एक मुलाकात
एक मुलाकात
प्रेरणा आज बहुत उदास है, आज उसका ऑफिस के एक भी काम में मन नहीं लग रहा फिर भी जैसे तैसे करके स्विफ्ट खत्म करने का इंतजार कर रही है। लेकिन समय है कि कटने का नाम ही नहीं ले रहा। आखिर स्विफ्ट खत्म हो गई, रात के 11:00 बज रहे थे, जो रोज बजते थे लेकिन आज उसे दिन बहुत बड़ा लग रहा था मानो के सालो बीत गए हो। वह ऑफिस अपनी स्कूटी से आ जाया करती थी, आज भी वह ऑफिस से स्कूटी लेकर निकली।
रास्ते में ही स्कूटी बंद हो गई। चालू करने की हजार कोशिश की लेकिन चालू नहीं हुई। तो स्कूटी को स्टैंड में रखते हुए लात मारी और बोली " तू भी मुझे धोखा दे जैसे उसने दिया।" और रोते हुए सड़क किनारे लगे एक पेड़ के पास जाकर बैठ गई। "क्या गलती थी मेरी, सिर्फ इतनी कि मैं इसके हिसाब से नहीं चलती। तो क्या कोई ऐसे किसी का दिल तोड़ देता है। बिना कुछ कहे बिना कुछ सुने। 4 साल से हम लोग रिलेशनशिप में है, इसमें से 3 साल हम लोगों ने झगड़ा करने में बिताया। माना कि मैं उससे पहले से प्यार करती थी लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि मैं उसकी हर बात मान लूं।
इतने में किसी के कदमों की आहट हुई, उसके ध्यान में ही नहीं आया। " तू क्या बिगाड़ेगा मेरा, मैं खुद अपने हाथों से अपनी किस्मत बिगाड़ चुकी हूं" आसमान की ओर देखते हुए भगवान को गुस्से में कहते हुए कहा। इतने में ही वो आहट जाती हुई सुनाई दी। वह बैठे-बैठे सोच ही रही थी कि अब करूं क्या? तभी वहां कुत्ते का एक छोटा पिल्ला आता है और स्कूटी की इर्द-गिर्द घूमने लगता है। थोड़ी देर बाद वह उसके पास आता है, उसके साथ खेलने लगता है। यह देखकर उसका भी मन थोड़ा हल्का होता है और बोलती है "खाओगे कुछ" और अपने बैग में से बिस्किट का पैकेट निकाल के उसको दो-चार बिस्किट खाने को देती है पहले उसको सुंघता है बाद में खाने लगता है।
स्कूटी को धक्का देकर घर की ओर जाने के लिए खड़ी होती है तो वह पिल्ला भी उसके साथ स्कूटी तक आता है। एक बार ओर स्कूटी चालू करके देखती हूं, यह कहकर स्कूटी की चाबी घुमाई तो स्कूटी चालू हो गई। वह घर की ओर निकल पड़ी लेकिन वो पील्ला वहीं खड़ा होकर उसे देख रहा था।
सुबह जब वह ऑफिस आने के लिए वही रास्ते पर निकली तो उस पिल्ले को देखने के लिए स्कूटी थोड़ी घीमी की। पहले तो वह कहीं नहीं दिखा लेकिन गौर से देखने के बाद उसे उसी पेड़ के पास उसे खेलता दिखा। लेकिन रुके बिना ऑफिस के लिए निकल गई। रात को जब वह घर के लिए निकली तो उस पेड़ के पास रुकी और उस पिल्ले को ढूंढने लगी। पहले तो कहीं नहीं दिखा लेकिन अचानक से कहीं से भागता हुआ आया। आज भी उसको उसने खाना दिया और निकल गई।
अगले दिन उसको लगा उसके साथ जो काम कर रहा है वो उसे जोर से आवाज दे रहे हैं ऐसा लगा । पहले तो घबरा गई फिर उसको जाकर पूछा तो उस सबने मना कर दिया। एक बार होता तो समझ में आता ऐसा कई बार हुआ, इस तरह दिन खत्म हुआ। अगले दिन उसके एक बड़े अधिकारी ने बुलाया । और उसने कहीं से फाइल लाने के लिए कहा। फाइल लेकर आ ही रही थी कि पता नहीं कैसे उस फाइल पर टेबल पर रखा पानी गिर गया और खराब हो गई।
1 दिन तो हद ही हो गई। वह वॉशरूम में आईने के सामने खड़ी थी और उसे लगा आईने में किसी और का चेहरा दिखाई दे रहा था। लेकिन वह इस सब में भी वह पिल्ले को खाना देना नहीं भूली। वह खाना देखकर स्कूटी में जा रही थी तभी उसे लगा कोई उसकी स्कूटी के पीछे भाग रहा। उसने स्कूटी रोकी, पीछे मुड़कर देखा लेकिन वहां कोई नहीं था।
उस दिन के बाद घटनाए बदलने लगी। 1 दिन उसका सीनियर उसे किसी बात के लिए डांट रहा था और साथ में चाय पी रहा था, तभी पता नहीं कैसे उसका चाय से मुंह जल गया। उसी तरह उसकी एक दोस्त उसको नया मोबाइल दिखाकर जला रही थी, जब वह लोग सीडी से नीचे उतर रहे थे तब वह फोन उसके हाथों से गिर गया और जमीन पर टक्करा के टुकड़े टुकड़े हो गया।
