Reetu Singh Rawat

Abstract


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Reetu Singh Rawat

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दिल्ली की हवाओं में खत्म हुआ ज़हर

दिल्ली की हवाओं में खत्म हुआ ज़हर

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भारत की आजादी के बाद दिल्ली 70 हजार लोगों के रहने के लिए बसाई गई थी। दिल्ली भारत की राजधानी है और भारत का दिल दिल्ली में बसता है। आज दिल्ली की संख्या दो करोड़ पचास लाख से अधिक लोग यहां निवास करते हैं जिस में 1करोड़ 50 लाख के करीब हिंदु-मुस्लिम दूसरे सिख तीसरे स्थान पर अन्य सभी। दिल्ली दुनिया की दूसरी सबसे ज्यादा आबादी वाली सिटी बन गई। आज कोरोना महामारी में दिल्ली की हवा भी बदल चुकी है आधी दिल्ली प्रवासी और प्रवासी मजदूरों से भरी थी कोरोना महामारी और लॉक डाउन में कुछ प्रवासी अपने प्रदेशों की ओर चले गए और कुछ अभी भी बाकी है और कुछ के जाते ही दिल्ली की हवा ने फिर से अंगड़ाई लेना शुरू कर दिया। दर्द से चीखती दिल्ली आज चैन की सांस भर रही है। आसमान के बादल साफ दिखने लगे है न प्रदूषण की चादर ओढ़ी है न यमुना का पानी गंदा है चारों ओर स्वच्छता का आलम है सुबह की ठंडी हवा मई के महीने में भी पहाड़ों की याद दिला रही है दिल्ली की खूबसूरती चारों ओर हरियाली दिखा रही है।

       दिल्ली की बढ़ती जनसंख्या ने दिल्ली की तरोताजा हवा में जहर घुलने का काम किया ।अमीरों ने अमीर बनने की चाहत में दिल्ली की खूबसूरती को मिटाने में लाखों पेड़ों को काट कर बड़ी- बड़ी इमारतें बना दी दिल्ली तो भारत का दिल है अगर दिल की हालत नाजुक होने लगी तो धड़कन का रूकना भी जरूरी है भारत के दिल को संभाल लो। दिल को दिल्ली में रहने दो। नही तो दिल्ली की बढ़ती हुई जनसंख्या एक दिन जहर के प्रदूषण से मर जाएगी। आज दिल्ली ने फिर एक गहरी सांस ली है और अपनी हवाओं से पैगाम हमें सुनाया है। आज बहुत बर्षो बाद मुझे जीने का मजा आ रहा है खुली हवा भी संगीत सुना रही है आज बहुत दिनों के बाद जहरीली हवाओं से मिली मुझे भी आजादी। अब जिंदगी का मजा मुझे आ रहा है। कब तक रहूंगी आजाद ये बताए दिल्ली। जय हिंद जय भारत


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