STORYMIRROR

बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

4  

बेज़ुबानशायर 143

Abstract Fantasy Inspirational

आस का दीपक जला लूं

आस का दीपक जला लूं

1 min
369

दूर कर लो अपने सारे अंधकार को

आज उनको अपने आलोक प्राण में भर लूं

 तमस की सारी तोड़ कर लड़ी को 

उन दीपों की पंक्ति से यूं जग को जगमगा दूं


अपने हृदय को उनकी बाती बना कर

ये नूतन को अपने सपनों की ज्योत जला दूं

 मैं अपने ही आत्मशक्ति के बल पर 

मेरे इस बूझे मन की हर आस को यूं जगा दूं


कौन कहता है इस तिमिर अधिक घना है

इसका भी है तो वो अंत कहीं पर है 

इसको भेद को आगे यूं बढ़ना है

तुम्हें ही तो इस प्रलय की आंधियों से लड़ना है


तेरे हाथ को थाम कर मैं

एक आस का दीपक जला लूं

तुम भी कदम से कदम बढ़ा कर यूं देखो तो

पीछे-पीछे ये कारवां भी तेरे अपने आप चलेगा


मैं एक आस का दीपक जला लूं

मेरे पास आकर तुम भी देखो तो



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi story from Abstract