Shweta Sharma

Horror Thriller


3.1  

Shweta Sharma

Horror Thriller


एक रात की कहानी

एक रात की कहानी

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मिशा कानपुर से एमबीए करने नोएडा आई थी और वो पीजी में रहने लगी थी, उसके साथ एक लड़की और थी, संजना उस पीजी में अभी सिर्फ मिशा और संजना रहती थी, क्यूंकि एक लड़की की शादी हो गई, इसलिए वो चली गई कुछ दिन पहले और एक लड़की की जॉब और कहीं दूर लग गई, वो भी चली गई दो दिन पहले। संजना और मिशा को साथ रहते हुए पांच महीने हुए थे, लेकिन दोस्ती दोनों की बहुत गहरी हो गई थी।  


संजना एक कंपनी में जॉब करती थी, दोनों आराम से रह रहे थे, उनके मकान मालिक और मालकिन दोनों अच्छे थे, कोई परेशानी नहीं थी दोनों लड़कियों को। 

एक दिन मिशा आधी रात को पानी पीने के लिए उठी, तो देखा की संजना अपने बेड पर नहीं है, मिशा को लगा शायद संजना वॉशरूम गई होगी, लेकिन काफी देर हो गई, पर संजना नहीं आई, तो मिशा वॉशरूम की तरफ गई और दरवाज़ा नॉक किया, तो दरवाज़ा खुल गया, अंदर जाकर देखा तो कोई नहीं था, मिशा हैरान हो गई, की संजना कहां चली गई, मिशा ने सब जगह देख लिया, लेकिन संजना नहीं मिली, फिर मिशा ने सोचा की संजना को फोन करके पूछती हूं, लेकिन जब फोन किया, तो फोन रूम में ही बज रहा था, मिशा को याद आया, की उसने टैरेस पर तो देखा नहीं। 


लेकिन परेशानी यह थी, की मिशा को ज्यादा अंधेरे से डर लगता था और आधी रात को टैरेस पर जाने में उसे डर लग रहा था, पर क्या करे एक बार जाकर देखना तो था उसे, धीरे धीरे मिशा टैरेस की तरफ बढ़ने लगती है और साथ में मिशा का डर भी बढ़ने लगता है और साथ में झींगुरों की आवाज़ उसके डर को और बल दे रही थी, पर मिशा डरते डरते आगे बढ़ रही थी। 


आज ना जाने क्यों उसे अपना पीजी, पीजी कम भूत महल ज्यादा लग रहा था, जैसे तैसे करके मिशा टैरेस पर पहुंच चुकी थी, टैरेस का दरवाज़ा खुला हुआ था और मिशा लड़खड़ाती आवाज़ में संजना को आवाज़ लगाती है" संजना... संन संजना...कहां हो यार?


लेकिन कोई आवाज़ नहीं आती, अचानक मिशा की नज़र संजना पर पड़ती है, जो अंधेरे में एक कोने में चुपचाप बैठी थी, उसे देखकर मिशा को चैन मिला और उसके पास जाकर मिशा ने संजना से पूछा"ओह यार! तू यहां है, कबसे ढूंढ़ रही हूं तुझे, यहां क्या कर रही है आधी रात को?"

लेकिन संजना ने कोई जवाब नहीं दिया, बस दूसरी तरफ देखे जा रही थी, मिशा को संजना को ऐसे देखकर थोड़ा डर लगा, मिशा ने फिर पूछा "संजना क्या हुआ? बता ना।"

पर संजना ने जबाव नहीं दिया, मिशा ने संजना को जमीन से उठाया और नीचे ले गई और कमरे में ले जाकर लेटा दिया और खुद भी लेट गई, पर उसे संजना का ये रूप समझ नहीं आया। 


रात के तीन बज रहे थे, चारों ओर शांति ही शांति, अचानक संजना उठी और उसने देखा, की मिशा गहरी नींद में सो रही है, संजना बाहर निकल ही रही थी, की अचानक मिशा ने पूछा "कहां जा रही है अब?"

"तू तो सो रही थी?" थोड़ा हैरानी से संजना ने पूछा।

"अचानक आंख खुल गई, वैसे जा कहां रही है अब, टैरेस पर?" हँसते हुए मिशा ने पूछा।

"टैरेस पर क्यों जाऊंगी मैं इस वक़्त?" हैरानी से संजना ने पूछा।

"अभी कुछ देर पहले मैडम आप टैरेस पर थी और कुछ पूछने पर आंसर भी नहीं दे रहीं थीं।" मिशा ने बताया।

"व्हाट?, इसका मतलब...."बोलते बोलते चुप हो गई संजना।"

"क्या मतलब?" मिशा ने पूछा।

"कुछ नहीं, मैं अभी आती हूं।" संजना बोली और कमरे से बाहर निकल गई।


मिशा कुछ समझ नहीं पाई, की अचानक संजना को क्या हुआ? अचानक बाहर से संजना के चीखने की आवाज़ आई और मिशा बाहर भागी और देखा, की संजना सीढ़ियों के पास नीचे देखकर बहुत डरी हुई है, क्यूंकि वहां पर मिशा की लाश पड़ी हुई थी कोने में।

