Yashwant Rathore

Romance Tragedy Inspirational


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Yashwant Rathore

Romance Tragedy Inspirational


धापू

धापू

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सांझ ढलने को हैं, धापू ईंटो के चूल्हे पे सब्जी पका रही है। हीरा और ससुरजी के आने का समय है। हाथ मुँह धोते ही खाना मांगेंगे, दिन भर की मजदूरी थका भी तो देती है। तभी पपिया दौड़ते हुये आता हैं, माई "बापू" आ गया। धापू के चेहरे पर मुस्कान बिखर जाती है। हीरा के साथ पपिया भी हाथ मुँह धोने लग जाता हैं।

बापू में आपके साथ मजदूरी करने कब चलूंगा। बेटा अभी तू पांच का ही हुआ है, अब तुझे स्कूल भेजेंगे। अच्छे से पढ़ाई करनी हैं। जब तू आठ का हो जाये, तब सेठजी हां करेंगे, तो छुट्टियों में दो महीने कुछ ईंटे तू भी उठा लेना। तब तक तेरे हाथ पैर भी मजबूत हो जाएंगे। पपिया बड़ा खुश हो जाता हैं। हां बापू मैं जल्दी आठ का हो जाऊंगा। चल अभी खाना खाले।

धापू खाना परोसते हुये - आज बापूजी के साथ नहीं बैठे सा, सीधा इधर आ गए। सब गांव वाले क्या सोचेंगे।

अब गांव तो ये हैं नहीं, दस महीने पहले तुझे साथ ले आया, इन टेंटो में सोती हो, खुले प्लाटिक के टेंट हैं। अब तो तेरा नौ महीने का पेट भी हैं। गांव में ही रहती तो काकी ,दादी थोड़ा ध्यान भी रख लेती तेरा।

'जहाँ आप हो वही में खुश हूं सा। अकेली गांव में पड़ी रहती तो जी न लगता। इतनी बड़ी पट्टियां, ईंटे ,पत्थर उठाते हो, कितना जोखिम का काम हैं। '

'पन्नू बा पिछले साल कैसे... '

'अरे तू अच्छी बातें सोचा कर, सांवरो आपणो भली करसी। '

अच्छी खबर सुन।

क्या सा?

मैं सोच रहा था अब तेरा नवा लग गया, गांव जाने की सोच रहा था। पर सेठजी छुट्टी देंगे कि नहीं ,डरा हुआ था। पर सेठजी ने छुट्टी भी दी और गांव जाने का किराया भी दिया हैं और कहा है दो ,तीन महीने काम बंद रह सकता हैं फिर बुला लेंगे।

क्यों सा?

पता नहीं कोई बीमारी फैली हैं। सरकार के आदेश हैं। अब तो छह महीने बाद ही आएंगे। आगे सावण हैं, इस बार देखना जमाना अच्छा होगा।

केसी बीमारी हीरा?

अरे धापू ,हम मजूरों को क्यों डरना। तू बता कितने साल पहले बीमार पड़े, याद ही नहीं।  न लू लगती हैं, ना गर्म सर्द होता हैं, ना ही ताव आया। बस शरीर टूटता हैं, सात घंटे की नींद और फिर तैयार। डर तो धापू चोर, लुटेरों से लगता हैं, बचाया , कमाया पैसा लूट न जाये। बीमारी तो इन साहब लोगो को होती हैं, एक बार कुर्सी पे बैठे तो आठ घंटे जैसे चिपक से गये। पता नहीं इतना कैसे बैठ पाते हैं? हम तो कल सुबह गांव निकल लेंगे। सुना है बसों में भीड़ हो जायेगी, सुबह जल्दी चलेंगे। सोते वक्त हीरा के चेहरे पर सुकून था, बिना मांगे छुट्टी मिल गयी।

सुबह कब हुई पता भी न चला, हीरा के बापूजी ही उठाने आये। दूर से ही आवाज़ देते रहे।

कब तक पड़ा रहेगा, पिके सोया है क्या? सब निकल लिये, फिर हमें कौन सी बस मिलेगी। पपिया की आँख खुल गयी, बापू को उठाया। धापू भी उठ के चाय बनाने लगी। बापूजी पता ही न चला , काम पे जाना न था तो लापरवाह हो सो गया शायद।

