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Dinesh Divakar

Horror Thriller

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Dinesh Divakar

Horror Thriller

द शैडो इन द मिरर

द शैडो इन द मिरर

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"मैंने अपने आपको आईने में देखा, और एक अजीब सी ठंडक मेरे शरीर से गुज़र गई। मेरी आँखें थकी हुई लग रही थीं, और मेरे चेहरे पर एक अजीब सी उदासी छाई हुई थी। मैं पिछले कुछ दिनों से सो नहीं पा रहा था। मुझे लग रहा था जैसे कोई मुझे देख रहा है, जैसे कोई मेरे आस पास है।


मैंने अपने चारों तरफ देखा, लेकिन मुझे कोई नहीं दिखा। कमरा बिलकुल खाली था।


मैं फिर से आईने में देखा। और तभी मैंने वो देखा।

आईने में, मेरे पीछे, एक परछाई थी।


एक भयानक परछाई।


वो परछाई धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ रही थी। उसकी आँखें लाल और भयानक थीं, और उसके दाँत नुकीले और काले थे।


मैं डर के मारे काँप रहा था। मैं जानता था कि ये कोई बुरा सपना नहीं है। ये सच है।


वो परछाई आईने से बाहर निकल आई और मेरी तरफ झपटी।


मैं चीख पड़ा और पीछे हट गया।


वो परछाई मेरे कमरे में थी। वो मुझे घूर रही थी, जैसे मुझे मार डालना चाहती हो।


मैं भागने लगा। मैं अपने घर से बाहर निकल गया और सड़क पर दौड़ने लगा।


मुझे नहीं पता था कि मैं कहाँ जा रहा हूँ। मैं बस भागना चाहता था, उस भयानक परछाई से दूर जाना चाहता था।


लेकिन वो परछाई मेरा पीछा कर रही थी। मैं उसे हर जगह देख रहा था। आईने में, खिड़कियों में, और यहाँ तक कि मेरी अपनी परछाई में भी।


मैं समझ गया कि वो मुझे कभी नहीं छोड़ेगी। वो मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गई थी। और मैं जानता था कि वो मुझे मार डालेगी।

जल्द ही।"


मैं सड़कों पर भागता रहा, हाँफ रहा था, पीछे मुड़कर बार-बार देख रहा था। वो परछाई, वो भयानक आकृति, हर जगह थी - दुकान की खिड़कियों में, स्ट्रीटलाइट्स के नीचे चमकते शीशों में, हर चमकदार सतह पर वो मेरी पीछा कर रही थी। मैं जानता था, वो मुझे कभी नहीं छोड़ेगी।


थक हार कर मैं एक सुनसान पार्क में बैठ गया। रात गहराती जा रही थी, और ठंड हवा मेरे जिस्म को चीर रही थी। मैं सोच रहा था, क्या करूँ? कैसे इस भयानक साये से छुटकारा पाऊँ?


तभी, मेरे दिमाग में एक भूली हुई याद कौनधी। बचपन में, मेरी दादी मुझे डरावनी कहानियाँ सुनाया करती थीं। एक कहानी ऐसी भी थी, जिसमें एक शैतान एक बच्चे के पीछे लग जाता है, और उससे छुटकारा पाने का एक ही तरीका होता है - उस शैतान के नाम को जानना।


क्या ये परछाई भी कोई शैतान है? क्या इसका भी कोई नाम है? ये ख्याल आते ही मेरे अंदर एक नई उम्मीद जागी। शायद ये मेरी आखिरी उम्मीद थी।

मैंने फैसला किया कि मैं इस परछाई के बारे में पता लगाऊँगा। मैं जानना चाहता था कि ये कौन है, और ये मुझसे क्या चाहती है।


अगले दिन, मैं अपनी दादी के पुराने घर गया। वो घर अब एक खंडहर में बदल गया था, लेकिन मेरी दादी की यादें अभी भी वहाँ ताज़ा थीं।

