Dipesh Kumar

Drama


4.3  

Dipesh Kumar

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एक विवाह ऐसा भी

एक विवाह ऐसा भी

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विवाह किसी के भी जीवन में बहुत महत्व पूर्ण होता है।चाहे लड़का हो या लड़की,सबको अपने जीवन में अच्छे जीवन साथी की इच्छा होती हैं।रोहन भी एक बहुत ही सीधा साधा समझदार लड़का था।तीन भाइयो में सबसे बड़ा था और पढ़ाई करने के लिए घर से दूर रहता था।जीवन में धन दौलत की ज्यादा इच्छा नहीं थी रोहन के पास बस उसका एक ही मकसद था दूसरों को खुश रखना और जीवन का आनंद लेना।अपनी दसवी की परीक्षा के बाद ही वो घर से दूर वाराणसी चला गया।आगे की पढाई वाराणसी में करने के बाद उसने वाराणसी के एक बड़े विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।ये सब इसलिए संभव था क्योंकि वो बहुत ही मेहनती और पैसो का महत्व जानता था।शुरुवाती समय में उसे छात्रावास नहीं मिला लेकिन उसने कॉलेज के पास में ही एक कमरा ले लिया।लेकिन कमरे के किराए के लिए उसने कॉलेज के बाद बच्चो को पढ़ाने का काम किया।वैसे तो रोहन के पिताजी सेना में कार्यरत थे लेकिन रोहन जितना कम हो सकता था उतना ही पैसा पिताजी से मांगता था।संघर्ष और कड़ी मेहनत से उसने अपनी स्नातक और परास्नातक की पढाई पूरी करके एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्य करने लगा।रोहन का छोटा भाई सेना में था और उसके विवाह के लिए आये दिन रिश्ते आ रहे थे।लेकिन पिताजी का कहना था कि सबसे पहले बड़े भाई की शादी होगी फिर छोटे की इस कारण भाई उदास रहता था,क्योंकि उसके सभी मित्रों की शादी लगभग हो चुकी थी और सेना में होने के कारण कब ट्रांसफर हो जाये पता नहीं था इसलिए छोटा भाई शादी के लिए चिंतित था।

रोहन अभी पढ़ना चाहता था,क्योंकि रोहन के सपने कुछ और बनने का था।इसलिए विवाह के लिए अभी उसके मन में कोई विचार नहीं था।रोहन अपनी प्राइवेट शिक्षक के नौकरी के साथ साथ पढाई भी करता था।इसलिए बहुत ऐ प्रतियोगी परीक्षाएं भी देता रहता था।मन जब निरास हो जाता था जब साक्षात्कार या एक दो नंबर से नियुक्ति रुक जाती थी।रोहन कभी भी अपनी परेशानी किसी को नहीं बताता था।एक दिन पिताजी ने फ़ोन किया कि ,"बेटा रोहन अब विवाह कर लो नौकरी तो तुम्हे मिल ही जायेगी,और समस्या ये हैं कि छोटे भाई के लिए रिश्ते आ रहे हैं।"ये बात सुनकर रोहन का दिमाग खराब हुआ और गुस्से में अपने पिताजी से कहने लगा कि जिसको विवाह की जल्दी हैं वो कर ले।पर पिताजी बोले समाज क्या बोलेगा,की बड़ा लड़का अभी बैठा हैं और छोटे की शादी हो गयी।रोहन ने कहा समाज को जो बोलना हैं बोलने दो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता हैं।इतना बोल कर रोहन ने फ़ोन काट दिया।दरहसल रोहन अपनी परीक्षाओं में असफल और सरकारी नौकरी न मिलने के कारण दुखी चल रहा था।कुछ दिन बाद रोहन ने पिताजी को फ़ोन करके माफ़ी मांगी और कहा,"पिताजी उस दिन आपसे गुस्से से बात करने के लिए माफी चाहता हूँ।मैं जानता हूँ आप क्या चाहते हैं,लेकिन मैं अभी विवाह के लिए तैयार नहीं हूँ।"