अब जल्दी से सामान बांध लें, जो जरूरी ना हो वो यही रहने दे।

हीरा जल्दी जल्दी सारा सामान समेटने लगा, ज्यादा कुछ न था फिर भी कपड़े और जरूरी सामान से चार ढेरियां बंध गयी।

हीरा पिला टेंट उतार समेटने लगा। अरे पड़े रहने दे इसको।

नहीं बापूजी साढ़े छह सौ रुपये लगे थे।

अच्छा, चल बांध लें।

धापू के ऊपर अब कोई छत न थी। उसकी चाय तैयार थी।

अरे हीरा चाय वाय रहने दे।

बन गयी बापूजी।

अच्छा ,तो ले आ।

बापूजी काका नहीं दिख रहे।

सब के सब आपे तापे हैं। अपना अपना बिस्तर उठा चल दिये। ये भी ना सोचा बीनणी पेट से हैं।

थोड़ा साथ रहते तो अच्छा था, लुगाई के साथ इस टेम एक लुगाई रेवे तो अच्छा होता।

हां "जी सा"

चाय ख़तम हुई थी कि मगजी ( हीरा के काका) और काकी दौड़ते से आये।

गजब हो रहा हैं, गजब हो रहा हैं, बिना सांस लिए मगजी बोला।

क्या हुआ मग्गू?

भाई सा सुबह जल्दी बस स्टैंड गये थे, बहुत भीड़ जमा हो गई। पर सरकार ने बस ,रेल सब रुकवा दी। लोगो ने हो हल्ला किया तो पूरी फौज आ गयी पुलिस वालों की, डंडे मारने लगी। सब भागने लगे, हम भी भाग आये। अब क्या करेंगे।

अच्छा, अब क्या करेंगे। काका सुबह अकेले निकल लिए तब हमसे पूछा था क्या?

अरे हीरा हमें लगा तुम आओगे जब तक बीनणी के लिए एक सीट भी रोक लेंगे।

अब लड़ो मत। बाकी गांव के छोरे भी तो थे, वो कहां हैं।

हेमिये से पूछा था, बोला रहा तो हाईवे से ट्रक पकड़ेंगे। अहमदाबाद से बियावर ट्रक चलते ही रहते हैं।

पर सुना हैं ट्रक भी सरकार रुकवा रही हैं और देख पूछ भेज रही हैं।

तो क्या करे मग्गू?

सरकार कह रही हैं ,जहां हो वही रुको नहीं तो बीमारी फैलेगी। कुछ लोग तो कह रहे हैं छह महीने भी लग सकते हैं।

अरे काका, क्या बावली बात हैं।

छह महीने यहाँ रुके तो जमा किया सब ख़र्च हो जाएगा। सब्जी तेल सब महंगा हैं यहां। काम भी बंद हैं। गांव ना निकले तो चौमासे में बीज के पैसे भी ना बचेंगे, खेती कैसे करेंगे। बर्बाद हो जायेंगे, भूखे मरने की हालत हो जायेगी।

जमीनों पर तो चौधरियों की नज़रे गड़ी ही रहती हैं।

अच्छा दाम दिया तो, मजबूरी में आधा गांव जमीन बेच देगा। अरे कोई ठिकाना, ठौर तो रहे बुढ़ापा बिताने के लिए। यूं शहर शहर जिंदगी भर मजदूरी थोड़ी करते रहेंगे।

हां बेटा, सही कह रहा हैं ,पर क्या करें।

बापूजी मुझे लगता हैं गांव तो जाना ही पड़ेगा।  लगभग तीन सौ कोस होगा।

थोड़ा पैदल चलेंगे और हाइवे के आसपास ही चलते रहेंगे , दो पैसे दे कोई ट्रक बिठायेगा तो बैठ जायेंगे। नाकाबंदी से पहले उत्तर जायेंगे। फिर थोड़ा पैदल।

जोड़ तोड़ कर निकल जाएंगे बापूजी।

ठीक है हीरा, पर बहू...