मैंने घर के हर कोने में खोजी, उनकी पुरानी किताबों में, उनके डायरी में। और आखिरकार, मुझे एक किताब मिली, जिसमें भूतो, प्रेतों और शैतानों के बारे में लिखा हुआ था।


मैंने किताब खोली और पढ़ना शुरू किया। और तभी मेरी नज़र एक नाम पर पड़ी।

"रेवेन।"


ये नाम मुझे जाना पहचाना लग रहा था। मुझे याद आया, मेरी दादी ने मुझे एक कहानी सुनाई थी, जिसमें एक शैतान का नाम रेवेन था।


क्या ये वही रेवेन है? क्या ये परछाई भी रेवेन है?

मुझे लग रहा था जैसे मैं सही रास्ते पर हूँ।


मैंने किताब में रेवेन के बारे में और पढ़ा। मुझे पता चला कि रेवेन एक बहुत ही शक्तिशाली शैतान है, और उससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल है।

लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैं जानता था कि मुझे रेवेन का सामना करना होगा।


किताब में रेवेन के बारे में पढ़कर मेरे रोंगटे खड़े हो गए। वो सिर्फ एक शैतान नहीं था, एक प्राचीन शक्ति थी, जो सदियों से लोगों को डरा रही थी। कहा जाता था कि रेवेन आईने के माध्यम से लोगों की दुनिया में दाखिल होता है, और धीरे-धीरे उनके जीवन को तबाह कर देता है।


किताब में ये भी लिखा था कि रेवेन को हराने का एक ही तरीका है - उसके असली नाम को जानना और उसे पुकारना। लेकिन रेवेन अपना असली नाम किसी को नहीं बताता। वो लोगों को धोखा देता है, झूठे नाम बताता है, और उन्हें भ्रमित करता है।


मैंने सोचा, अगर रेवेन अपना असली नाम नहीं बताता, तो मैं कैसे जानूँगा? तभी मुझे एक और बात याद आई। मेरी दादी ने मुझे बताया था कि रेवेन की एक कमजोरी है। वो सच बोलने पर मजबूर हो जाता है, जब कोई उससे तीन बार सच सवाल पूछता है।


ये मेरी आखिरी उम्मीद थी। मैंने फैसला किया कि मैं रेवेन से तीन सच सवाल पूछूँगा।

अगली रात, मैं अपने कमरे में गया और आईने के सामने खड़ा हो गया। 


मैंने अपनी आँखें बंद कीं और गहरी साँस ली।

"रेवेन," मैंने कहा। "मैं तुम्हें चुनौती देता हूँ।"

कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया। फिर, मैंने एक आवाज़ सुनी।


"तुम मुझे चुनौती देते हो?" आवाज़ रेवेन की थी। "तुम जानते हो कि मैं कितना शक्तिशाली हूँ?"


"हाँ," मैंने कहा। "लेकिन मैं डरता नहीं हूँ।"


"अच्छा," रेवेन ने कहा। "तो पूछो अपने सवाल।"


मैंने अपनी आँखें खोलीं और आईने में देखा। रेवेन मेरी तरफ देख रहा था, उसकी आँखें लाल और भयानक थीं।


"पहला सवाल," मैंने कहा। "क्या तुम वही रेवेन हो, जिसके बारे में कहानियों में लिखा है?"


"हाँ," रेवेन ने जवाब दिया।

"दूसरा सवाल," मैंने कहा। "क्या तुम आईने के माध्यम से लोगों की दुनिया में आते हो?"


"हाँ," रेवेन ने जवाब दिया।


"तीसरा सवाल," मैंने कहा। "क्या तुम्हारा कोई असली नाम है?"