पिताजी ने रोहन को समझाते हुए कहा कि,बेटा विवाह तो आज नहीं तो कल करना ही हैं,और सब सही हो जाता हैं।पिताजी रोहन से उम्मीद के साथ पूछते हुए बोले की अगले हफ्ते यहाँ तुम्हारे चाचा चाची जायेंगे और हो सकता हैं तुम्हारे लिए लड़की भी देखे।इसलिए मना मत करना।"मैं सोचने लगा की जिंदगी भर तो माँ बाप ने ही सब कुछ किया हैं मेरे लिए और अब उन्होंने इच्छा जाहिर की हैं तो पीछे क्यों हट रहे हो?सच कहा जाए तो रोहन विवाह के लिए तैयार नहीं था लेकिन पिताजी के आगे और परिवार के ख़ुशी के लिए वो कुछ भी कर सकता था।कुछ समय बाद उसने अपने मन को मनाते हुए सोचा की चलो अगर सब मेरे इस निर्णय से खुश हैं तो मैं विवाह कर ही लेता हूँ।

एक हफ्ते बाद चाचा चाची रोहन के पास पहुँच गए।रोहन के रिश्ते के लिए 3 से 4 लड़कियों के रिश्ते आये हुए थे।रोहन के चाचा चाची ने कहा,रोहन तुम चल कर लड़कियों को देख लो और बात कर लो जो पसंद आ जाये।रोहन ने कहा,आप लोग देख लीजिये क्योंकि मैंने आज तक किसी लड़की से बात नहीं की और विवाह के लिए लड़की पसंद करनी हैं तो आप लोग मेरे लिए गलत रिश्ता तो ढूंढेंगे नहीं।"ये बात सुनकर रोहन की चाची बोली,"कैसा लड़के हो तुम,आज के समय में लड़के लड़की आपस में बात करके अपना विवाह के लिए अपनी पसंद नापसंद बताते हैं।इतने में रोहन ने कहा,"देखिये लड़की को देखने जाना और ना पसंद होने पर उसको विवाह के लिए मना करना मुझे सबसे बड़ा गुनाह लगता हैं,इसलिए आप लोग तय कर लीजिए मैं विवाह कर लूंगा। रोहन के चाचा चाची ने एक लड़की पसंद की,लेकिन लड़की वालो ने चाचा चाची को अपने घर पर नहीं बुलाया और कहा हम लोग आप जहा बोलो वह अपनी लड़की को लाकर दिखा देंगे।लेकिन आप अपने लड़के को भी बुला लीजिये।वैसे तो रोहन ने मन किया था,लेकिन पिताजी ने कहा था जो चाचा चाची कहेंगे कर लेना मन मत करना।

रविवार का दिन सुनिश्चित हुआ और लड़की के घर वाले लड़की को लेकर आ गए एक मंदिर पर।रोहन घबराया हुआ था,क्योंकि आज तक उसने किसी लड़की से बात नहीं किया था।चाचा चाची ने लड़की वालो से पूछा,लड़का कैसा हैं हमारा? सब ने कहां,लड़का सुंदर हैं और हम लोगो को पसंद हैं।फिर उन्होंने कहा हमारी लड़की आप लोगो को पसंद हैं कि नहीं?तो रोहन के चाचाजी ने गुस्से में कहा,विवाह के लिए हम लोगो की सहमति से पहले लड़के लड़की की सहमति जरुरी हैं।लेकिन सब इतना जल्दी हो रहा था कि रोहन को अजीब सा लग भी रहा था।लड़की वालो ने कहा लड़का लड़की आपस में बात कर ले और बता दे।रोहन ने कहा,जो चाचा चाची कहेंगे मैं कर लूंगा।इतना बोलकर रोहन पानी पीने के बहाने वह से चला गया।विवाह के लिए सबकी सहमति बन गई लेकिन रोहन ने लड़की को देखा तक नहीं था। चाचा चाची ने रोहन के माता पिताजी को कहा कि रोहन के लिए लड़की पसंद हो गयी हैं।