बापूजी रात को धीरे धीरे चलेंगे, हमें कौन सी जल्दी हैं। रात को धूप भी नहीं होगी और पुलिस भी.. काका टेंट बांध लो, मौसम बिगड़ा तो...

हां बेटा हीरा

और कुछ खाने का सामान ज्यादा खरीद लेते हैं लालाजी से, माचीस, तेल सब ले लेते हैं। बाकी तो हाइवे पे भी ढाबे तो होते ही कुछ जुगाड हो जायेगा।

हां मग्गू ,सही हैं।

हीरा कुछ बांस के लट्ठ इक्कठे करने लगा। पपिया बापू को आंखों में सवाल लिए देख रहा था।

पपिया ये बांस, टेंट लगाने में काम आएंगे, रास्ते मे जानवर ,कुत्ते भी होते हैं और चलने में भी साथ देंगे। तू भी अपने हिसाब से ले ले।

पपिया खुशी से अपनी लकड़ी तलाश करने लग पड़ता हैं।

हीरा धापू के पास जा पूछता हैं। चल लोगी क्या?

हां सा, धीरे धीरे चल लूंगी, कल से कभी कभी दर्द आ रहे हैं। रास्ते मे कुछ हो गया तो...

तो धापू ,काकी साथ हैं ना, हम सब भी हैं। और ज्यादा कुछ लगा तो सरकारी अस्पताल तो होंगे ही। जो नज़दीक होगा उस तरफ चल लेंगे।

नहीं सा, सरकारी अस्पताल अच्छे नहीं लगते मुझे। हमारे गांव ही हो तो अच्छा हैं। अस्पताल में एक तो कितनी गंदगी होती हैं। दूसरा वहां लोगो को देख ऐसा लगता हैं जैसे हम छोटे, गरीब और अनपढ़ लोग हैं।

हमारे गांव में ऐसा लगता हैं जैसे दुनिया हमारी हैं और हममे कोई कमी नहीं हैं। साफ हवा, सुंदर गांव और मोरों की आवाज़...

हां धापू, थोड़ा पैसा इक्कठा हो जाये और ट्यूबवेल खुदवा ले तो मजदूरी की जरूरत न रहे। कुएँ तो अब सूखे हुये है। गांव में भी स्कूल आ गयी हैं, बच्चे वहाँ पढ़ लेंगे, आगे कुछ अच्छा कर लेंगे।

एक दो साल बस और...फिर सब ठीक हो जाएगा। रात होते ही धापू अपनी डंडी पकड़ चलने लगी, हीरा ने उसके हिसाब से चुनी थी। धापू को लकड़ी काफी सहारा दे रही थी। सारा सामान हीरा ने उठा लिया ताकी धापू के पास कुछ ना रहे। पपीये ने एक छोटी गठरी उठा रखी थी वो मां के साथ मटक मटक के चल रहा था।

मां मेरे बहन होगी ना।

तुझे क्या चाहिए, बहन या भाई।

मुझे तो बहन चाहिये।

ठीक हैं फिर लाडो ही होगी। सुन पपिया खुशी के साथ और मस्ती से चलने लगा।

धापू कुछ तकलीफ़ तो महसूस कर रही थी पर हिम्मत हारने से काम कैसे चलेगा। शुरु शुरु में उसने भी मजदूरी की थी, बिस बिस किलो का भार ले कितनी बार बिल्डिंग में चढ़ती उतरती थी। दस माले की बनी थी वो बिल्डिंग। कभी पैर ना टूटते थे। अब पैर कैसे भारी हुये जा रहे हैं। सोचते सोचते तीन कोस निकल गए। शहर से बाहर आ गए। हाईवे की लंबी चौड़ी सुनसान सी सड़के, साफ आसमान और पूरा चांद ,हवा में भी ठंडक। आसपास कहीं बिन मौसम बरसात हुई है।

