत प्यार किया ।

पति का ट्रांसफर हो गया आकाश से कभी-कभी बात होती थी यह भी इतफाक था कि हम एक हि शहर में थे ।नौकर चाकर सब है मगर जीवन में कुछ अधूरा था ।पति इतने व्यस्त थे कि सारी जिम्मेदारियां मुझे ही ही निभानी पड़ती थी मैं एक आदर्श बहु, आदर्श पत्नी ,सुपर मॉम कही जाती हूं


मेरे अकेलेपन के चलते लिखना शुरू किया धीरे-धीरे एक बहुत अच्छी लेखिका बन गई मेरी पहली किताब छपी *इस प्यार को क्या नाम दूं* जिसमें ने अपने जीवन के कुछ अनुभव खट्टी मीठी यादें कुछ अधूरी इच्छाओं के बारे में लिखा फिर भी एक अकेलापन सा था किसी से कुछ कह नहीं सकते ,*सच में पहले प्यार को भुलाना मुश्किल होता है*

*कितनी बुरी लगती जिंदगी जब हम तन्हा महसूस करते हैं मरने के बाद मिलते हैं चार कंधे और जीने की हम एक के लिए तरसते हैं*

 हम दोनों ने एक दूसरे को धोखा नहीं दिया फिर भी धोखेबाज हो गए बच्चों की उम्र अब शादी की हो गई जब विदेश में रहते थे मगर मुझे गांव में रहने का मन था पति अक्सर अपने काम से बाहर ही रहते थे मोबाइल का जमाना हो चुका था मोबाइल से बच्चे बातें करते थे धीरे-धीरे फेसबुक भी आ गया, एक दूसरे को देख लिया करते थे बेटा विदेश में ही रहना चाहता था उसका विवाह विदेशी लड़की से हुआ पति उसके खिलाफ से मगर मैंने अनुमति दे दी मैं नहीं चाहती थी कि हम अपने नियम बच्चों पर थोपे आज वह बहुत खुश है कभी-कभी वीडियो कॉल में बात हो जाती है । जब उसे शादी की अनुमति दी तो उसे बहुत हैरानी हुई क्योंकि उसे लगता था मां गांव में रहन-सहन से आई है बड़ी संस्कारी आदर्शवादी है वह नहीं मानेगी मगर मैं मान गई ,उसे हैरान होती थी जिस पर मुझे हंसी आ जाती थी ।


कुछ दिनों बाद पति ने भी अपनी बहू को स्वीकार कर लिया दादी दादू नहीं रहे हैं ,चाचा अपने व्यवसाय के सिलसिले में शहर में बस गए पापा गांव में अकेले हैं, जीवन के अंतिम पड़ाव में मैं उनके साथ रहना चाहती थी और मै पापा के पास रहने लगी पापा ने मुझे मां की तरह पाला अब वह मुझे कहते हैं तू मेरी मां बन गई है।


 पापा की तबीयत खराब थी कई दिन अस्पताल में रहे ,मेरी गोद मे अंतिम सांस ली ,आज बहुत अकेली हो गई हूं जीवन के अनमोल रिश्ता नहीं रहा,कुछ दिनों बाद आकाश की मां का भी निधन हो गया ऐसा लगा हमारे जीवन में सब खत्म हो गया मगर कहां... धीरे-धीरे हम सब अपने अपने कामों में लग गए मन में एक कमी जिसे कभी कोई पूरी नहीं कर सका मैं कॉलेज के प्रिंसिपल बन गई, लोगों को मुफ्त में शिक्षा देते हैं रिटायरमेंट की उम्र में हम चाहते हैं कि हम एक कॉलेज खोलें और अपना जीवन समाज सेवा में समर्पित करें 

आज मैंने अपने घर को वृद्ध आश्रम बना लिया है क्योंकि ना जाने कितने ऐसे मां ,बाप हैं जो अकेले रहते हैं ,मेरा घर बहुत बड़ा है पति भी यही चाहते थे स्कूल बनवा दिए अब कॉलेज भी है। कई दिनों से पति बीमार हैं।और कई बार कहते हैं मेरे जीवन को जिया नहीं मगर तुम जियो जीवन को सार्थक करो बनाना मैंने अपना पूरा जीवन संपत्ति कमाने में लगा दिया  पैसों की कोई कमी नहीं है जिसके चलते आर्य समाज का मंदिर बनवाया जहां प्रेमी जोड़े विवाह करते हैं

खुशी महसूस होती है न जाने क्यों ,शादी संस्कारों मर्यादाओं की नहीं प्यार विश्वास की होनी चाहिए पति भी बीमारी के चलते नहीं रहे, बच्चे भी विदेश में आज मैं अकेली हूं और आकाश भी हम ओल्ड एज होम और मंदिर संभालते हैं हमारे रिश्ते का कोई नाम नहीं मिला मगर सबसे गहरा और प्यारा रिश्ता है मर्यादा संस्कारों से बंधा ,बिन कहे हमें दूसरे की बात आज भी समझ जाते हैं ।

* सच्चा प्यार ईश्वर की तरह होता है जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं लेकिन महसूस कुछ ही लोग करते हैं*

*समझ नहीं आता इस प्यार को क्या नाम दूं*



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