रेवेन कुछ देर के लिए चुप रहा। फिर, उसने जवाब दिया।


"हाँ।"


"क्या है तुम्हारा असली नाम?" मैंने पूछा।


रेवेन हंसा, एक भयानक, ठंडी हंसी।


"ये तुम कभी नहीं जान पाओगे," उसने कहा और फिर, वो गायब हो गया।


मैं फिर से अकेला रह गया, और मेरा दिल उम्मीद और निराशा के बीच झूल रहा था। क्या मैं कभी रेवेन को हरा पाऊँगा?


रेवेन के गायब होने के बाद मैं घंटों आईने के सामने खड़ा रहा, सोचता रहा, क्या करूँ? कैसे उस शैतान का असली नाम जानूँ? उसकी हंसी मेरे कानों में गूंज रही थी, "ये तुम कभी नहीं जान पाओगे..."


लेकिन मैं हार मानने वाला नहीं था। मैंने रेवेन के बारे में और जानकारी जुटाने का फैसला किया। मैं जानता था, कहीं न कहीं, कोई सुराग ज़रूर होगा।


मैंने दादी की किताबों को फिर से खंगाला, इंटरनेट पर research की, और यहां तक कि पुराने पुस्तकालयों में भी गया। लेकिन मुझे कुछ नहीं मिला।


हर गुजरते पल के साथ मेरा डर बढ़ता जा रहा था। मैं जानता था कि रेवेन मुझे कभी भी मार सकता है।

तभी मुझे एक और बात याद आई। मेरी दादी ने मुझे बताया था कि कुछ प्राचीन भाषाओं में नामों में बहुत शक्ति होती है। अगर किसी का असली नाम जान लिया जाए, तो उस पर control किया जा सकता है।


क्या रेवेन का भी कोई प्राचीन नाम हो सकता है?

ये ख्याल आते ही मेरे अंदर एक नई उम्मीद जागी।

मैंने प्राचीन भाषाओं के बारे में पढ़ना शुरू किया। मैंने संस्कृत, लैटिन, ग्रीक और कई अन्य भाषाओं के बारे में जानकारी इकट्ठी की।


और फिर, एक दिन, मुझे एक सुराग मिला। एक पुरानी किताब में, मैंने एक नाम पढ़ा - "काली।"

ये नाम मुझे जाना पहचाना लग रहा था। मुझे याद आया, मेरी दादी ने मुझे एक कहानी सुनाई थी, जिसमें एक देवी का नाम काली था।


क्या ये वही काली है? क्या रेवेन का कोई संबंध काली से है? मैंने काली के बारे में और जानकारी इकट्ठी की। मुझे पता चला कि काली एक बहुत ही शक्तिशाली देवी है, और उन्हें संहार की देवी माना जाता है।

और तभी मुझे एक और बात याद आई। मेरी दादी ने मुझे बताया था कि काली का एक और नाम है - "रावणी।"


रावणी... रेवेन...


क्या ये दोनों एक ही हैं?


ये सवाल मेरे दिमाग में गूंज रहा था।


मैंने फैसला किया कि मुझे एक आखिरी बार रेवेन का सामना करना होगा। और इस बार, मैं तैयारी के साथ जाऊँगा।


मैंने सारी जानकारी इकट्ठा कर ली थी। रावणी, काली, रेवेन - ये सब एक ही थे, एक प्राचीन शक्ति, जो छल और कपट से लोगों को अपनी गिरफ्त में लेती थी। मुझे उसका असली नाम पता चल गया था, और यही मेरी सबसे बड़ी ताकत थी।

मैंने अपने कमरे को साफ किया, आईने के सामने एक दीया जलाया। मैंने अपने हाथ में एक चाँदी का क्रॉस थामा, और मन में प्रार्थना की।


फिर, मैंने अपनी आँखें बंद कीं और गहरी साँस ली।

"रावणी," मैंने कहा, मेरी आवाज में एक अजीब सी निडरता थी। "मैं तुम्हें चुनौती देता हूँ।"

कुछ देर तक सन्नाटा छाया रहा। फिर, मैंने एक आवाज़ सुनी।


"तुम मुझे फिर से चुनौती देते हो?" आवाज़ रेवेन की थी, लेकिन उसमें एक अलग सी घबराहट थी।