बापूजी अब कोई पुलिस तो दिख नहीं रही, कोई ट्रक आता हैं तो रुकवाते हैं।

आओ काका।

कुछ देर बाद हीरा एक ट्रक वाले को मना लेता हैं। पूरा परिवार ट्रक में बैठ निकल जाता हैं।

काकी ट्रक ना मिलता तो अब न चला जाता। मैं तो मर ही जाती। मुझे लगता हैं टेम नजदीक हैं।

अब डरने की के बात है धापू। तेरे हीरा ने ट्रक कर ही लिया। डेढ़ सौ रुपये हर जने के लिए हैं, पर कोई नहीं जल्दी पहुंच जायेंगे। पर पुलिस कहीं दिखी तो ट्रक वाला पहले ही उतार देगा।

बात सुनते सुनते ही धापू की आँख लग गयी।

बढ़िया सड़क पर ट्रक एक गति में बिना हिले डुले ,कम आवाज़ किये हुये चल रहा था। दो घंटे कब निकल गए पता ही न चला।

तभी तेज़ ब्रेक लगने से सबकी आँख खुल गयी।

उतरो उतरो आगे पुलिस की चेकिंग हैं।

सब सामान इकट्ठा कर पूरा परिवार हाईवे से नीचे उतर गया।

आधी नींद में पपिया और धापू चल रहे थे।

धीरे धीरे चलते हुये सुबह निकल आयी।

बापूजी कोई गांव ही लगता हैं। यहां अब आराम कर लेते हैं। पुलिस भी दिख नहीं रही। सब थक गए हैं।

धापू पेड़ की छांव में बेसुध सी लेट गयी। काकी खाना बनाने लगी। तीन चार पत्थर लगा, चूल्हा बना लिया, कुछ लकड़ियां इक्कठी कर अपने बर्तन में चावल उबालने लगी।

उठ धापू उठ ,खाना खाले।

अरे धापू तुझे तो बुखार हैं।

काकी पैरो में गीला गिला लग रहा हैं, एक दो दिन में भी हो सकता हैं।

फिक्र ना कर बीनणी में हूँ ना।

बापूजी मैं किसी घर से पानी मांग लाता हूँ। काकू बोतल और गेलनिये ले लो, आगे पता नहीं कहां पानी मिले।

कुछ देर में हीरा और मगजी दौड़ते हुये आते हैं।

बापूजी हमें चलना होगा, पानी तो मिल गया पर गांव वालों ने सौ सवाल पूछे हैं ,लगता हैं पुलिस को खबर कर देंगे।

जल्दी से सब चल पड़ते हैं।

जान न होते हुये भी धापू जल्दी जल्दी पैर मारती हैं।

अब धूप चढ़ने लगी थी, कोई ट्रक वाला भी रुकने को राजी न था।

निढाल धापू कुछ कोस और चल ली। दोपहर के दो बज रहे थे कि धापू की चीख निकल गयी।

गर्भाशय का मुंह खुल गया था। काकी ने जल्दी से बिछोना किया और हीरा ने टेंट खड़ा कर दिया। काकी के कहने पर हीरा पानी गर्म कर रहा था।

डरा हुआ पपिया बापू के पास ही खड़ा था।

हीरा बेटा, डॉक्टर की जरूरत हो सकती हैं, पानी निकल गया ,बच्चा फँसा हैं बाहर नहीं आ रहा, सिर भी दिख रहा हैं। बिस मिनट हो गए, धापू भी अब थक रही हैं।

हीरा टेंट में घुसता हैं, धापू का दर्द उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था।

धापू मैं आसपास कोई डॉक्टर का या अस्पताल का पता करके आता हूं। तुम हिम्मत रखना। मैं दौड़ते हुये जाऊंगा और आऊंगा।

हां सा। मुझे कुछ हो जाये तो बच्चों का ध्यान रखना।

बेंडि वे गी के।

तू " गुजरी" हैं, हम गुज्जर है, इतनी जल्दी हिम्मत हारेगी क्या?