लेकिन कुछ दिनों से वह घर जल्दी जाने लगी इस कारण से उस पिल्ले को खाना देना भी भूल गई। इस तरह से दो-चार दिन बीते होंगे तभी अचानक सीढ़ियों पर उसको इसके पीछे कोई चलता महसूस हुआ, लेकिन पीछे मुड़कर देखा तो कोई नहीं था। अचानक जोर से आवाज आई, उस पिल्ले को खाना क्यों नहीं दिया। पहले तो वह डर गई, इधर-उधर देखने लगी लेकिन कोई नहीं दिखा। तो डर के मारे वह आफिस की और भागी, और जा के अपनी जगह पर बैठते हुए थोड़ा पानी पिया, और जो सुना उसके बारे में सोचने लगी। अचानक उससे क्या हुआ कि उसने उस जगह जाकर उस पिल्ले को खाना देने के लिए मन बना लिया। जैसे तैसे करके दिन गुर्जरा और रात होते ही इस जगह के लिए निकल गयी।
वहां पहुंचकर वह उस पिल्ले को ढूंढने लगी लेकिन वह उसे कहीं नजर नहीं आया। वह अंदर से थोड़ी डर रही थी इसलिए वह वहां से जाने लगी, तभी वह पिल्ला सामने से भागता हुआ आया। डरते हुए आवाज में पूछा "कौन हो तुम?" तो एक हसी की आवाज़ आई और हंसते हुए किसी ने कहा "तुम्हें क्या लगता है मैं यह पिल्ला हूं।"
"कौन हो तुम और कहां से बोल रहे हो" कांपते हुए पूछा, पेड़ के पीछे से एक छाया बाहर आया।
" मैं एक भूत हूं, मेरा नाम प्रेम है।"
"तो वह सब तुम कर रहे थे" डरी सहमी आवाज में
"क्या"
"जो कुछ ऑफिस में मेरे साथ हो रहा था" कांपती हुई आवाज में
"सच बोलूं तो हां लेकिन तुम्हें नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं सिर्फ डराने के लिए"
"लेकिन क्यों?"
"क्योंकि मैं एक भूत और भूतों का काम ही है डराना"
वह डर के मारे कांपने लगी, उसे डरते हुए देख वह बोला, डरो मत वह तो बहुत पहले की बात है जब मैंने तुम्हें पहली बार देखा था।
"आख़िर तुम्हें चाहिए क्या?"
"तुम, क्योंकि मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूं।"
वह अंदर से पूरी तरह से हिल गई यह सोचते हुए कि एक भूत जो उसे पसंद करता है।
" छोड़ो इन सब बातों को इन सब बातों में रखा क्या है। मैं तुम्हें अपनी असली कहानी बताता हूं।"
जैसे कि मैंने तुम्हें बताया मेरा नाम प्रेम है। मेरी एक मोबाइल की दुकान हुआ करती थी। सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा था उसमें भी उसका आना, मानो के सोने पर सुहागा। वह कौन तुम यही सोच रही होगी ना। मेरी प्रेमिका या कहे तो मेरी गर्लफ्रेंड। वह पहली बार मेरी दुकान पर मोबाइल लेने आई थी, फिर दो चार बार किसी ना किसी कारण से आई इसी कारण से हमारी दोस्ती हो गई और प्यार हो गया। शुरुआती दो-चार महीने बहुत अच्छे गए फिर पता नहीं क्या हुआ वह मुझसे दूर जाने लगी। एक दिन तो हद हो गई जब मुझे पता चला कि उसने किसी और लड़के को अपना बॉयफ्रेंड बना लिया है, मैं उससे कुछ बात करता इससे पहले ही उसका मुझे मैसेज आया कि "मैं तुमसे प्रेम नहीं करती इसलिए मैं तुम से ब्रेकअप कर रही हूं।" एक दिन मुझे पता चला कि वह अकेले कहीं पर जा रही है तो उससे बात करने या ये कहो कि उसे डराने धमकाने के लिए मैं गाड़ी पर गुस्से में निकला और इसी दौरान मेरा एक्सीडेंट हुआ, मेरी मौत हो गई और मौत के बाद में भूत बनकर घूमने लगा। मुझे प्रेमियों को देखकर बड़ा गुस्सा आता था और इसीलिए मैं उसे डराने लगा, ऐसे करने में मुझे मजा आने लगा और यही मैं करता रहा।
जब तुम पहली बार यहां आई और अपने प्रेम का जिक्र किया तब मैंने वह सब सुन लिया और तुम्हें डराने का मन बना लिया लेकिन तुम डरी नहीं और धीरे-धीरे तुम मुझे पसंद आने लगी बस यही कहानी है मेरी।
तुम्हें ऐसा लग रहा है की ऐसा करने से कोई खुश हो जाएगा, तो तुम गलत सोच रहे हो। कोई इतनी सी छोटी सी बात के लिए इतना बड़ा नुकसान नहीं करता। गलती होने पर इस तरह का बुरा बर्ताव किसी के साथ नही करता जैसा तुमने मेरे साथ किया। और तो और मामला जाने बिना डरा धमकाना किस हद तक ठीक हैं। कल को मानो तुम किसी बात पे नाराज़ हो गए तो तुम मुझे मार ही दालोगे। वह अपनी गलती समझ गया और वहां से चला गया लेकिन प्रेरणा भी इस सब में अपनी गलती समझ गई और फोन करके सही तरीके से बात करके ब्रेकअप कर लिया।