"हाँ," मैंने कहा। "और इस बार, मैं तुम्हें हरा कर रहूँगा।"


आईने में रेवेन प्रकट हुआ। वो पहले से और भी भयानक लग रहा था। उसकी आँखें गुस्से से लाल हो रही थीं, और उसके दाँत नुकीले और काले थे।

"तुम बहुत बहादुर हो," रेवेन ने कहा। "लेकिन तुम्हारी बहादुरी तुम्हें नहीं बचा सकेगी।"


"देखते हैं," मैंने कहा।

रेवेन मुझ पर झपटा। मैंने क्रॉस आगे किया, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ। रेवेन ने मेरा हाथ पकड़ लिया, और उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि मैं छुटकारा नहीं पा रहा था।


"अब तुम्हारा अंत नजदीक है," रेवेन ने कहा।

उसने अपना दूसरा हाथ ऊपर उठाया, और मैंने देखा कि उसके हाथ में एक चमकदार पत्थर है। वही पत्थर, जिसके बारे में मैंने किताब में पढ़ा था।


"ये पत्थर मेरी शक्ति का स्रोत है," रेवेन ने कहा। "और अब मैं तुम्हें अपनी पूरी शक्ति से नष्ट कर दूँगा।"

रेवेन ने पत्थर को ऊपर उठाया, और एक जोरदार रोशनी कमरे में फैल गई।


मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मुझे लग रहा था जैसे मेरा शरीर जल रहा है।


लेकिन तभी मुझे एक आवाज़ सुनाई दी।


"रावणी!"

ये आवाज़ मेरी थी।


मैंने अपनी आँखें खोलीं और देखा। रेवेन पत्थर को गिरा चुका था, और वो दर्द से चिल्ला रहा था।

"ये नाम..." वो कह रहा था। "ये नाम मुझे कमजोर बना रहा है।"


मैंने अपनी पूरी ताकत इकट्ठी की और रेवेन पर हमला कर दिया।


मैंने रेवेन के हाथ से पत्थर छीन लिया और उसे ज़मीन पर पटका।


पत्थर टुकड़े-टुकड़े हो गया।

एक जोरदार चीख के साथ, रेवेन गायब हो गया।

कमरे में सन्नाटा छा गया।


मैं ज़मीन पर गिर गया, बुरी तरह से हाँफ रहा था।

मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मैंने रेवेन को हरा दिया है।


जब मैंने अपनी आँखें खोलीं, तो कमरा पहले जैसा ही था। लेकिन एक चीज बदल गई थी। हवा में एक अजीब सी शांति थी, जैसे कोई बुरा साया चला गया हो।


मैं जानता था कि अब मैं सुरक्षित हूँ। रेवेन हमेशा के लिए चला गया था।


रेवेन के गायब होने के बाद, कमरे में एक अजीब सी शांति छा गई थी। वो शांति, जो इतने दिनों से मेरे जीवन से गायब थी। मैं ज़मीन पर लेटा हुआ था, थका हुआ, लेकिन एक अजीब सी खुशी से भरा हुआ। मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं, और एक गहरी साँस ली।


कई दिनों बाद, मैं पहली बार इतनी गहरी नींद सोया। कोई बुरा सपना नहीं, कोई डरावनी परछाई नहीं। बस एक शांत, गहरी नींद।


जब मैं जागा, तो सूरज चढ़ चुका था। कमरे में रोशनी भरी हुई थी, और हवा में एक ताजगी थी।

मैं उठा और आईने के सामने गया। मैंने अपने आपको देखा। मेरी आँखें अब थकी हुई नहीं थीं, और मेरे चेहरे पर एक मुस्कान थी।


मैं जानता था, रेवेन चला गया है। वो अब कभी वापस नहीं आएगा।


मैंने अपने घर से बाहर कदम रखा, और एक गहरी साँस ली। हवा में एक अलग सी खुशी थी, जैसे दुनिया मुस्कुरा रही हो।