रोहन के विवाह की बात पक्की होते ही उसके छोटे भाई सोहन का विवाह भी पक्की हो गयी।विवाह के लिए रोहन के पिताजी और चाचाजी ने तैयारियां शुरू कर दी क्योंकि 3 माह बाद ही शादी का मूहर्त था।रोहन अभी भी अपने घर से दूर नौकरी पर था।पिताजी ने कहा बेटा विवाह के लिए तुम्हे जल्द ही घर पर आना होगा क्योंकि अब समय ज्यादा दिन का नहीं हैं।रोहन ने कहा पिताजी आप सब चीज़ तय कर दीजिए मैं विवाह के कार्यक्रम से दो दिन पहले पहुँच जाऊँगा।पिताजी ने कहा ठीक हैं जैसा तुम चाहो।विवाह की तैयारिया जोरो शोरो से चल रही थी।इसी बीच चाचाजी ने कहा ,लड़की का घर और बारात कैसे ले जानी हैं ये तो हमने देखा ही नहीं,इसलिए रोहन के चाचाजी और रोहन के मामाजी दोनों लोग जाकर बारात और ठहरने का स्थान देखने लगे।दरहसल लड़की का घर ग्रामीण क्षेत्र में था और गाडी लाने में परेशानी थी।इसलिए चाचाजी ने बात किया कि आप लोग किसी लॉन में शादी क्यों नहीं कर लेते।लड़की के पिताजी बोले,गाँव के लोग क्या कहेंगे?कि एक हो लड़की थी और उसकी शादी भी घर से नहीं लॉन से।इसलिए चाचा जी और मामा जी ने वही रुकने और बारात लाने का रास्ता सुनिशित किया।

रोहन के पास एक दिन अंजान नंबर से फ़ोन आया तो वो सोचने लगा की किसका फ़ोन है,रोहन में फ़ोन उठाया तो आवाज़ आई,जीजाजी नमस्ते,मैं दीपक बोल रहा हूँ, गीता का भाई।जिस लड़की से विवाह तय हुआ था उस लड़की का नाम ही गीता था।रोहन ने दीपक से हाल चाल लिया और कहा कि घर का हाल चाल कैसा हैं? दीपक ने रोहन से कहाँ,"जीजाजी क्या आपको मेरी दीदी से बात नहीं करनी क्योंकि आज के समय में शादी तय होने के बाद लोग एक दूसरे से बात करते हैं और एक दूसरे को जानते हैं।"रोहन ने कहा देखो शादी होने के बाद तो बात करना ही हैं न,फिर रोहन के मन में एक विचार आया की कही गीता मुझसे कुछ कहना चाहती हैं क्या?"इसलिए रोहन ने कहा अच्छा ठीक हैं दीपक तुम अपनी दीदी से मेरी बात करवाओ।रोहन ऐसे घबरा रहा था जैसे कोई लड़की,गीता ने जैसे ही कहा ,"हेल्लो नमस्ते,रोहन लड़खड़ाते हुए बोला नमस्ते कैसी हैं?बात होने के दौरान रोहन ने पूछा जो उसके मन में विचार आया था,क्या आप शादी से खुश हैं?अगर कोई बात हैं तो आप मुझे बता सकती हो।गीता ने शर्माते हुए फ़ोन काट दिया।रोहन ने फिर फ़ोन नहीं लगाया। वो समझ गया था कि कोई बात नहीं हैं,विवाह की तैयारी शुरू होने वाली थी,रोहन भी अपने घर पहुँच गया।लगभग सभी रिस्तेदार एकत्रित हो गए थे औए शादी की रस्मे चल रही थी,सब बहुत खुश थे और हो भी क्यों न घर पर दोनों लड़को की शादी जो थी।रोहन और सोहन का विवाह एक दिन के अंतराल में थी।बारात बस द्वारा रोहन के घर से निकली जो दूसरे दिन गीता के घर पहुँचनी थी।लेकिन रोहन के मन में न जाने कैसे विचार आ रहे थे।दूसरे दिन बारात पहुची,सभी लोग इतने लंबे सफर के बाद थक चुके थे। जब बारात गीता के घर के नजदीक पहुचने वाली थी तो चाचाजी ने गीता के पिताजी को फ़ोन किया।तो उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया।फिर चाचाजी ने उस व्यक्ति को फ़ोन किया जिसने ये विवाह तय करवाया था। चाचाजी ने बताये हुए स्थान पर बस कड़ी करवाई तो देखा की कही भी रहने की कोई व्यवस्था नहीं की गयी हैं।पिताजी क्रोधित होकर पूछने लगे ये सब क्या हैं कोई स्वागत करने के लिए नहीं खड़ा हैं न ही कोई रुकने की व्यवस्था?चाचाजी पिताजी को शांत करवाते हुए बोले,"भैया रुकिए कोई समस्या होगी,मैं अभी पता करता हूँ।तो पता चला की बारात रुकने का स्थान बदल गया हैं।चाचाजी बस के साथ दूसरे स्थान पर पहुँचे तो गीता के पिताजी वही खड़े थे और बोले भैया फ़ोन कही भूल गया हूँ।लेकिन जिस स्थान पर बरात को रोकने की व्यवस्था की गयी थी वह पर न लाइट थी और न ही पानी की व्यवस्था। चाचाजी ने गीता के पिताजी से कहा की ये सब क्या हैं?आपलोग समझ नहीं रहे हैं कि बारात कितने दूर से आई हैं?छोड़िये हम सब अपनी व्यवस्था खुद देख लेंगे।चाचाजी ने पास ही के एक धर्मशाला में बरात रोकी,ये सब देखकर पिताजी के साथ साथ रोहन को भी गुस्सा आ रहा था,क्योंकि बारात में लोग तरह तरह की बाते कर रहे थे और हंस रहे थे।