हमारी "पन्ना धाय" ने तो मेवाड़ का सूरज बचाया था। वो अपने बच्चे का बलिदान न देती तो, हिंदुआ सूरज प्रताप भी न जन्म लेते। मैं अभी आया।

हीरा के पैरों में पंख लग गए थे। कोई ट्रक न रुका तो तीरों के निशान के हिसाब से नज़दीकी शहर की तरफ भागने लगा। कुछ ही देर में ट्रक की लंबी लाइन दिखी, उस जाम में वो दौड़ता रहा।

आगे पुलिस को देखते ही वो समझ गय ,अब सीधा डॉक्टर तक ना जा पायेगा। हीरा ने एक ही सांस में अपनी सारी परेशानी पुलिस को कह डाली।

पुलिस ने एक पल की देर किए बिना एम्बुलेंस को फ़ोन किया और हीरा को मास्क पहना उसके साथ चल दिये।

हीरा के सिर में सौ डर जगह बना रहे थे। कहीं धापू...काश में कुछ दिन वहीं रुक जाता। मुझे क्या पता था आज ही बच्चा हो जाएगा। ट्रक न रुकता तो अभी तक बियावर पहुंच गए होते। पुलिस वाला एम्बुलेंस को फ़ोन पे रास्ता बताए जा रहा था। हीरा डरा हुआ पुलिस जीप से उतरा तो बापूजी और मगजी भी डर से गये।

फिर संभल के बोले 

हीरा बधाई हो " पन्ना धाय" हुई है तेरे।

हीरा खुशी और डर के साथ

बापूजी पपीये की मां केसी हैं।

बढ़िया है हीरा ,काकी पास बैठी हैं। जा मिल ले

हीरा दौड़ता सा जाता हैं, धापू के चेहरे पर अब शांति और सुकून था।

ठीक है ना धापू।

हीरा बीनणी को बड़ा परेशान किया इस पन्ना ने, सिर देख इसका कितना बड़ा हैं, सवा घंटे बाद बाहर आई हैं। एक बार को तो मैं भी डर गई थी। पर बीनणी ने हिम्मत न हारी।

तभी एम्बुलेंस आ जाती हैं। धापू को जल्दी एम्बुलेंस में बैठा बोतल चढ़ाई जाती हैं। हीरा और पपिया भी साथ बैठ जाते हैं। बाकी सब को पुलिस ले के जाती हैं।

आप राजस्थान गुजरात के बॉर्डर पे हो। एम्बुलेंस राजस्थान की ही आयी हैं। हम अभी आपको राजस्थान पुलिस के हवाले कर देंगे। वो आपके परिवार को पंद्रह दिन किसी स्थान पे रखेंगे, खाना पीना सब देंगे, फिर आपको घर जाने देंगे। ठीक हैं।

बापूजी शांत भाव से - और हमें क्या चाहिए। हम आपसे डरे हुये थे पर आपने कितनी मदद की।

एम्बुलेंस में डॉक्टर हीरा को डांटती हैं। कितने गैर जिम्मेदार आदमी हो तुम। ऐसी हालत में कोई औरत को इतना चलाता हैं क्या।

बच्चा कुछ दिन बाद होनेवाला था, प्रेशर की वजह से जल्दी हो गया हैं। ये तो अच्छा हैं बच्चे ने पोजीशन ले ली थी। हेड नीचे को न होता तो। बच्चे की हार्ट बीट भी कम हो सकती थी और हो सकता हैं हुई भी हो। इसका खुद का बी पी हाई लौ हो सकता था। तुम्हारे पास तो कोई सोनोग्राफी रिपोर्ट भी नहीं हैं। आयरन कैल्शियम की गोलियां खिलाई है इसको। शुगर,ब्लड, थाइरोइड कुछ भी टेस्ट करवाया है इसका।

बच्ची चार किलो की हैं, इसमे तो सिजेरियन ही ठीक रहता। कितना बेवकूफ़ आदमी है।

पपिया डॉक्टर की बात बड़े ध्यान से सुन रहा था पर हीरा और धापू एक दूसरे को देख बस मुस्कुराए जा रहे थे।



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