'' गुज़ारिश ''
'' गुज़ारिश ''
गुज़ारिश ये तुमसे कि हमारी वीरान सी ज़िन्दगी में आना,
हमारा सूना सा पड़ा घर-आंगन अपने हाथों से सजाना ।
गुज़ारिश ये तुमसे कि जब-जब भी तुम हमें याद करना,
तब-तब उतनी बार आकर हमसे सनम तुम मिल जाना ।
गुज़ारिश ये तुमसे कि सुख में चाहे याद नहीं तुम करना,
पर दुख-दर्द, तकलीफ़ और मुसीबत में सदा याद करना।
गुज़ारिश ये तुमसे कि प्यार के बदले में प्यार ही बरसाना,
बदले में हमने भी तुमसे बेपनाह इश्क सदा जान करना।
गुज़ारिश ये तुमसे कि उम्रभर एक-दूसरे के साथ है रहना,
तुम्हारे दिल के आशियाने में तमाम उम्र हमने अब रहना।
गुज़ारिश ये तुमसे कि तुम कभी किसी पे फ़िदा ना होना,
खेलने का खिलौना समझ कर मेरा दिल तोड़ नहीं देना।
गुज़ारिश ये तुमसे कि अपने मन के घरौंदे में है रखना,
पारस बनाकर कहीं पत्थर हम को बनाकर ना जाना।
गुज़ारिश ये तुमसे कि अपना जीवन हमारे नाम करना,
मरीज़-ए-मोहब्बत तो इश्क़ की दवा हमेशा देते रहना।