शाम को बारात तैयार होकर विवाह स्थल पहुँचने के लिए निकली तो बहुत खराब रास्ता था।फिर भी बारात विवाह स्थल पर पहुंची तो बहुत ही वीरान गाँव था। रोहन बस गुस्सा को काबू करके विवाह करने जा रहा था।रोहन सोच रहा था कि कही कोई बात तो नहीं हैं,लेकिन रोहन के पास किसी का नंबर नहीं था तो वो अपने दिमाग को शांत करके बैठ गया।बारात घर पर पहुंची तो घर वालो का अजीब सा स्वागत था।समझ नहीं आ रहा था कि विवाह होने वाला हैं या कुछ और रोहन अब परेशान हो रहा था और मन में बुरे विचार आ रहे थे। विवाह के मंडप पर पहुँचने पर भी कोई ख़ास प्रबंध नहीं था।रोहन ने चाचाजी से कहा ये सब क्या हो रहा हैं,चाचाजी ने कहा बेटा लगता हैं गरीब परिवार हैं इसलिए ढंग से कुछ नहीं कर पा रहे हैं।लेकिन कुछ देर बाद हल्ला होने लगा की तो पता चला की बारात आते समय बारात के कुछ लोगो से गाँव के कुछ शरारती तत्वो ने धक्का मुक़्क्की की हैं।गीता और उसके घर की औरते मंडप में आए।लेकिन गीता का चेहरा उदास लग रहा था मानो वो शादी से खुश नहीं हैं,रोहन के मन में और घबराहट होने लगी की ये सब सुबह से क्या हो रहा हैं।क्या चल रहा था कुछ समझ नहीं आ रहा था।इतने में गीता बेहोश होकर गई गयी।घर वाले उससे उठा कर ले गए और कुछ देर बाद शरारती तत्व और गाँव के लोग कहने लगे की ये शादी नहीं करनी हैं, लड़के वाले दहेज़ मांग रहे हैं और लड़की को लड़के ने कहा कि शादी बाद तुझे देख लूंगा।ये सब सुनकर बारात के सभी लोग गुस्सा होकर कहने लगे ये क्या फ़ालतू बात कह रहे हैं ये सब,मेरे तो कुछ समझ नहीं आ रहा था कि हो क्या रहा हैं और होने क्या वाला हैं।इतने में गाँव के लोग बन्दूक पत्थर और धारदार हत्यार लेकर बारात को घेर लिए औए बोले शादी का पूरा खर्च दो ,लड़की शादी नहीं करना चाहती।रोहन जहा खड़ा था वही बैठ गया और मन ही मन रोने लगा।चाचाजी ने गीता के पिता से कहा कि ये सब क्या हैं तो वो भी कहने लगा आपलोग दहेज़ के चलते मेरी लड़की को मार दोगे।मामा पुलिस में थे वो समझ गए की बात कुछ और हैं इसलिए तुरंत उन्होंने कण्ट्रोल रूम फ़ोन करके बरात की सुरक्षा के लिए कुछ पुलिस कर्मी बुलाये।पुलिस ने पूरी बात समझी और मामाजी से कहा आप लोग कहा इन लोगो के चक्कर में पड गए।इस गाँव का माहौल बहुत गन्दा हैं।फिर पुलिस अधिकारी ने लड़का और लड़की पक्ष को बिठाकर कहा शादी होगी तो ठीक हैं नहीं तो फिर थाने में बात होगी।अगले दिन सोहन की शादी थी।रोहन अब परेशान होकर रोने लगा।रोहन के मित्र ने कहाँ भाई रो मत और दबाव में आकर कुछ गलत चीज़ मत बोल देन।