मैं जानता था, मेरी जिंदगी अब बदल गई है। मैं एक नए सिरे से शुरुआत कर सकता था। मैंने अपने दोस्तों से बात की, अपने परिवार से मिला, और अपने काम पर वापस लौटा। सब कुछ पहले जैसा लग रहा था, लेकिन कुछ अलग भी था। मैं अब और मजबूत बन गया था, और मुझे किसी चीज से डर नहीं लग रहा था।


मैंने अपनी कहानी लोगों को बताई। कुछ लोगों ने विश्वास किया, कुछ ने नहीं। लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं थी। मैं जानता था कि मैंने क्या देखा है, और मैंने क्या किया है।


और मैं ये भी जानता था कि दुनिया में कई ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में हम नहीं जानते। और हमें उनसे सावधान रहना चाहिए।


लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात, हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। हमें अपने डर का सामना करना चाहिए, और अपने आप पर विश्वास रखना चाहिए।

क्योंकि अगर हम ऐसा करते हैं, तो हम किसी भी शैतान को हरा सकते हैं।


और ये कहानी भी यहीं खत्म होती है। एक ऐसी कहानी, जो हमें डर और साहस के बारे में बहुत कुछ सिखाती है। एक ऐसी कहानी, जो हमें ये भी बताती है कि हमारे अंदर कितनी शक्ति छुपी हुई है।


कई साल बीत गए। विक्रम अब एक सफल लेखक बन चुका था। उसकी कहानियाँ, जो उसने ब्लैकवुड मेनर और रेवेन के साथ अपने अनुभवों के आधार पर लिखी थीं, बेहद लोकप्रिय हो चुकी थीं। लोग उसकी कहानियों को पढ़कर रोमांचित होते थे, डरते थे, और सोचते थे कि क्या ये सच है?


विक्रम अब एक शांत जीवन जी रहा था। उसने शादी कर ली थी, और उसके दो बच्चे थे। वो अपने परिवार के साथ एक छोटे से गाँव में रहता था, शहर की भीड़-भाड़ से दूर।

लेकिन, उसके मन में एक डर हमेशा बना रहता था। रेवेन के जाने के बाद से, उसने कभी भी आईने में अपना चेहरा नहीं देखा था। उसे डर लगता था कि कहीं रेवेन फिर से वापस न आ जाए।


एक दिन, विक्रम अपने बच्चों के साथ खेल रहा था। उसके बच्चे आईने के सामने खड़े होकर अपने चेहरे देख रहे थे, और हंस रहे थे।


विक्रम ने अपने बच्चों को आईने से दूर हटने के लिए कहा। लेकिन उसके बच्चे नहीं माने।

तभी, विक्रम ने आईने में एक चीज देखी।

एक परछाई।


एक भयानक परछाई।

वो परछाई धीरे-धीरे बच्चों की तरफ बढ़ रही थी।

विक्रम के होश उड़ गए। वो जानता था, रेवेन वापस आ गया है।


उसने अपने बच्चों को जल्दी से आईने से दूर हटाया और उन्हें अपने गले से लगा लिया।

"चलो, यहाँ से चलते हैं," उसने कहा।


वो अपने बच्चों को लेकर घर से बाहर निकल गया।

लेकिन रेवेन उनका पीछा कर रहा था। वो उन्हें हर जगह देख रहा था। आईने में, खिड़कियों में, और यहाँ तक कि उनकी अपनी परछाई में भी।


विक्रम समझ गया कि रेवेन उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा। वो हमेशा उनके पीछे रहेगा, उनकी जिंदगी को तबाह करने के लिए।


लेकिन विक्रम ने हार नहीं मानी। वो जानता था कि उसे अपने बच्चों को बचाना है। उसने फैसला किया कि वो एक आखिरी बार रेवेन का सामना करेगा। और इस बार, वो उसे हमेशा के लिए खत्म कर देगा।


