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Shalini Dikshit

Abstract


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Shalini Dikshit

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बेनाम चिट्ठी

बेनाम चिट्ठी

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बेटा देखो चिट्ठी आई है......."शोभा ने चिट्ठी अपनी बेटी सलोनी को देते हुए कहा।

"मम्मी चिट्ठी.......चिट्ठी किसने भेजी?" सलोनी ने आश्चर्य से पूछा।

आज के मोबाइल और मेल के जमाने में चिट्ठी देखकर सलोनी चौक गई, लिफाफे पर भेजने वाले का नाम नहीं था तो उसने झटपट लिफाफा खोला और तुरंत चिट्टी के नीचे देखा लेकिन नीचे भी कोई नाम नहीं था, अंत में बस योर्स लिखा था। आश्चर्य के साथ वह चिट्ठी पढ़ने लगी, चिट्ठी में लिखा था-

डिअर सलोनी,

तुमने मुझसे सारे संबंध खत्म कर लिए; जितनी बार भी मैंने तुम्हे मैसेज भेज कर तुमसे कांटेक्ट करने की कोशिश करी तुमने मुझे ब्लॉक कर दिया; एक बार तो नंबर ही बदल लिया तुमने।

तेरा गुस्सा जायज था लेकिन इतना नहीं, एक बार ठीक से मेरी बात सुन तो लेती; सच कहूं फिर मुझे भी गुस्सा आ गया और मैंने भी कोई कोशिश नहीं करी तुम से बात करने की और देखो इतने साल बीत गए; आज 6 साल हो गए हमको अलग हुए।

आज एक बार फिर से पत्र में अपनी बात कहने की कोशिश कर रही हूँ काश इस बार तू मेरी बात समझ जाये।

फ्लाइंग स्कवैड को नकल की वो पर्ची जो तेरी तरफ मतलब तेरी बेंच के नीचे मिली थी वह मैंने नहीं फेंकी थी.......जब वह तुझ से पूछताछ कर रहे थे मैं इतना डर गई थी कि मैंने अपनी नजरें झुका ली और तुझे लगा कि मैंने ही पर्ची फेंकी थी और तू इतना नाराज हो गई कि उस दिन के बाद से तुमने मुझसे कोई बात ही नहीं करी। मेरी इतनी गलती जरूर है कि मैंने एक बार भी टीचर से ऐसा नहीं बोला कि यह पर्ची तेरी नहीं है किसी और ने फेंकी होगी; क्योंकि मैं डर गई थी पर तेरा यह सोचना कि वो पर्ची मेरी थी बिलकुल गलत था। क्या मैं ऐसा कर सकती थी? तुझे एक बार अपने दिल से तो पूछना चाहिए था।

कॉलेज के स्टेज प्ले का रूही, तेरा और मेरा हम तीनों सहेलियों का फोटो मैं तुझे भेज रही हूँ जो मुझे जान से प्यारा है, हो सकता इस फोटो को देखकर शायद तू पिघल जाएगी और अपना गुस्सा त्याग देगी।

मेरी शादी नवंबर में है और अगर तू नहीं आई तो मैं वरमाला नहीं डालूंगी आगे तेरी मर्जी...

योर्स.................

पत्र पढ़ते-पढ़ते सलोनी की आंखों में अफसोस के आँसू भर आये और वो सोचने लगी कि काश मैंने पहले उसकी बात ठीक से सुन ली होती।


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