लड़की वाले बोले की लड़के ने लड़की को कहा कि शादी बाद बताऊंगा।पुलिस इस गाँव के माहौल से वाकिफ थी तो पुलिस ने कहा लड़के और लड़की को बुलाओ सामने बात होगी।लड़का पहले से मौजूद था,लड़की बहुत देर तक नहीं आई तो पुलिस अधिकारी ने दो महिला पुलिस कर्मी को भेजा तो पता चला लड़की कमरे में नहीं हैं।पुलिस समझ चुकी थी और मामाजी को बुलाकर कहा कि लड़की भाग चुकी हैं।आप लोग संपन्न परिवार से हैं इसलिए आपलोग यहाँ से चले जाइए।गाँव से बाहर निकले तो मामाजी ने सब बात पिताजी चाचाजी और रोहन को बताई। रोहन उदास होकर गाडी में जाकर बैठ गया और सोचने लगा की किसकी गलती हैं इसमें?अगले दिन सोहन की शादी थी।इसलिए बारात बिना शादी के गाँव से दूर निकल गई।चाचीजी सोचने लगे की मैंने अपने लड़के के साथ क्या कर दिया।इसकी जिंदगी खराब कर दी।इतने में मामाजी ने कहा,सोहन की शादी शाम को हैं।यदि आप लोग तैयार हो तो मैं रोहन का विवाह दोपहर तक करवा दूँ?सब अच्चम्भ में थे की ये सब कैसे होगा।रोहन को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था मानो उसको सदमा लग गया था।शादी करनी इसलिए जरूरी थी क्योंकि जब बारात घर पर पहुँचेगी तो सब लोग तरह तरह की बाते करने लगेंगे।रोहन के मामाजी ने दोपहर तक शादी के लिए एक परिवार को तैयार कर लिया और लड़की को देखने के लिए मामाजी ने मुझे और चाचाजी को लेकर बाकी की बारात को छोटे भाई सोहन के विवाह के लिए भेज दिया।दोनों तरफ दुःख का माहौल था बारात का माहौल गम भरा हो गया था।रोहन अब बिलकुल टूट सा गया था।लेकिन वो अपने परिवार को कभी भी दुखी नहीं देख सकता था।दूसरी लड़की के घर पहुँचे तो सबने स्वागत किया और सबको बैठने का निवेदन किया।मामाजी ने पूरी बात बताई तो लड़की वालो ने कहा कि कोई बात नहीं आप हमारी लड़की को देख लीजिए।रोहन बहुत दुखी था क्योंकि उसके दिमाग में सिर्फ वही बात चल रही थी।मामा जी और चाचाजी ने कहा कि दोनों आपस में बात कर के जो भी हो समझ लो।रोहन ने अपने दुखी मन को समझाते हुए पूछा की क्या आप शादी करना चाहेंगी या नहीं क्योंकि मैं नहीं चाहता की आप परिवार के दबाव में ऐसी शादी करो।लड़की का क्या नाम था रोहन ने कुछ भी न पूछा।सब तय हो गया और शाम होने को थी।वह रोहन के पिताजी सोहन के बारात की तैयारी दुखी मन से कर रहे थे।