विक्रम जानता था कि रेवेन को हराने के लिए उसे कुछ अलग करना होगा। पिछली बार उसने रेवेन को तब हराया था जब उसने उसका असली नाम जाना था, लेकिन इस बार रेवेन और भी शक्तिशाली होकर लौटा था, और सिर्फ नाम जानने से काम नहीं चलने वाला था।


उसने अपनी पुरानी डायरी खोली, जिसमें उसने ब्लैकवुड मेनर और रेवेन के साथ अपने अनुभवों के बारे में लिखा था। उसने हर एक बात को ध्यान से पढ़ा, हर एक सुराग को खंगाला।


और फिर, उसे एक बात याद आई। रेवेन ने उसे बताया था कि उसकी शक्ति का स्रोत एक चमकदार पत्थर है। वही पत्थर, जिसे विक्रम ने पिछले मुकाबले में नष्ट कर दिया था।


लेकिन विक्रम ने ये भी पढ़ा था कि रेवेन की शक्ति सिर्फ पत्थर पर निर्भर नहीं है। वो एक प्राचीन शक्ति है, और उसे पूरी तरह से नष्ट करना बहुत मुश्किल है।

उसे समझ में आया कि रेवेन को हराने के लिए उसे उसकी शक्ति के स्रोत को खत्म करना होगा, और वो स्रोत है - डर।


रेवेन लोगों के डर से अपनी शक्ति बढ़ाता है। जितना ज्यादा लोग डरेंगे, उतना ही शक्तिशाली वो होगा।

विक्रम ने फैसला किया कि उसे लोगों के डर को खत्म करना होगा।


उसने अपने गाँव के लोगों से बात की, उन्हें अपनी कहानी बताई, और उन्हें समझाया कि रेवेन को हराने का एक ही तरीका है - निडर बनना।


गाँव के लोग पहले तो डरे हुए थे, लेकिन विक्रम की बातों ने उन्हें हौसला दिया। उन्होंने फैसला किया कि वो रेवेन से नहीं डरेंगे।


अगली रात, विक्रम अपने बच्चों और गाँव के लोगों के साथ आईने के सामने खड़ा हो गया।


"रेवेन," उसने कहा, उसकी आवाज में कोई डर नहीं था। "हम तुम्हें चुनौती देते हैं।"


रेवेन प्रकट हुआ। वो और भी भयानक लग रहा था। उसकी आँखें गुस्से से लाल हो रही थीं, और उसके दाँत नुकीले और काले थे।


"तुम मुझे फिर से चुनौती देते हो?" रेवेन ने कहा। "तुम जानते हो कि मैं कितना शक्तिशाली हूँ?"

"हाँ," विक्रम ने कहा। "लेकिन हम डरते नहीं हैं।"

रेवेन हंसा, एक भयानक, ठंडी हंसी।

"तुम मुझे नहीं हरा सकते," उसने कहा।

"हम तुम्हें हरा कर रहेंगे," विक्रम ने कहा।

और फिर, एक महामुकाबला शुरू हुआ।

रेवेन ने अपनी पूरी शक्ति का इस्तेमाल किया। उसने तूफान लाए, बिजली गिराई, और हर संभव कोशिश की लोगों को डराने की।


लेकिन गाँव के लोग डरे नहीं। वो निडर खड़े रहे, और रेवेन का सामना करते रहे। रेवेन धीरे-धीरे कमजोर होने लगा। उसकी शक्ति घटने लगी। और अंत में, वो गायब हो गया। हमेशा के लिए। इस बार, रेवेन कभी वापस नहीं आया। गाँव के लोग खुश थे। उन्होंने अपने डर पर जीत हासिल की थी।


और विक्रम, वो भी खुश था। उसने अपने बच्चों को और अपने गाँव को बचा लिया था। उसने रेवेन के चक्र को हमेशा के लिए खत्म कर दिया था।



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