"संजना।"मिशा ने संजना को आवाज़ दी पीछे से।

"मिशा, त त तुम म म मर चुकी हो?" हकलाते हुए संजना ने पूछा।


"हां, जब तुझे रूम में ना पाकर टैरेस पर तुझे देखने जा रही थी, तभी अचानक हार्ट पेन हुआ जोर से और मैं गिर गई, फिर उठी तो पेन नहीं था, तुझे देखने के चक्कर में अपनी डेड बॉडी नहीं देखी और टैरेस पर चली गई, जब तुझे लेकर नीचे आई, तब अपनी डेड बॉडी देखी, समझ गई मैं की अब मैं नहीं रही, लेकिन तुझे तेरे कमरे तक पहुंचा दिया।


संजना की आंखों से आंसू निकलने लगे और संजना बोली "मरने के बाद भी मेरे लिए इतना सोच रही थी तू, मेरा ब्रेसलेट जो तूने मुझे दिया था बर्थडे पर, वो हाथ में नहीं था, इसलिए उसे देखने जा रही थी, लेकिन यार तूने सही नहीं किया, मुझे छोड़कर चली गई।" रोते हुए संजना बोली।

"तूने भी सही नहीं किया।"मुस्कुराते हुए मिशा बोली।

"मतलब?" हैरानी से संजना ने पूछा।

 "चल, तेरा ऊपर चलकर ब्रेसलेट देखते हैं।" मिशा ने मुस्कुराते हुए कहा।

और मिशा टैरेस पर जाने लगी और संजना भी उसके पीछे पीछे जाने लगी, रात तो पूरे अपने गहरे रूप में थी, सन्नाटा छाया हुआ था, आगे जब मिशा बढ़ी, तो एक जगह रुक गई, फिर संजना भी रुक गई।

"क्या हुआ, दिखा क्या ब्रेसलेट?" संजना ने पूछा।


मिशा ने सिर हिलाकर हां कहां और नीचे की तरफ इशारा किया, जब संजना ने नीचे देखा, तो बहुत हैरान हो गई और डर गई, क्यूंकि नीचे संजना की लाश पड़ी थी और उसके हाथ में ब्रेसलेट था।

"इसका मतलब मैं भी।" संजना ने कहा।

"हां, तू भी, मैं भी, हम दोनों मर चुके हैं, जैसा की तुझे मैंने पहले बताया तू मुझे कहीं भी नज़र नहीं आई, तो मैं टैरेस पर जा रही थी तुझे देखने, लेकिन मैं हार्ट पेन से गिर गई और मेरी डेथ हो गई, लेकिन जब ऊपर पहुंची, तो देखा, की तू एक अलग ही रूप में है, मैं तुझे नीचे लाई और कमरे में लेटाया, लेकिन जब तू उठकर जाने लगी तो मैंने देखा, की आईने में तू दिख नहीं रही है, मैं समझ गई, की तू भी जा चुकी है, लेकिन तू मरी कैसे ये मुझे नहीं पता।" मिशा ने बताया।


"मुझे मेरे बॉयफ्रेंड अमन ने धोखा दिया, इसलिए मैंने टैरेस पर जाकर जहर खा लिया और थोड़ी देर बाद मैं गिर गई, लेकिन जब रूम में खुद को देखा, की मैं तो ज़िंदा हूं, मुझे लगा अच्छा है मैं मरी नहीं, क्योंकि मैं किसी के वजह से क्यों मरूं, मेरी जिंदगी मेरे लिए और मेरे अपनों के लिए कीमती है, लेकिन अब पता लगा की मैं सच में मर गई, मरने के बाद ज़िन्दगी की कीमत समझ आ रही है" दुखी होते हुए संजना बोली।

"कोई नहीं अब जो हो गया, सो गया।" अब चलना चाहिए दोनों को।"मिशा बोली।

"लेकिन मुझे एक बात समझ नहीं आई, की तू मुझे ऊपर से लेकर आई, तो क्या तुझे मेरी लाश पड़ी हुई नहीं दिखी, क्योंकि तूने कहा, की तुझे आईने में देखकर पता लगा, की मैं मर चुकी हूं?" संजना ने पूछा।

"जब मैं तुझे लेकर आ रही थी, तो लाश नहीं थी, लेकिन अब है, मुझे तो यही लगा, की तू मेरे साथ ही जा रही है।" मिशा ने बताया।

"हम्मम, हो सकता है, की तेरी भी डेड बॉडी पहले नहीं होगी वहां पर, जैसे मेरी नहीं दिखी थी तुझे, जब तू नीचे आई, तब तूने अपनी डेड बॉडी देखी।" संजना ने कहा।

"हम्मम, शायद, पर अब हमें चलना चाहिए।" मिशा ने कहा और दोनों गायब हो गए।


सुबह मकान मालकिन को दोनों की डेड बॉडी मिली, सब हैरान हो रहे थे, की अचानक क्या हो गया दोनों को।


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