यहाँ रोहन का विवाह एक घंटे में समाप्त हो गया,और लड़की के विदाई के लिए कहा गया कि सुबह यही से हम लोग गाडी से ले जाएंगे अभी रोहन के भाई सोहन के विवाह में जा रहे हैं। सोहन की बारात निकल चुकी थी लेकिन बारात में कोई उमंग नही थी क्योंकि रोहन का विवाह हुआ की नहीं यही विचार सबके मन में चल रहा था।रोहन के चाचा और मामा जैसे ही रोहन को लेकर पहुँचे तो सबकी नज़र गाडी पर थी रोहन का मन अब भी उदास था लेकिन रोहन ने सोचा की मेरे चलते भाई की शादी पहले ही उदास हैं चलो बारात का रंग जमाते हैं।नाचते हुए रोहन बरात में शामिल हुआ।सब खुश होकर रोहन के साथ नाचने लगे।पिताजी ने रोहन को गले लगा लिया,और सोहन बड़े भाई को देख कर रोने लगा।रोहन जाकर सोहन से गले मिला और सोहन को पकड़कर नाचने लगा।ये तो रोहन का ही मन जानता था कि वो कितना खुश हैं।सोहन का विवाह संपन्न हुआ और सुबह विदाई हो गयी।फिर रोहन की दुल्हन की विदाई भी हुए और चारो दूल्हे दुल्हन ट्रैन से अपने घर पहुँचे।बारात पहले ही पहुँच चुकी थी।लेकिन जब रोहन अपनी दुल्हन अर्चना के साथ उतरा तो लोग देखने लगे की रोहन का चेहरा उदास क्यों हैं।साड़ी रस्मे ख़त्म हुई।रोहन चुप चाप जाकर अकेले कमरे में लेटकर खूब रोया।जीवन में उसने कभी नहीं सोचा था कि उसके साथ ऐसा होगा।लेकिन फिर उसके मन में एक बात आई की मेरे से ज्यादा दुःख तो उस लड़की को हो रहा होगा जिसकी शादी एक घंटे में खत्म हो गयी न कोई रस्मे न कोई सृंगार बस मुझे देख कर शादी करके अपना पूरा जीवन मेरे नाम कर दिया।उस लड़की पर क्या गुजर रहा होगा।ये सोचकर उसने अपने मन को संभाला और जाकर अर्चना से बात की और कहा,"मुझें माफ़ कर दो मैंने तुम्हारे सारे सपने तोड़ दिए,"अर्चना ने कहा,"ऐसा मत कहिये जो हुआ सही हुआ,अब आप ही मेरे सब कुछ हैं।रोहन ने उम्मीद भरी निगाहों से देखते हुए कहा,की वादा करो कभी मुझे छोड़ोगी नही,और इस तरह रोहन का जीवन आगे हंसी ख़ुशी चलने लगा।

लेकिन रोहन के मन में एक प्रश्न आज भी घूमता हैं कि गलती किसकी थी,घरवालों की,गीता की,या शादी करवाने वाले व्यक्ति की या रोहन की? विवाह तो संपन्न हुआ।लेकिन क्या कभी कोई अपने विवाह के बारे में ऐसा सोच सकता हैं क्या?लेकिन कहावत हैं न अंत भला तो सब भला।इस प्रकार रोहन का जीवन सुखी हो गया और अर्चना रोहन के साथ खुश हैं।तो ये कहानी थी एक विचित्र प्रकार के विवाह की,"एक विवाह ऐसा भी"।उम्मीद हैं ईश्वर कभी किसी के जीवन में ऐसा कभी भी न करे क्योंकि अर्चना जैसा जीवन साथी मिलना मुश्किल होता हैं।















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